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Kurukshetra News: एमएससी जूलॉजी व एमएससी फोरेंसिक साइंस में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा 25 को
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कुरुक्षेत्र। प्रो. अनीता भटनागर, विभागाध्यक्ष।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संस्थानों में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 मई से जारी है। जूलॉजी विभाग में एमएससी जूलॉजी प्रोग्राम की 60 तथा एमएससी फोरेंसिक साइंस प्रोग्राम की 30 सीटों में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की गई है। इच्छुक विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा 25 जून को आयोजित होगी।
विभागाध्यक्ष प्रो. अनिता भटनागर ने बताया कि जूलॉजी विभाग सबसे पुराने और अग्रणी विभाग में से एक है। इसकी स्थापना 1967 में हुई थी। एमएससी प्राणीशास्त्र की डिग्री प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों के सामने कॅरिअर की अनेक संभावनाएं खुल जाती हैं। वे सीएसआईआर, आईसीएआर, भारतीय वन्यजीव संस्थान, पर्यावरणीय शोध केंद्रों और अन्य शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में शोधकर्ता या वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर सकते हैं। यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर वे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक या व्याख्याता बन सकते हैं। इसके अलावा, वन विभाग, मत्स्य पालन विभाग, पर्यावरण मंत्रालय, जैव विविधता बोर्ड तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे सरकारी विभागों में विभिन्न पदों पर कार्य के अवसर उपलब्ध हैं।
विभागाध्यक्ष प्रो. अनिता भटनागर ने बताया कि विभाग द्वारा उल्लेखनीय प्रभाव कारकों के साथ 1300 से अधिक शोध पत्र, लगभग 170 पीएचडी स्नातक, आठ पेटेंट और कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इसके पूर्व छात्रों ने भारत और विदेशों में जेडएसआई, एमआरआई, आईएफएस, जैसे संगठनों में तथा आईएएस और आईपीएस, कुलपति, निदेशक और उच्च पदस्थ अधिकारियों जैसी प्रतिष्ठित पद हासिल किए हैं।
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विभागाध्यक्ष प्रो. अनिता भटनागर ने बताया कि जूलॉजी विभाग सबसे पुराने और अग्रणी विभाग में से एक है। इसकी स्थापना 1967 में हुई थी। एमएससी प्राणीशास्त्र की डिग्री प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों के सामने कॅरिअर की अनेक संभावनाएं खुल जाती हैं। वे सीएसआईआर, आईसीएआर, भारतीय वन्यजीव संस्थान, पर्यावरणीय शोध केंद्रों और अन्य शीर्ष अनुसंधान संस्थानों में शोधकर्ता या वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर सकते हैं। यूजीसी-नेट जैसी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर वे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक या व्याख्याता बन सकते हैं। इसके अलावा, वन विभाग, मत्स्य पालन विभाग, पर्यावरण मंत्रालय, जैव विविधता बोर्ड तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे सरकारी विभागों में विभिन्न पदों पर कार्य के अवसर उपलब्ध हैं।
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विभागाध्यक्ष प्रो. अनिता भटनागर ने बताया कि विभाग द्वारा उल्लेखनीय प्रभाव कारकों के साथ 1300 से अधिक शोध पत्र, लगभग 170 पीएचडी स्नातक, आठ पेटेंट और कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं। इसके पूर्व छात्रों ने भारत और विदेशों में जेडएसआई, एमआरआई, आईएफएस, जैसे संगठनों में तथा आईएएस और आईपीएस, कुलपति, निदेशक और उच्च पदस्थ अधिकारियों जैसी प्रतिष्ठित पद हासिल किए हैं।
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