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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में 'रत्नावली' महोत्सव शुरू, चार दिन 2 हजार कलाकार और शानदार प्रस्तुतियां
Sat, 02 Nov 2019 12:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
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Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Nov 2019 12:00 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा ने कहा है कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित सांस्कृतिक महाकुंभ रत्नावली 2 से 5 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। इसका उद्घाटन जलशक्ति, सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय, राज्यमंत्री रतनलाल कटारिया करेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा के निर्देशानुसार इस महोत्सव का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हर वर्ष की तरह भव्य तरीके से आयोजन किया जाएगा। वे शुक्रवार को सीनेट हॉल में पत्रकारवार्ता को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष रत्नावली में 30 विधाओं में 2000 से अधिक कलाकार 6 अलग-अलग मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे सकेंगे व चार दिन तक अपनी प्रस्तुतियां देकर हरियाणवी संस्कृति के विविध आयामी रंग बिखेरेंगे। उन्होंने बताया कि रत्नावली महोत्सव हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पिछले 34 वर्षों से इस महोत्सव का आयोजन राज्य स्तरीय कार्यक्रम के रूप में करता रहा है। गांव की अवधारणा रत्नावली के माध्यम से दुनिया के कोने-कोने में पहुंचे उस दिशा में भी प्रयास किए गए हैं।
हरियाणा की कला एवं शिल्प को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इस बार हरियाणा शिल्प ग्राम पंडाल बनाया गया है, जिसमें युवा हरियाणा की कला एवं शिल्प से रूबरू हो सकेंगे। हरियाणा के प्राचीन गांव व उनकी अवधारणा को इस बार देखना है तो रत्नावली उसके लिए सबसे सुनहरा अवसर है। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग ने इस बार हरियाणा शिल्प ग्राम को प्रमुखता से जन-जन पहुंचाने के लिए यह प्रयास शुरू किए हैं। गांव की अवधारणा को धरोहर में संजोने के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने रत्नावली के माध्यम से भी इसे हर वर्ष जीवंत करने का निर्णय लिया है।
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युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग पिछले 3 दशकों से हरियाणा की कला एवं संस्कृति को नई पहचान देने व उसे अगली पीढ़ी को देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इस वर्ष का रत्नावली महोत्सव विशेष रहेगा इस कार्यक्रम के तहत इस वर्ष हरियाणवी आर्केस्ट्रा, सोलो डांस, हरियाणवी कोरियोग्राफी, सांग प्रतियोगिता, रागिनी प्रतियोगिता, ग्रुप सांग, मोनो एक्टिंग, ग्रुप डॉंस रसिया जैसी प्रतियोगिताएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
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उन्होंने कहा कि इस वर्ष रत्नावली में 30 विधाओं में 2000 से अधिक कलाकार 6 अलग-अलग मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे सकेंगे व चार दिन तक अपनी प्रस्तुतियां देकर हरियाणवी संस्कृति के विविध आयामी रंग बिखेरेंगे। उन्होंने बताया कि रत्नावली महोत्सव हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पिछले 34 वर्षों से इस महोत्सव का आयोजन राज्य स्तरीय कार्यक्रम के रूप में करता रहा है। गांव की अवधारणा रत्नावली के माध्यम से दुनिया के कोने-कोने में पहुंचे उस दिशा में भी प्रयास किए गए हैं।
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हरियाणा की कला एवं शिल्प को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इस बार हरियाणा शिल्प ग्राम पंडाल बनाया गया है, जिसमें युवा हरियाणा की कला एवं शिल्प से रूबरू हो सकेंगे। हरियाणा के प्राचीन गांव व उनकी अवधारणा को इस बार देखना है तो रत्नावली उसके लिए सबसे सुनहरा अवसर है। युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग ने इस बार हरियाणा शिल्प ग्राम को प्रमुखता से जन-जन पहुंचाने के लिए यह प्रयास शुरू किए हैं। गांव की अवधारणा को धरोहर में संजोने के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने रत्नावली के माध्यम से भी इसे हर वर्ष जीवंत करने का निर्णय लिया है।
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युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग पिछले 3 दशकों से हरियाणा की कला एवं संस्कृति को नई पहचान देने व उसे अगली पीढ़ी को देने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इस वर्ष का रत्नावली महोत्सव विशेष रहेगा इस कार्यक्रम के तहत इस वर्ष हरियाणवी आर्केस्ट्रा, सोलो डांस, हरियाणवी कोरियोग्राफी, सांग प्रतियोगिता, रागिनी प्रतियोगिता, ग्रुप सांग, मोनो एक्टिंग, ग्रुप डॉंस रसिया जैसी प्रतियोगिताएं विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
