{"_id":"5e1a272c8ebc3e87e915e0ce","slug":"education-kurukshetra-news-knl183622200","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी यूनिवर्सिटी की नींव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी यूनिवर्सिटी की नींव
विज्ञापन
education
- फोटो : Kurukshetra
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के श्रीमद्भगवतगीता सदन के क्रश हॉल में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा आयोजित हवन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा, डीन एकेडमिक अफेयर प्रो. मंजुला चौधरी, कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना सहित शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में अधिष्ठाता, निदेशक, उप-निदेशक, शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारी शामिल हो भाव विभोर हुए। इस आयोजन में सेवानिवृत्त प्रोफेसर हरिसिंह, प्रो. एसके धवन, प्रो. एनके माटा, प्रो. हवा सिंह भी शामिल हुए।
इस अवसर पर कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि 11 जनवरी 1957 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की नींव रखी गई थी व एक संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुए उत्तरोत्तर उन्नति करते हुए आज एक अग्रणी विश्वविद्यालय के रूप में अपनी पहचान बनाई है। ऐसा सभी के सतत प्रयासों द्वारा ही संभव हो पाया है। अपने 63वें वर्ष में आने पर विश्वविद्यालय के ऊपर अनेक जिम्मेदारियां हैं तथा आशा है कि सभी के मिले-जुले प्रयासों से यह विश्वविद्यालय विश्वभर की टॉप रैंकिंग विश्वविद्यालयों में अपना स्थान बना पाएगा।
इस मौके पर डीन ऑफ कॉलेज प्रो. रजनीश शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा, प्रो. आरके देसवाल, प्रो. रमेश भारद्वाज, प्रो. तेजेंद्र शर्मा, डॉ. नीलम ढांडा, प्रो. बिंदु शर्मा, प्रो. नरेंद्र सिंह, प्रो. सीसी त्रिपाठी, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. मंजूषा शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. सीआर जिलोवा, डॉ. हितेंद्र त्यागी, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
यज्ञ में आहुति के बाद कुलपति ने बांटा प्रसाद
जयराम विद्यापीठ के संस्कृत छात्रों द्वारा यज्ञ के मंत्रों का उच्चारण किया गया। पूर्ण आहुति उपरांत कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने अपने हाथों से सभी को प्रसाद वितरित किया। कुलपति के हाथों से प्रशाद पाकर सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी अभिभूत हुए।
विज्ञापन
इस अवसर पर कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कहा कि 11 जनवरी 1957 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की नींव रखी गई थी व एक संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुए उत्तरोत्तर उन्नति करते हुए आज एक अग्रणी विश्वविद्यालय के रूप में अपनी पहचान बनाई है। ऐसा सभी के सतत प्रयासों द्वारा ही संभव हो पाया है। अपने 63वें वर्ष में आने पर विश्वविद्यालय के ऊपर अनेक जिम्मेदारियां हैं तथा आशा है कि सभी के मिले-जुले प्रयासों से यह विश्वविद्यालय विश्वभर की टॉप रैंकिंग विश्वविद्यालयों में अपना स्थान बना पाएगा।
विज्ञापन
इस मौके पर डीन ऑफ कॉलेज प्रो. रजनीश शर्मा, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन शर्मा, प्रो. आरके देसवाल, प्रो. रमेश भारद्वाज, प्रो. तेजेंद्र शर्मा, डॉ. नीलम ढांडा, प्रो. बिंदु शर्मा, प्रो. नरेंद्र सिंह, प्रो. सीसी त्रिपाठी, प्रो. संजीव अग्रवाल, प्रो. मंजूषा शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. सीआर जिलोवा, डॉ. हितेंद्र त्यागी, डॉ. अजय अग्रवाल, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. अंकेश्वर प्रकाश आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
यज्ञ में आहुति के बाद कुलपति ने बांटा प्रसाद
जयराम विद्यापीठ के संस्कृत छात्रों द्वारा यज्ञ के मंत्रों का उच्चारण किया गया। पूर्ण आहुति उपरांत कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने अपने हाथों से सभी को प्रसाद वितरित किया। कुलपति के हाथों से प्रशाद पाकर सभी शिक्षक, कर्मचारी एवं विद्यार्थी अभिभूत हुए।