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Kurukshetra News: युवाओं को गीता का मर्म समझा गए हरियाणा, केरल और उत्तराखंड के महामहिम
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कुरुक्षेत्र। संगोष्ठी में संबोधित करते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम हॉल में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सहयोग से श्रीमद्भगवद् गीता आधारित संतुलित प्रकृति-शुद्ध पर्यावरण विषय पर नौवें तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यातिथि हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय रहे। उन्हाेंने कहा कि गीता पूरे विश्व को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है तथा मानवता कल्याण का ऐसा ग्रंथ है, जिसके माध्यम से मानव जीवन से जुड़ी हुई सभी समस्याओं का समाधान निहित है।
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि गीता के संदेश का निर्वहन करते हुए 2035 तक सरकार सौर उर्जा के माध्यम से छह हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रदेश सरकार भी सौर उर्जा के माध्यम से कार्बन के उत्सर्जन पर नियंत्रण कर पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि अपनी सामाजिक समस्याओं के निवारण के लिए गीता का पाठ अवश्य करें।
विशिष्ट अतिथि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि गीता भारत के सांस्कृतिक इतिहास की विरासत है, जोकि मानव कल्याण का ग्रंथ है। इसमें भारतीय एकता एवं अखंडता का स्वरूप दिखाई देता है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गीता का महत्वपूर्ण योगदान है। आवश्यकता है गीता के पर्यावरण संरक्षण संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचाने की।
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विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि गीता मानवता के जीवन दर्शन का सार है। धर्म और ज्ञान की भूमि कुरुक्षेत्र आकर पूर्णता की अनुभूति हो रही है। गीता धार्मिक, नैतिक ग्रंथ है जो हमें सभी जिज्ञासाओं, अंदर से मजबूती, संकट के समय सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है। चुनौती कुछ भी हो उसका समाधान गीता में ही मिलेगा। पर्यावरण तो एक विषय है, इसके अलावा जितनी भी चुनौतियां हैं, अगर गीता समझ गए तो सभी चुनौतियों का समाधान मिल जाएगा।
गीता मनीषी व जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि देवस्वरूपा गीता में पर्यावरण का वैश्विक संदेश निहित है। तंजानिया के जांजीबार की यूथ एवं कल्चरल मिनिस्टर ताबिया ने कहा कि भारत और तंजानिया के शिक्षा एवं कृषि क्षेत्र में गहरे संबंध है। इस तरह के आयोजनों से आपसी संबंध मजबूत होंगे, जिससे संस्कृति, कृषि, स्वास्थ्य, व्यापार, शिक्षा, शोध व अन्य क्षेत्रों में लाभ होगा। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता उपदेश में खोज और जिज्ञासा की भावना निहित है। आईएचएम निदेशक तिरूचरापल्ली के डॉ. पवन कुमार ने कहा कि भगवद्गीता को हमें अपने पास रखना चाहिए।
संगोष्ठी में 700 शोध पत्र किए जाएंगे प्रस्तुत
लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 15 विभागों द्वारा 12 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया, जिसमें विषय विशेषज्ञ 700 से अधिक गीता आधारित शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे व युवाओं को गीता का मर्म समझाएंगे।
भारत के 145 करोड़ लोगों में गीता समाहित
स्वदेशी जागरण मंच के सह-संगठक व आर्थिक विशेषज्ञ सतीश कुमार ने कहा कि विश्व में गीता के पर्यावरण संरक्षण सिद्धांत को लागू करने की आवश्यकता है। 4.5 प्रतिशत आबादी वाला अमेरिका विश्व के 40 प्रतिशत संसाधन का उपयोग करता है। चीन 26 प्रतिशत प्रदूषण कर रहा है। भारत के 145 करोड़ लोगों में गीता समाहित है। भारत की आत्मा ही श्रीमद्भगवद्गीता है।
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राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि गीता के संदेश का निर्वहन करते हुए 2035 तक सरकार सौर उर्जा के माध्यम से छह हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रदेश सरकार भी सौर उर्जा के माध्यम से कार्बन के उत्सर्जन पर नियंत्रण कर पर्यावरण संतुलन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि अपनी सामाजिक समस्याओं के निवारण के लिए गीता का पाठ अवश्य करें।
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विशिष्ट अतिथि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि गीता भारत के सांस्कृतिक इतिहास की विरासत है, जोकि मानव कल्याण का ग्रंथ है। इसमें भारतीय एकता एवं अखंडता का स्वरूप दिखाई देता है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में गीता का महत्वपूर्ण योगदान है। आवश्यकता है गीता के पर्यावरण संरक्षण संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचाने की।
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विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि गीता मानवता के जीवन दर्शन का सार है। धर्म और ज्ञान की भूमि कुरुक्षेत्र आकर पूर्णता की अनुभूति हो रही है। गीता धार्मिक, नैतिक ग्रंथ है जो हमें सभी जिज्ञासाओं, अंदर से मजबूती, संकट के समय सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है। चुनौती कुछ भी हो उसका समाधान गीता में ही मिलेगा। पर्यावरण तो एक विषय है, इसके अलावा जितनी भी चुनौतियां हैं, अगर गीता समझ गए तो सभी चुनौतियों का समाधान मिल जाएगा।
गीता मनीषी व जीओ गीता के संस्थापक स्वामी ज्ञानानंद ने कहा कि देवस्वरूपा गीता में पर्यावरण का वैश्विक संदेश निहित है। तंजानिया के जांजीबार की यूथ एवं कल्चरल मिनिस्टर ताबिया ने कहा कि भारत और तंजानिया के शिक्षा एवं कृषि क्षेत्र में गहरे संबंध है। इस तरह के आयोजनों से आपसी संबंध मजबूत होंगे, जिससे संस्कृति, कृषि, स्वास्थ्य, व्यापार, शिक्षा, शोध व अन्य क्षेत्रों में लाभ होगा। कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने कहा कि गीता उपदेश में खोज और जिज्ञासा की भावना निहित है। आईएचएम निदेशक तिरूचरापल्ली के डॉ. पवन कुमार ने कहा कि भगवद्गीता को हमें अपने पास रखना चाहिए।
संगोष्ठी में 700 शोध पत्र किए जाएंगे प्रस्तुत
लोक संपर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने बताया कि तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 15 विभागों द्वारा 12 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया, जिसमें विषय विशेषज्ञ 700 से अधिक गीता आधारित शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे व युवाओं को गीता का मर्म समझाएंगे।
भारत के 145 करोड़ लोगों में गीता समाहित
स्वदेशी जागरण मंच के सह-संगठक व आर्थिक विशेषज्ञ सतीश कुमार ने कहा कि विश्व में गीता के पर्यावरण संरक्षण सिद्धांत को लागू करने की आवश्यकता है। 4.5 प्रतिशत आबादी वाला अमेरिका विश्व के 40 प्रतिशत संसाधन का उपयोग करता है। चीन 26 प्रतिशत प्रदूषण कर रहा है। भारत के 145 करोड़ लोगों में गीता समाहित है। भारत की आत्मा ही श्रीमद्भगवद्गीता है।

कुरुक्षेत्र। संगोष्ठी में संबोधित करते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह।

कुरुक्षेत्र। संगोष्ठी में संबोधित करते हुए उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह।