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Kurukshetra News: नारी सशक्तिकरण की मजबूती पर दिया जोर
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कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित प्रांतिय शिवर के समापन पर लेजियम की प्रस्तुति देती
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। संसार में विचारों की शक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। अगर चिन्तन, आपके विचार उच्च श्रेणी के हैं तो एक न एक दिन दुनिया इस विशेषता को अवश्य पहचानेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ऐसे विचार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।
उक्त शब्द शुक्रवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में चल रहे आर्य वीरांगना दल के प्रांतीय योग एवं जीवन निर्माण के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे गुजरात के राज्यपाल के ओएसडी डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने कहे। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण की परिकल्पना वैचारिक क्रांति के बिना संभव नहीं है, जब कि हमारे विचारों में बदलाव नहीं होगा, हम समाज में बदलाव नहीं कर सकते।
महर्षि दयानंद का चिन्तन, उनका दर्शन नारी सशक्तिकरण का प्रबल पक्षधर रहा है उन्होंने ही सर्वप्रथम नारी को समान शिक्षा और समान अधिकार के कथन को मजबूती से समाज में रखा था। इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग, प्राचार्य सूबे प्रताप, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, प्रशिक्षण प्रमुख संजीव आर्य, शिविर संयोजक जयपाल आर्य, वेद प्रचारक मनीराम आर्य, रामनिवास आर्य, जसविन्द्र आर्य सहित मुख्य शिक्षिका बहन अभिलाषा आर्या, बहन सुमेधा आर्या सहित अन्य सभी शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। आर्य प्रतिनिधि सभा के अंतरंग सदस्य राममेहर आर्य भी समारोह में विशेष रुप से उपस्थित रहे।
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समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में उप जिला शिक्षा अधिकारी संतोष चौहान ने कहा कि बेटियां समाज का आभूषण होती है, यदि एक बेटी का जीवन सुधरता है तो वह कई कुलों के जीवन को सुधारने की क्षमता रखती है। ऐसे में बेटियों को शिक्षित और सबल होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शाॅर्टकट नहीं होता, अनुशासित जीवन और नियमित परिश्रम करने वाले जीवन में उच्च शिखर पर अवश्य पहुंचते हैं। इससे पूर्व शिविर में आईं आर्य वीरांगनाओं ने सर्वांगसुंदर व्यायाम, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, नियुद्धम्, डम्बल, लेजियम आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। संसार में विचारों की शक्ति सबसे महत्वपूर्ण है। अगर चिन्तन, आपके विचार उच्च श्रेणी के हैं तो एक न एक दिन दुनिया इस विशेषता को अवश्य पहचानेगी और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए ऐसे विचार महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।
उक्त शब्द शुक्रवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में चल रहे आर्य वीरांगना दल के प्रांतीय योग एवं जीवन निर्माण के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे गुजरात के राज्यपाल के ओएसडी डॉ. राजेन्द्र विद्यालंकार ने कहे। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण की परिकल्पना वैचारिक क्रांति के बिना संभव नहीं है, जब कि हमारे विचारों में बदलाव नहीं होगा, हम समाज में बदलाव नहीं कर सकते।
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महर्षि दयानंद का चिन्तन, उनका दर्शन नारी सशक्तिकरण का प्रबल पक्षधर रहा है उन्होंने ही सर्वप्रथम नारी को समान शिक्षा और समान अधिकार के कथन को मजबूती से समाज में रखा था। इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान राजकुमार गर्ग, प्राचार्य सूबे प्रताप, व्यवस्थापक रामनिवास आर्य, प्रशिक्षण प्रमुख संजीव आर्य, शिविर संयोजक जयपाल आर्य, वेद प्रचारक मनीराम आर्य, रामनिवास आर्य, जसविन्द्र आर्य सहित मुख्य शिक्षिका बहन अभिलाषा आर्या, बहन सुमेधा आर्या सहित अन्य सभी शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। आर्य प्रतिनिधि सभा के अंतरंग सदस्य राममेहर आर्य भी समारोह में विशेष रुप से उपस्थित रहे।
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समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में उप जिला शिक्षा अधिकारी संतोष चौहान ने कहा कि बेटियां समाज का आभूषण होती है, यदि एक बेटी का जीवन सुधरता है तो वह कई कुलों के जीवन को सुधारने की क्षमता रखती है। ऐसे में बेटियों को शिक्षित और सबल होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शाॅर्टकट नहीं होता, अनुशासित जीवन और नियमित परिश्रम करने वाले जीवन में उच्च शिखर पर अवश्य पहुंचते हैं। इससे पूर्व शिविर में आईं आर्य वीरांगनाओं ने सर्वांगसुंदर व्यायाम, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार, नियुद्धम्, डम्बल, लेजियम आदि मौजूद रहे।