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Kurukshetra News: नहर पर किसानों का पहरा जारी, बीबीपुर लेक में पानी छोड़ने पर भी राजी
Sat, 06 Sep 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 06 Sep 2025 01:01 AM IST
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कुरुक्षेत्र। नरवाना भाखड़ा ब्रांच नहर किनारे ज्योतिसर से आगे नहर की निगरानी करते हुए बैठे किसा
फोटो 46,47 भाकियू ने संभाला मोर्चा, पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ज्योतिसर के समीप हेड पर ज्योतिसर नहर पर किसानों का पहरा दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। देर रात तक किसान नहर किनारे पहरा जारी रखे हुए थे तो वहीं पुलिस भी तैनात रही। हालांकि सहमति के चलते नरवाना ब्रांच नहर व एसवाईएल से बीबीपुर लेक में दो गेटों से पानी भी उतारा जाता रहा लेकिन किसान व पुलिस प्रशासन पहरे पर रहे।
किसानों का कहना है कि प्रशासन ने ज्यादा पानी लेक में छोड़ा तो साढ़े छह हजार एकड़ से भी ज्यादा फसल प्रभावित होगी। इसमें कई गांव का एरिया शामिल होता है। प्रशासन ने वीरवारदेर रात जब मारकंडा में उफान व इन नहरों में पानी अधिक होने पर बीबीपुर लेक में पानी छोड़े जाने का प्रयास किया तो किसान अड़ गए थे। तनाव के बीच भाकियू नेता प्रिंस वड़ैच सहित अन्य किसान भी पहुंचे तो बीच-बचाव किया। बाद में किसानों के बीच से कमेटी बनाई गई, जिसकी सहमति के बाद दोनों गेटों से कुछ पानी निकाले जाने पर सहमति बनी। शुक्रवार को भी इस सहमति अनुसार लेक में पानी छोड़ा जाता रहा लेकिन किसान यहीं पर पहरा देकर कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
किसान फूल सिंह, राजपाल सिंह, प्रिंस सहित अन्य ने कहा कि शुक्रवार को भी प्रशासन ने किसानों की सहमति लेकर गेट कुछ और खोले लेकिन किसानों ने यह तय किया हुआ है कि पूरी तरह से गेट नहीं खोलने दिए जाएंगे। बता दें कि मारकंडा पूरे उफान व खतरे से निशान से ऊपर बह रही है। उसे कम करने के लिए प्रशासन इन दोनों नहरों में पानी उतार रहा है, जिसके चलते अब इन नहरों से भी किसानों को खतरा दिखाई पड़ने लगा है। ऐसे में प्रशासन भी इन नहरों पर पानी का दबाव कम करने के लिए इसे बीबीपुर लेक में उतारना चाहता था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ज्योतिसर के समीप हेड पर ज्योतिसर नहर पर किसानों का पहरा दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। देर रात तक किसान नहर किनारे पहरा जारी रखे हुए थे तो वहीं पुलिस भी तैनात रही। हालांकि सहमति के चलते नरवाना ब्रांच नहर व एसवाईएल से बीबीपुर लेक में दो गेटों से पानी भी उतारा जाता रहा लेकिन किसान व पुलिस प्रशासन पहरे पर रहे।
किसानों का कहना है कि प्रशासन ने ज्यादा पानी लेक में छोड़ा तो साढ़े छह हजार एकड़ से भी ज्यादा फसल प्रभावित होगी। इसमें कई गांव का एरिया शामिल होता है। प्रशासन ने वीरवारदेर रात जब मारकंडा में उफान व इन नहरों में पानी अधिक होने पर बीबीपुर लेक में पानी छोड़े जाने का प्रयास किया तो किसान अड़ गए थे। तनाव के बीच भाकियू नेता प्रिंस वड़ैच सहित अन्य किसान भी पहुंचे तो बीच-बचाव किया। बाद में किसानों के बीच से कमेटी बनाई गई, जिसकी सहमति के बाद दोनों गेटों से कुछ पानी निकाले जाने पर सहमति बनी। शुक्रवार को भी इस सहमति अनुसार लेक में पानी छोड़ा जाता रहा लेकिन किसान यहीं पर पहरा देकर कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
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किसान फूल सिंह, राजपाल सिंह, प्रिंस सहित अन्य ने कहा कि शुक्रवार को भी प्रशासन ने किसानों की सहमति लेकर गेट कुछ और खोले लेकिन किसानों ने यह तय किया हुआ है कि पूरी तरह से गेट नहीं खोलने दिए जाएंगे। बता दें कि मारकंडा पूरे उफान व खतरे से निशान से ऊपर बह रही है। उसे कम करने के लिए प्रशासन इन दोनों नहरों में पानी उतार रहा है, जिसके चलते अब इन नहरों से भी किसानों को खतरा दिखाई पड़ने लगा है। ऐसे में प्रशासन भी इन नहरों पर पानी का दबाव कम करने के लिए इसे बीबीपुर लेक में उतारना चाहता था।
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कुरुक्षेत्र। नरवाना भाखड़ा ब्रांच नहर किनारे ज्योतिसर से आगे नहर की निगरानी करते हुए बैठे किसा