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13 किमी के सफर में साक्षात काल से हुआ सामना
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अपने परिजनों के साथ खारकीव (यूक्रेन) से लौटी छात्रा नंदिनी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मैं अपने घरवालों को आखिरी मैसेज भेजने वाली थी कि शायद अब मैं न बच सकूं, क्योंकि हमारे आसपास हर एक-दो मिनट में मिसाइल अटैक, ब्लास्ट, एयर स्ट्राइक और गोलीबारी हो रही थी। खारकीव (यूक्रेन) से लौटी गांव अर्नैचा (पिहोवा) की रहने वाली नंदिनी (चतुर्थ वर्ष एमबीबीएस) ने शनिवार को बताया कि खारकीव रेलवे स्टेशन से लवीव 1200 किमी और लवीव से पोलैंड बॉर्डर 1400 किमी का तक सफर ज्यादा मुश्किल नहीं था। लेनिक वीएन कराजिन यूनिवर्सिटी से वाग्जाल रेलवे स्टेशन तक का 13 किलोमीटर के सफर में उनका सामना साक्षात काल से हुआ।
नंदनी कहती हैं कि वह उस मंजर को वह जिंदगी भर तक नहीं भूल पाएगी और उसे याद करते हुए अब भी उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने बताया मेरे साथ के सभी लोग बेहद डरे हुए थे। हमारे सिर के ऊपर रशियन जेट बादलों की तरह मंडरा रहे थे, जहां तक उनकी नजर जा रही थी वो इलाका पूरा सुनसान था और तहस नहस हो चुका था। कहीं गाड़ी में आग लगी हुई थी तो कहीं मलबे से उठता धुआं आसमान में जा रहा था। किसी तरह बचते-बचाते उन लोगों ने एक पुल के नीचे शरण ली। सभी एक दूसरे का हाथ पकड़ा, एक दूसरे को देखा, हिम्मत दी और भगवान शिव से सबके मंगल की कामना की, क्योंकि उस दिन महाशिवरात्रि थी। उसके बाद उन्होंने अपना आगे का सफर शुरू कर दिया।
नंदिनी ने बताया कि एक मार्च को सुबह छह बजे कर्फ्यू हटने ही उसने अपनी दोस्त अवंतिका (गुरुग्राम), पंकज (भिवानी), प्रदीप और काजल (करनाल) के साथ अपने जरूरी सामान, पानी बोतल, बिस्कुट और चिप्स के लेकर अपने रिस्क पर हॉस्टल छोड़ दिया था। वे 25-30 लोग सेंट्रल यूनिवर्सटेट मार्ग से पैदल ही रेलवे की ओर चल दिए, क्योंकि उनको सुबह आठ बजे वाली ट्रेन पकड़नी थी। इसलिए वे ठंड और बर्फबारी की परवाह किए चल दिए। एक घंटा पैदल चलने के जैसे ही सात बजे को अचानक सायरन सुनाई दिया और उसके बाद एयर स्ट्राइक, गोलीबारी शुरू हो गई।
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उन्होंने बताया उसने अपने सामने मिसाइल को गिरते देखा। यहां से उनका खतरनाक सफर शुरू हो गया। दो घंटे उन्होंने डर और मौत के साए सफर किया, मगर स्टेशन पहुंचे तो उनकी ट्रेन छूट गई थी। उसके बाद वे साढ़े बजे दूसरी ट्रेन पकड़कर लवीव पहुंचे थे। यहां से उन्होंने पोलैंड जाने के लिए तीन गुना किराया देकर बस किराए पर ली थी। पोलैंड पहुंचकर उन्होंने राहत की सांस ली।
टीटी और टीटीई ने मांगी रिश्वत
नंदिनी के बताया कि ट्रेन मिलने के बाद भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई। रेलवे स्टेशन पर टीटी ने उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोक लिया और रिश्वत लेकर ट्रेन में चढ़ाया। ट्रेन में भी सीट के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। सीट के लिए टीटीई ने उनसे 200 से 500 डॉलर की मांग की अन्यथा बीच रास्ते में ट्रेन से उतारने की धमकी दी। लिहाजा, उनको टीटीई को भी रिश्वत देनी पड़ी।
