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केयू में सेंटर फॉर एंटरप्रन्योर्शिप कार्यशाला में बोले कुलपति- जैविक खेती समय की जरूरत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 01:48 AM IST
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कुरुक्षेत्र। केयू में रूसा दो के अंतर्गत सेंटर फॉर एंटरप्रन्योर्शिप की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर केयू के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने कार्यशाला में जैविक खेती विषय पर बोलते हुए कहा कि जैविक खेती वर्तमान समय की जरूरत है क्योंकि जिस अनुपात में जनसंख्या बढ़ रही है, संसाधनों का अत्यधिक दोहन हो रहा है, हमारे पर्यावरण में परिवर्तन हो रहा है तथा रसायनों द्वारा पैदा किए गए कृषि उत्पादों का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए तथा सबके समुचित भरण-पोषण हेतु जैविक खेती ही एकमात्र उपाय है।
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उन्होंने कहा कि जैविक खेती विषय को केयू के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आज के युवा वर्ग को जैविक खेती के विज्ञान को समझने की आवश्यकता है। युवा नौकरी के साथ अपना रूझान सतत् उद्यमशीलता जैसे जैविक खेती व उससे जुडे़ व्यवसाय की ओर विकसित करें, क्योंकि खेती एक ऐसा विषय है जो कभी संदर्भ से बाहर नहीं हो सकता। उन्होंने प्रतिभागियों को समाज की आवश्यकतानुसार रोजगार अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
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उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता पद्म श्री डा. भारत भूषण त्यागी ने वर्तमान समय में जैविक खेती की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रकृति की व्यवस्था के साथ जीवन जीना स्वभाव को सरलता देता है। वर्तमान खेती इनपुट मैनेजमेंट के दृष्टिकोण से समझी जाती है जबकि खेती को प्रोडक्शन मैनेजमेंट के नजरिए से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेती के व्यापारी करण ने इसे बाजार केंद्रित बना दिया है, इस कारण ही प्रकृति आज विनाश के कगार पर पहुंच गई है।
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इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर तथा रूसा दो की नोडल अफसर प्रो. मंजुला चौधरी ने बताया कि शिक्षा को प्रगतिशील बनाने के लिए शिक्षा क्षमता संवर्धन, उद्यमशीलता निर्माण तथा समानता पर आधारित होनी चाहिए। इस विचार को ध्यान में रखते हुए ही रूसा के तहत इस उद्यमशीलता केंद्र को स्थापित किया गया है जो निरंतर विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा। उन्होंने प्रतिभागियों को जैविक खेती में उद्यमशीलता के अवसर खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. सुदेश ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के उद्देश्य को सांझा किया।
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