फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Engaged in rice 'flag' disease, crop farmers are uprooted

धान में लगा ‘झंडा’ रोग, किसान उखाड़ रहे फसल

Tue, 29 Jul 2014 11:56 PM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र Updated Tue, 29 Jul 2014 11:56 PM IST
विज्ञापन
Engaged in rice 'flag' disease, crop farmers are uprooted
पीबी-1509 के घटिया बीज की सप्लाई और बीज का सही ट्रीटमेंट न होने से धान की फसल में झंडा रोग (वैज्ञानिक नाम बकानी) की चपेट में है।
विज्ञापन


कृषि विभाग के मुताबिक इस बार कुरुक्षेत्र में करीब तीन लाख एकड़ भूमि पर धान की रोपाई हुई है। बुरी खबर ये है कि इस फसल पर कमजोर मानसून के अलावा झंडा रोग का प्रकोप दिख रहा है।

कुरुक्षेत्र में धान की अधिक पैदावार होती है। किसान कई किस्म की धान का उत्पादन करते हैं। इस बार पीबी-1509 की रोपाई भी जमकर की गई है। दुर्भाग्यवश इसमें इसमें फैले झंडा रोग (वैज्ञानिक नाम बकानी) ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
विज्ञापन


कुरुक्षेत्र में झंडा रोग से परेशान किसान फसल उखाड़कर दोबारा बीजाई कर करने को विवश हैं। वहीं अधिकांश किसान झंडा ग्रस्त फसल को भगवान भरोसे छोड़ चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बहरहाल किसानों के अलावा कृषि विशेषज्ञ भी इस रोग के प्रति चिंतित हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि झंडा रोग फैलने का बड़ा कारण बासमती पीबी-1509 का नकली बीज है। हालांकि कुछ वैज्ञानिक इसके और भी दो कारण बता रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों में इस इलाके के किसान अधिकतर सीएसआर-30 बासमती और दूसरी किस्म पीबी-1121 लगाते रहे हैं।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तीसरी किस्म मार्केट में आई पीबी-1509। इससे बासमती का एरिया बढ़ गया। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि पीबी-1509 की पैदावार अधिक है और रोपाई के बाद यह फसल महज 95 दिन लेती है। यही कारण रहा कि पीबी-1509 की डिमांड में एकदम उछाल आ गया और बीज विक्रेताओं ने इसे हाथोंहाथ ले लिया।

बर्बादी के तीन कारण
विशेषज्ञों के अनुसार पीबी-1509 की बढ़ती मांग के कारण किसानों को घटिया और नकली बीज थमाया और अब यही घटिया बीज झंडा रोग का सबसे अहम कारण बना है।

विशेषज्ञ झंडा रोग का दूसरा कारण बीज का सही उपचार न होना बता रहे हैं। इनके मुताबिक  जिन किसानों ने बीज का सही उपचार नहीं किया और नर्सरी में विशेषज्ञों द्वारा बताई दवा नहीं डाली उसकी वजह से भी झंडा रोग फैला है।

विशेषज्ञों ने झंडा रोग का तीसरा कारण बताया जा रहा कि जिन किसानों ने पौध बिना पानी दिए सूखे में उखाड़ दी,वहां भी ये रोग ज्यादा फैला है।

पिछले वर्षों में भी झंडा रोग फसलों में आता रहा है। लेकिन इस बार इस रोग ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब इसमें कृषि विभाग की खामियां सामने आ रही हैं। कृषि विभाग की निगरानी और चौकसी रहती तो शायद किसानों को इस बड़ी क्षति से बचाया जा सकता था।

दवाई का असर नहीं : विशेषज्ञ

कृषि विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह के मुताबिक धान की प्रति एकड़ फसल में एक बार कीटनाशक डालने पर करीब पांच सौ रुपये खर्च होते हैं।

उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे फसल में कोई दवाई न डालें और झंडा रोग को रोकने के लिए भी किसी प्रकार की दवा का छिड़काव न करें। क्योंकि इस पर किसी दवा का असर नहीं होगा।

उपनिदेशक का नकली बीज से इंकार
कृषि विभाग के उपनिदेशक सुरेंद्र यादव ने माना कि इस बार झंडा रोग अधिक दिख रहा है। उन्होंने इस बात से इंकार किया है कि इस बार मार्केट में पीबी-1509 का नकली बीज किसानों को बेचा गया।

यादव का कहना है कि इसका बड़ा कारण सही ट्रीटमेंट न होना है। कुरुक्षेत्र की करीब तीन लाख एकड़ भूमि पर हुई धान की खेती में कितनी फसल पीबी-1509 है और इसमें कितनी फसल झंडा रोग की जद में है इसका सर्वे कृषि विभाग द्वारा कराया जा रहा है।


इधर, मंगलवार की बारिश को बता रहे हैं वरदान
पिछले कई दिनों से बारिश न होना किसानों की चिंता का अहम कारण बना हुआ था। लेकिन आज हुई बारिश को कृषि विशेषज्ञ वरदान बता रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक धान की फसल, पत्तेदार व बेल सब्जियों और चारे वाली फसलों के लिए यह बरसात लाभदायक सिद्ध होगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम की वजह से फसलों की रुकी हुई ग्रोथ अब शुरू होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed