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विश्वविद्यालय के स्थाई शिक्षकों ने लिया सामूहिक अवकाश, नहीं कराई पढ़ाई, गैर शिक्षक कर्मचारी ने काली पट्टी बांधकर जताया रोष ह
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स्थाई शिक्षक रहे अवकाश पर, गैर शिक्षक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जताया रोष
उधर, केयू के अनुबंधित शिक्षकों ने कुटा का नहीं किया समर्थन, बोले, सरकार के फैसला का करते हैं स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बचाने के समर्थन में जहां कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्थाई शिक्षक सामूहिक अवकाश पर रहे, वहीं विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने काले बिल्ले बांधकर सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। अवकाश पर रहे शिक्षकों ने शुक्रवार को न ऑनलाइन कक्षा ली और न ही ऑफलाइन। सुबह संस्थान और विभाग में ऑफलाइन कक्षा लगाने पहुंचे विद्यार्थियों को वापस लौटना पड़ा।
उधर, गैर शिक्षक कर्मचारी सुबह ही बाजूओं पर काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यालय पहुंचे। कर्मचारियों का कहना है कि फिलहाल शिक्षक एवं कर्मचारी सांकेतिक रूप से सरकार की इस नीति का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार ऐसे ही अनदेखी करती रही तो शिक्षक और कर्मचारी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
दरअसल, शुक्रवार को हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्थाई शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लिया।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विवेक गौड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय के स्वायत्तता को बचाने के लिए सभी शिक्षक लगातार रोष प्रकट कर रहे हैं। 17 नवंबर को कुलपति के माध्यम से मुख्यमंत्री, राज्यपाल व शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर सरकार के तानाशाही पूर्ण फैसले के संदर्भ में ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया।
इसी कड़ी में हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लेकर रोष प्रकट किया। कुटा सचिव डॉ. जितेंद्र खटकड़ ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा सरकार के इस फैसले का विरोध कर आंदोलन का रूप देकर और तेज किया जाएगा। इस मौके पर कुटा सहसचिव डॉ. संदीप गुप्ता, कुटा कोषाध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत, डॉ. सुनील ढींगरा, डॉ. भावना दहिया, डॉ. संतलाल, डॉ. दीप्ति व डॉ. कुलदीप सहित अन्य मौजूद रहे।
ये है कुटा और कुंटिया की मुख्य मांग
शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी विश्वविद्यालयों में एचपीएससी एवं एचएसएससी के माध्यम से भर्ती करने का विरोध कर रहे हैं। उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से 8 नवंबर को जारी पत्र में हरियाणा सरकार ने प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों में एचपीएससी एवं एचएसएससी के माध्यम से भर्ती करने का फैसला लिया था। अब शिक्षक एवं गैर शिक्षक कर्मचारी इस पत्र को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
अनुबंधित शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश का नहीं किया समर्थन
उधर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुबंधित शिक्षकों ने कुटा के सामूहिक अवकाश का समर्थन नहीं किया। अनुबंधित शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में नियमित कक्षाएं ली। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुबंधित शिक्षक डॉ. अभिनव ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुबंधित शिक्षकों ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं राजकीय कॉलेजों की संयुक्त रूप से भर्ती करने के फैसले का स्वागत किया है। अनुबंधित शिक्षकों को मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी। हरियाणा के अधिकतर विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिन्हें एक साथ भरने में सहायता मिलेगी। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के अनुबंधित शिक्षक लंबे समय से स्थाई नियुक्ति होने के इंतजार कर रहे हैं। सरकार शीघ्र नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। इस संदर्भ में अनुबंधित शिक्षक जल्द मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे।
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स्थाई शिक्षक रहे अवकाश पर, गैर शिक्षक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर जताया रोष
उधर, केयू के अनुबंधित शिक्षकों ने कुटा का नहीं किया समर्थन, बोले, सरकार के फैसला का करते हैं स्वागत
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बचाने के समर्थन में जहां कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्थाई शिक्षक सामूहिक अवकाश पर रहे, वहीं विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारियों ने काले बिल्ले बांधकर सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। अवकाश पर रहे शिक्षकों ने शुक्रवार को न ऑनलाइन कक्षा ली और न ही ऑफलाइन। सुबह संस्थान और विभाग में ऑफलाइन कक्षा लगाने पहुंचे विद्यार्थियों को वापस लौटना पड़ा।
उधर, गैर शिक्षक कर्मचारी सुबह ही बाजूओं पर काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यालय पहुंचे। कर्मचारियों का कहना है कि फिलहाल शिक्षक एवं कर्मचारी सांकेतिक रूप से सरकार की इस नीति का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार ऐसे ही अनदेखी करती रही तो शिक्षक और कर्मचारी बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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दरअसल, शुक्रवार को हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के स्थाई शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लिया।
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के प्रधान डॉ. विवेक गौड़ ने बताया कि विश्वविद्यालय के स्वायत्तता को बचाने के लिए सभी शिक्षक लगातार रोष प्रकट कर रहे हैं। 17 नवंबर को कुलपति के माध्यम से मुख्यमंत्री, राज्यपाल व शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर सरकार के तानाशाही पूर्ण फैसले के संदर्भ में ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया।
इसी कड़ी में हरियाणा फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश लेकर रोष प्रकट किया। कुटा सचिव डॉ. जितेंद्र खटकड़ ने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा सरकार के इस फैसले का विरोध कर आंदोलन का रूप देकर और तेज किया जाएगा। इस मौके पर कुटा सहसचिव डॉ. संदीप गुप्ता, कुटा कोषाध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत, डॉ. सुनील ढींगरा, डॉ. भावना दहिया, डॉ. संतलाल, डॉ. दीप्ति व डॉ. कुलदीप सहित अन्य मौजूद रहे।
ये है कुटा और कुंटिया की मुख्य मांग
शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारी विश्वविद्यालयों में एचपीएससी एवं एचएसएससी के माध्यम से भर्ती करने का विरोध कर रहे हैं। उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से 8 नवंबर को जारी पत्र में हरियाणा सरकार ने प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों में एचपीएससी एवं एचएसएससी के माध्यम से भर्ती करने का फैसला लिया था। अब शिक्षक एवं गैर शिक्षक कर्मचारी इस पत्र को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
अनुबंधित शिक्षकों ने सामूहिक अवकाश का नहीं किया समर्थन
उधर, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुबंधित शिक्षकों ने कुटा के सामूहिक अवकाश का समर्थन नहीं किया। अनुबंधित शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में नियमित कक्षाएं ली। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के अनुबंधित शिक्षक डॉ. अभिनव ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुबंधित शिक्षकों ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं राजकीय कॉलेजों की संयुक्त रूप से भर्ती करने के फैसले का स्वागत किया है। अनुबंधित शिक्षकों को मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता आएगी। हरियाणा के अधिकतर विश्वविद्यालयों में लंबे समय से शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिन्हें एक साथ भरने में सहायता मिलेगी। प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के अनुबंधित शिक्षक लंबे समय से स्थाई नियुक्ति होने के इंतजार कर रहे हैं। सरकार शीघ्र नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। इस संदर्भ में अनुबंधित शिक्षक जल्द मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे।