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बिजली कर्मी बोले, सबसे कम डीसी रेट हमें ही क्यों
अमर उजाला/ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Thu, 24 Jul 2014 12:16 AM IST
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जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी डीसी रेट पर बिजली वितरण निगम में लगे कर्मचारियों की मांगों को लेकर बुधवार को डीसी से मिले।
बिजली कर्मचारियों ने बताया कि बिजली निगम में छह साल से कार्यरत एएलएम और एसए का डीसी रेट कैथल में 14, 560 रुपये, करनाल में 11 हजार और जींद में 13, 660 रुपये है।
कुरुक्षेत्र में इन कर्मचारियों का डीसी रेट 9900 रुपये है। कर्मचारियों ने कहा कि सबसे कम डीसी रेट देकर उनका शोषण किया जा रहा है।
डीसी रेट बढ़ाने की मांग को लेकर बिजली कर्मचारी जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी के पास पंचायत भवन में उनके कार्यालय में पहुंचे। जिस पर प्रवीण चौधरी सभी कर्मचारियों को साथ लेकर डीसी से मिले।
उन्होंने कहा कि कम डीसी रेट देना पूरी तरह से गलत है। चौधरी ने कहा कि जब अन्य जिलों में डीसी रेट ज्यादा है तो कुरुक्षेत्र के कर्मचारियों को कम डीसी रेट क्यों दिया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल और कृषि भूमि बेहतर होने के कारण कुरुक्षेत्र के बिजली कर्मचारियों पर काम का दबाव अधिक रहता है।
ऐसे में उनसे ज्यादा काम लेकर कम वेतन दिया जाना अन्याय है। प्रवीण चौधरी ने कहा कि कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और यमुनानगर में महंगाई एक समान है।
ऐसे में डीसी रेट में इतना अंतर होने से स्पष्ट है कि कुरुक्षेत्र के कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। जिस पर डीसी ने तुरंत जिला राजस्व अधिकारी को मौके पर बुलाया और अन्य जिलों के डीसी रेट को चेककर रिपोर्ट देने के लिए कहा, ताकि कुरुक्षेत्र के कर्मचारियों का डीसी रेट भी बढ़ाया जा सके।
बिजली कर्मी बलजिंद्र, राजीव, रविंद्र सिंह, शिव कुमार, सुरेंद्र मथाना, राजेश, मनोज रतगल, विजय, मनीष कुमार और सुभाष ने बताया कि वे पूरा दिन जान जोखिम में डालकर बिजली ठीक करते हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो जोखिम भत्ता दिया जाता है और न ही मेडिकल सुविधा।
जिसके चलते चोट लगने पर उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती। कर्मचारियों ने कहा कि उनका काम खतरे का है। इसलिए उन्हें जोखिम भत्ता और मेडिकल सुविधा का लाभ दिया जाना चाहिए, ताकि चोट लगने पर उनका इलाज हो सके।
कर्मचारियों ने बताया कि डीसी रेट पर लगे कई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान घायल भी हुए हैं। इन कर्मचारियों को किसी तरह की आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।
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बिजली कर्मचारियों ने बताया कि बिजली निगम में छह साल से कार्यरत एएलएम और एसए का डीसी रेट कैथल में 14, 560 रुपये, करनाल में 11 हजार और जींद में 13, 660 रुपये है।
कुरुक्षेत्र में इन कर्मचारियों का डीसी रेट 9900 रुपये है। कर्मचारियों ने कहा कि सबसे कम डीसी रेट देकर उनका शोषण किया जा रहा है।
डीसी रेट बढ़ाने की मांग को लेकर बिजली कर्मचारी जिला परिषद चेयरमैन प्रवीण चौधरी के पास पंचायत भवन में उनके कार्यालय में पहुंचे। जिस पर प्रवीण चौधरी सभी कर्मचारियों को साथ लेकर डीसी से मिले।
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उन्होंने कहा कि कम डीसी रेट देना पूरी तरह से गलत है। चौधरी ने कहा कि जब अन्य जिलों में डीसी रेट ज्यादा है तो कुरुक्षेत्र के कर्मचारियों को कम डीसी रेट क्यों दिया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थल और कृषि भूमि बेहतर होने के कारण कुरुक्षेत्र के बिजली कर्मचारियों पर काम का दबाव अधिक रहता है।
ऐसे में उनसे ज्यादा काम लेकर कम वेतन दिया जाना अन्याय है। प्रवीण चौधरी ने कहा कि कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल और यमुनानगर में महंगाई एक समान है।
ऐसे में डीसी रेट में इतना अंतर होने से स्पष्ट है कि कुरुक्षेत्र के कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। जिस पर डीसी ने तुरंत जिला राजस्व अधिकारी को मौके पर बुलाया और अन्य जिलों के डीसी रेट को चेककर रिपोर्ट देने के लिए कहा, ताकि कुरुक्षेत्र के कर्मचारियों का डीसी रेट भी बढ़ाया जा सके।
बिजली कर्मी बलजिंद्र, राजीव, रविंद्र सिंह, शिव कुमार, सुरेंद्र मथाना, राजेश, मनोज रतगल, विजय, मनीष कुमार और सुभाष ने बताया कि वे पूरा दिन जान जोखिम में डालकर बिजली ठीक करते हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो जोखिम भत्ता दिया जाता है और न ही मेडिकल सुविधा।
जिसके चलते चोट लगने पर उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं हो पाती। कर्मचारियों ने कहा कि उनका काम खतरे का है। इसलिए उन्हें जोखिम भत्ता और मेडिकल सुविधा का लाभ दिया जाना चाहिए, ताकि चोट लगने पर उनका इलाज हो सके।
कर्मचारियों ने बताया कि डीसी रेट पर लगे कई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान घायल भी हुए हैं। इन कर्मचारियों को किसी तरह की आर्थिक सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई।