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किसानों में बढ़ रहा प्राकृतिक खेती के प्रति रुझान : रणजीत चौटाला
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कुरुक्षेत्र। प्राकृतिक खेती हम सभी के लिए वर्तमान दौर में क्यों जरूरी है, यह सच्चाई धीरे-धीरे ही सही मगर अब किसानों को समझ आ रही है और इसी के चलते अब बड़ी संख्या में देश के विभिन्न क्षेत्रों में किसान प्राकृतिक खेती को अपना रहे हैं। ये विचार किसानों के एक प्रतिनिधि मंडल के साथ गुरुकुल कुरुक्षेत्र पहुंचे पूर्व बिजली एवं जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने कही।
उन्होंने कहा कि उनके साथ आए सभी किसान आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक कृषि के मॉडल से बहुत प्रभावित हैं और उन्हीं की प्रेरणा से यह सभी किसान रासायनिक और जैविक खेती को छोड़कर प्राकृतिक करने का संकल्प लिया है। गुरुकुल पहुंचने पर व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने पूर्व मंत्री एवं किसानों का स्वागत किया। चौटाला ने कहा कि वर्तमान में खेती में इस्तेमाल हो रहे कीटनाशक, पेस्टीसाइड के भयावह परिणाम सबके सामने हैं। कैंसर, हार्ट अटैक, शुगर आदि बीमारियों ने लोगों को घेर लिया है, इसके अलावा भूमि को उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है, पीने का पानी और पर्यावरण दूषित हो रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी के लिए खतरा और भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि अब भारत को एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य देना है तो खेती की पारंपरिक पद्धति प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने किसानों के साथ गुरुकुल के फार्म का भी अवलोकन किया जहां पर रामनिवास आर्य, डॉ. शिवेन्दु एवं डॉ. गगनदीप ने विभिन्न फसलों की गुणवत्ता और पैदावार संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करायी।
विख्यात कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. हरिओम ने कहा कि प्राकृतिक खेती सभी प्रकार से किसानों के लिए हितकर हैं। उत्पादन की बात करें तो प्राकृतिक खेती में रासायनिक खेती से अधिक उत्पादन होता है जिसकी बाजार में कीमत भी दोगुनी मिलती है। एक साथ कई सह-फसलों के मॉडल से किसान को आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है।
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इस अवसर पर सिरसा से गांव साहुवाला से गुरसाहब सिंह, जगदेव सिंह, रोड़ी से तरसेम सिंह, नाजर सिंह, राजेन्द्र नेहरा, मोहित कुमार, पीपली से अवतार शर्मा, प्रवीण कुमार, आर्यनवीर, गोदीका से हितेश सहारण, धर्मपाल मेहला आदि किसान मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि उनके साथ आए सभी किसान आचार्य देवव्रत के प्राकृतिक कृषि के मॉडल से बहुत प्रभावित हैं और उन्हीं की प्रेरणा से यह सभी किसान रासायनिक और जैविक खेती को छोड़कर प्राकृतिक करने का संकल्प लिया है। गुरुकुल पहुंचने पर व्यवस्थापक रामनिवास आर्य ने पूर्व मंत्री एवं किसानों का स्वागत किया। चौटाला ने कहा कि वर्तमान में खेती में इस्तेमाल हो रहे कीटनाशक, पेस्टीसाइड के भयावह परिणाम सबके सामने हैं। कैंसर, हार्ट अटैक, शुगर आदि बीमारियों ने लोगों को घेर लिया है, इसके अलावा भूमि को उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है, पीने का पानी और पर्यावरण दूषित हो रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी के लिए खतरा और भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यदि अब भारत को एक मजबूत और सुरक्षित भविष्य देना है तो खेती की पारंपरिक पद्धति प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने किसानों के साथ गुरुकुल के फार्म का भी अवलोकन किया जहां पर रामनिवास आर्य, डॉ. शिवेन्दु एवं डॉ. गगनदीप ने विभिन्न फसलों की गुणवत्ता और पैदावार संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करायी।
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विख्यात कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. हरिओम ने कहा कि प्राकृतिक खेती सभी प्रकार से किसानों के लिए हितकर हैं। उत्पादन की बात करें तो प्राकृतिक खेती में रासायनिक खेती से अधिक उत्पादन होता है जिसकी बाजार में कीमत भी दोगुनी मिलती है। एक साथ कई सह-फसलों के मॉडल से किसान को आर्थिक रूप से मजबूती मिलती है।
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इस अवसर पर सिरसा से गांव साहुवाला से गुरसाहब सिंह, जगदेव सिंह, रोड़ी से तरसेम सिंह, नाजर सिंह, राजेन्द्र नेहरा, मोहित कुमार, पीपली से अवतार शर्मा, प्रवीण कुमार, आर्यनवीर, गोदीका से हितेश सहारण, धर्मपाल मेहला आदि किसान मौजूद रहे।