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कुरुक्षेत्र। मैं अपने घरवालों को आखिरी मैसेज भेजने वाली थी कि शायद अब मैं न बच सकूं, क्योंकि हमारे आसपास हर एक-दो मिनट में मिसाइल अटैक, ब्लास्ट, एयर स्ट्राइक और गोलीबारी हो रही थी। खारकीव (यूक्रेन) से लौटी गांव अर्नैचा (पिहोवा) की रहने वाली नंदिनी (चतुर्थ वर्ष एमबीबीएस) ने शनिवार को बताया कि खारकीव रेलवे स्टेशन से लवीव 1200 किमी और लवीव से पोलैंड बॉर्डर 1400 किमी का तक सफर ज्यादा मुश्किल नहीं था। लेनिक वीएन कराजिन यूनिवर्सिटी से वाग्जाल रेलवे स्टेशन तक का 13 किलोमीटर के सफर में उनका सामना साक्षात काल से हुआ।
नंदनी कहती हैं कि वह उस मंजर को वह जिंदगी भर तक नहीं भूल पाएगी और उसे याद करते हुए अब भी उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने बताया मेरे साथ के सभी लोग बेहद डरे हुए थे। हमारे सिर के ऊपर रशियन जेट बादलों की तरह मंडरा रहे थे, जहां तक उनकी नजर जा रही थी वो इलाका पूरा सुनसान था और तहस नहस हो चुका था। कहीं गाड़ी में आग लगी हुई थी तो कहीं मलबे से उठता धुआं आसमान में जा रहा था। किसी तरह बचते-बचाते उन लोगों ने एक पुल के नीचे शरण ली। सभी एक दूसरे का हाथ पकड़ा, एक दूसरे को देखा, हिम्मत दी और भगवान शिव से सबके मंगल की कामना की, क्योंकि उस दिन महाशिवरात्रि थी। उसके बाद उन्होंने अपना आगे का सफर शुरू कर दिया।
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नंदिनी ने बताया कि एक मार्च को सुबह छह बजे कर्फ्यू हटने ही उसने अपनी दोस्त अवंतिका (गुरुग्राम), पंकज (भिवानी), प्रदीप और काजल (करनाल) के साथ अपने जरूरी सामान, पानी बोतल, बिस्कुट और चिप्स के लेकर अपने रिस्क पर हॉस्टल छोड़ दिया था। वे 25-30 लोग सेंट्रल यूनिवर्सटेट मार्ग से पैदल ही रेलवे की ओर चल दिए, क्योंकि उनको सुबह आठ बजे वाली ट्रेन पकड़नी थी। इसलिए वे ठंड और बर्फबारी की परवाह किए चल दिए। एक घंटा पैदल चलने के जैसे ही सात बजे को अचानक सायरन सुनाई दिया और उसके बाद एयर स्ट्राइक, गोलीबारी शुरू हो गई।
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उन्होंने बताया उसने अपने सामने मिसाइल को गिरते देखा। यहां से उनका खतरनाक सफर शुरू हो गया। दो घंटे उन्होंने डर और मौत के साए सफर किया, मगर स्टेशन पहुंचे तो उनकी ट्रेन छूट गई थी। उसके बाद वे साढ़े बजे दूसरी ट्रेन पकड़कर लवीव पहुंचे थे। यहां से उन्होंने पोलैंड जाने के लिए तीन गुना किराया देकर बस किराए पर ली थी। पोलैंड पहुंचकर उन्होंने राहत की सांस ली।
टीटी और टीटीई ने मांगी रिश्वत
नंदिनी के बताया कि ट्रेन मिलने के बाद भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई। रेलवे स्टेशन पर टीटी ने उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोक लिया और रिश्वत लेकर ट्रेन में चढ़ाया। ट्रेन में भी सीट के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। सीट के लिए टीटीई ने उनसे 200 से 500 डॉलर की मांग की अन्यथा बीच रास्ते में ट्रेन से उतारने की धमकी दी। लिहाजा, उनको टीटीई को भी रिश्वत देनी पड़ी।