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आठ वर्षीय बच्चे की मारकंडा नदी में डूबने से मौत, तीन घंटे बरामद हुआ शव
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गांव कलसाना में मारकंडा नदी में डूबने से एक आठ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई है। बच्चे की शिनाख्त नैतिक के रूप में हुई है। तीन घंटे बाद गांव के युवकों ने शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी कुरुक्षेत्र भेज दिया है। हालांकि नदी में पानी की गहराई कम थी लेकिन माइनिंग के कारण बने गड्ढे नैतिक की जान के दुश्मन बने हैं। जानकारी के मुताबिक नैतिक शनिवार को दोपहर करीब 3 बजे अपने दोस्तों के साथ गांव के बाहरी छोर पर मारकंडा नदी में नहाने गया था। कुछ देर नहाने के बाद उसके दोस्त नदी से बाहर आ गए लेकिन नैतिक नहाता ही रहा। इसी दौरान नैतिक का पांव फिसल गया और वह नदी में डूब गया। नैतिक को डूबते देख उसके दोस्तों ने शोर मचाया, लेकिन आस-पास कोई नहीं था। कुछ समय बाद गांव के लोग जब नदी पर पहुंचे तो नैतिक डूब चुका था। नैतिक को बाहर निकालने के लिए गांव के 8-10 युवक नदी में कूदे, मगर नैतिक नहीं मिला। इस पर गांव के युवकों ने ही सर्च अभियान चलाकर करीब तीन घंटे बाद आधा किलोमीटर दूर पुल से नैतिक को बाहर निकालकर निजी अस्पताल ले गए। यहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एलएनजेपी भेज दिया है। नैतिक गांव के ही सरकारी स्कूल में पांचवी कक्षा में पढ़ता था।
ग्रामीणों का आरोप है कि माइनिंग के कारण मारकंडा नदी में गहरे गड्ढे हो गए हैं। नैतिक भी कहीं न कहीं ऐसे ही गड्ढे में फंसकर काल का ग्रास बना है। प्रशासन से डरे बिना माइनिंग चल रही है। इस तरह से माइनिंग चलती रही तो यह गांव के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वहीं इस हादसे के बाद से गांव के अन्य बच्चे भी काफी डरे हुए है। माता-पिता बच्चों को भविष्य में नदी पर न नहाने के लिए समझा रहे है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि माइनिंग के कारण मारकंडा नदी में गहरे गड्ढे हो गए हैं। नैतिक भी कहीं न कहीं ऐसे ही गड्ढे में फंसकर काल का ग्रास बना है। प्रशासन से डरे बिना माइनिंग चल रही है। इस तरह से माइनिंग चलती रही तो यह गांव के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वहीं इस हादसे के बाद से गांव के अन्य बच्चे भी काफी डरे हुए है। माता-पिता बच्चों को भविष्य में नदी पर न नहाने के लिए समझा रहे है।
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