उन्होंने कहा कि गुरू नानक देवजी के 550वें प्रकाशोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में गतका की विशेष प्रस्तुति रत्नावली के मंच के माध्यम से की जाएगी। उन्होंने हरियाणा के सभी कला प्रेमियों से आह्वान किया है कि वे 2 से 5 नवंबर के बीच इस उत्सव में भाग लेकर हरियाणा की कला एवं संस्कृति का भरपूर आनंद उठाएं।
उन्होंने बताया कि 2 नवंबर को आडिटोरियम हॉल में हरियाणवी कोरियोग्राफी, हरियाणवी रीति-रिवाज, पाप सांग हरियाणवी, आरके सदन में हरियाणवी भजन, ड्यूट रागिनी, ओपन एयर थियेटर में सोलो डांस पुरूष, रागिनी, सीनेट हाल में डेक्लामेशन, हरियाणवी पगडी खुला मंच पर सांग प्रोफेशनल व क्रश हाल में बोहिया, फुलझड़ी, इंडी, पिड्डा,बंदरवाल प्रतियोगिता होगी।
3 नवंबर को आडिटोरियम हाल में फोक कास्ट्यूम, हरियाणवी आर्केस्ट्रा, सोलो डांस, आरके सदन में हरियाणवी लोकगीत, मोनो एक्टिंग, ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी स्किट तथा टीट-बिट, सीनेबट हाल में हरियाणवी क्विज, शार्ट फिल्म हरियाणवी, खुला मंच में सांग प्रतियोगिता तथा क्रश हॉल में ओल्ड एंटिक हरियाणवी की प्रदर्शनी आयोजित होगी।
4 नवंबर को आडिटोरियम हॉल में चौपाल, ग्रुप डॉंस रसिया तथा संगीत संध्या, आरके सदन में ग्रुप सांग हरियाणवी, हरियाणवी फाक डांस, इंस्ट्ररूमेंटल सोलो, ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी वन एक्ट प्ले, सीनेट हाल में कविता पाठ प्रतियोगिता, हरियाणवी क्विज, खुला मंच प्रतियोगिता में सांग प्रतियोगिता, क्रश हाल में ऑन द स्पाट पेंटिंग व एक्सीबिशन आफ पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
5 नवंबर को आडिटोरियम हाल में ग्रुप डांस हरियाणवी, ओपन एयर थियेटर में रागिनी प्रतियोगिता, खुला मंच में डे पफोर्मर प्रेजेंटेशन तथा क्रश हॉल में क्रश हाल में बोहिया, फुलझड़ी, इंडी, पिड्डा,बंदरवाल प्रतियोगिता होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हरियाणवी कोरियोग्राफी को हरियाणवी गजल की जगह एक नई विधा के रूप में शामिल किया गया है।
पहली बार दर्शकों को रत्नावली के मंच से हरियाणवी कोरियोग्राफी के रंग देखने को मिलेंगे व धमाल मंच भी विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा।इस अवसर पर युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के उप-निदेशक डॉ. हितेंद्र त्योगी, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. हरविंद्र राणा सहित अन्य मौजूद रहे।
उन्होंने बताया कि 2 नवंबर को आडिटोरियम हॉल में हरियाणवी कोरियोग्राफी, हरियाणवी रीति-रिवाज, पाप सांग हरियाणवी, आरके सदन में हरियाणवी भजन, ड्यूट रागिनी, ओपन एयर थियेटर में सोलो डांस पुरूष, रागिनी, सीनेट हाल में डेक्लामेशन, हरियाणवी पगडी खुला मंच पर सांग प्रोफेशनल व क्रश हाल में बोहिया, फुलझड़ी, इंडी, पिड्डा,बंदरवाल प्रतियोगिता होगी।
3 नवंबर को आडिटोरियम हाल में फोक कास्ट्यूम, हरियाणवी आर्केस्ट्रा, सोलो डांस, आरके सदन में हरियाणवी लोकगीत, मोनो एक्टिंग, ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी स्किट तथा टीट-बिट, सीनेबट हाल में हरियाणवी क्विज, शार्ट फिल्म हरियाणवी, खुला मंच में सांग प्रतियोगिता तथा क्रश हॉल में ओल्ड एंटिक हरियाणवी की प्रदर्शनी आयोजित होगी।
4 नवंबर को आडिटोरियम हॉल में चौपाल, ग्रुप डॉंस रसिया तथा संगीत संध्या, आरके सदन में ग्रुप सांग हरियाणवी, हरियाणवी फाक डांस, इंस्ट्ररूमेंटल सोलो, ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी वन एक्ट प्ले, सीनेट हाल में कविता पाठ प्रतियोगिता, हरियाणवी क्विज, खुला मंच प्रतियोगिता में सांग प्रतियोगिता, क्रश हाल में ऑन द स्पाट पेंटिंग व एक्सीबिशन आफ पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
5 नवंबर को आडिटोरियम हाल में ग्रुप डांस हरियाणवी, ओपन एयर थियेटर में रागिनी प्रतियोगिता, खुला मंच में डे पफोर्मर प्रेजेंटेशन तथा क्रश हॉल में क्रश हाल में बोहिया, फुलझड़ी, इंडी, पिड्डा,बंदरवाल प्रतियोगिता होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष हरियाणवी कोरियोग्राफी को हरियाणवी गजल की जगह एक नई विधा के रूप में शामिल किया गया है।
पहली बार दर्शकों को रत्नावली के मंच से हरियाणवी कोरियोग्राफी के रंग देखने को मिलेंगे व धमाल मंच भी विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा।इस अवसर पर युवा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के उप-निदेशक डॉ. हितेंद्र त्योगी, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. हरविंद्र राणा सहित अन्य मौजूद रहे।