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रासायनिक खेती से धरती हुई जहरीली : राज्यपाल
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गुजरात के राज्यपाल डॉ. देवव्रत आचार्य ने कहा कि लगातार हो रही रासायनिक खेती से धरती मां जहरीली हो गई है। हमें प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर होना होगा। यूएनओ की रिपोर्ट के अनुसार यदि इसी प्रकार रसायन का इस्तेमाल खेती के लिए होता रहा तो 2060 के बाद सारी धरती बंजर हो जाएगी। फिर यूरिया डालने के बाद भी कोई फसल नहीं उगने वाली।
राज्यपाल रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रदेश स्तरीय कृषि कार्यशाला में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने तमाम अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि किसानों को जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के अंतर को समझना होगा। जैविक खेती से किसानों को फायदा होने वाला नहीं है। इसलिए सभी को प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। सरकार ने देसी गाय पालकों को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया है। देसी गायों के गोबर से प्राकृतिक खेती की जाएगी इसमें अन्य खाद का प्रयोग नहीं किया जाता। देसी गायों के गोबर से जीवाणु पैदा होंगे और इन जीवाणुओं से प्राकृतिक खेती को बल मिलेगा। इससे लागत कम होगी और उत्पादन उतना ही रहेगा, पानी की भी बचत होगी। देसी गाय का संवर्धन होगा, मनुष्य के स्वास्थ्य को भी ठीक रखा जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार की तरफ से गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। इस प्रशिक्षण केंद्र में 12 महीने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश की जनता को जहर युक्त उत्पादों से निजात दिलाने, भूमि की सेहत को बचाने, भूजल का संरक्षण करने तथा लोगों के स्वास्थ्य को तंदुरुस्त रखने के लिए प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर बल दे रही है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रदेश भर से आए किसानों को प्राकृतिक खेती को उदाहरण सहित समझा कर प्रेरित करने का काम किया है।
प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए होगी मंडी की व्यवस्था
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में विकसित हो चुका है तथा सरकार ने कुरुक्षेत्र में एक ऑर्गेनिक सेंटर भी स्थापित किया है, जो प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण देगा। उन्होंने कहा कि सरकार जल्दी ही प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए एक बडी मंडी की भी व्यवस्था करेगी। जहां किसान उच्च गुणवत्ता के प्राकृतिक उत्पाद बेच पाएंगें।
राज्यपाल का संबोधन खत्म होते ही खाली होने लगा सभागार
कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि गुजरात के राज्यपाल ने पूरे एक घंटा 15 मिनट किसानों को संबोधित किया। उनके बाद मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री मनोहर लाल को संबोधित करना था, लेकिन चार बजकर 15 मिनट पर जैसे ही उनका संबोधन खत्म हुए सभागार में बैठे किसान भी उठकर चल दिए। किसानों को रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक डॉ. अंशु सिंगला खुद गेट पर जाकर खड़ी हो गई और किसानों को सीट पर बैठने का आग्रह किया। हालांकि तब तक कई किसान सभागार से बाहर जा चुके थे।
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राज्यपाल रविवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रदेश स्तरीय कृषि कार्यशाला में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्राकृतिक खेती से जुड़े अपने तमाम अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि किसानों को जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के अंतर को समझना होगा। जैविक खेती से किसानों को फायदा होने वाला नहीं है। इसलिए सभी को प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। सरकार ने देसी गाय पालकों को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया है। देसी गायों के गोबर से प्राकृतिक खेती की जाएगी इसमें अन्य खाद का प्रयोग नहीं किया जाता। देसी गायों के गोबर से जीवाणु पैदा होंगे और इन जीवाणुओं से प्राकृतिक खेती को बल मिलेगा। इससे लागत कम होगी और उत्पादन उतना ही रहेगा, पानी की भी बचत होगी। देसी गाय का संवर्धन होगा, मनुष्य के स्वास्थ्य को भी ठीक रखा जा सकेगा।
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उन्होंने कहा कि भारत सरकार की तरफ से गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है। इस प्रशिक्षण केंद्र में 12 महीने किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश की जनता को जहर युक्त उत्पादों से निजात दिलाने, भूमि की सेहत को बचाने, भूजल का संरक्षण करने तथा लोगों के स्वास्थ्य को तंदुरुस्त रखने के लिए प्रदेश सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर बल दे रही है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रदेश भर से आए किसानों को प्राकृतिक खेती को उदाहरण सहित समझा कर प्रेरित करने का काम किया है।
प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए होगी मंडी की व्यवस्था
हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए एक उत्कृष्ट मॉडल के रूप में विकसित हो चुका है तथा सरकार ने कुरुक्षेत्र में एक ऑर्गेनिक सेंटर भी स्थापित किया है, जो प्राकृतिक खेती के बारे में प्रशिक्षण देगा। उन्होंने कहा कि सरकार जल्दी ही प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए एक बडी मंडी की भी व्यवस्था करेगी। जहां किसान उच्च गुणवत्ता के प्राकृतिक उत्पाद बेच पाएंगें।
राज्यपाल का संबोधन खत्म होते ही खाली होने लगा सभागार
कार्यशाला के विशिष्ट अतिथि गुजरात के राज्यपाल ने पूरे एक घंटा 15 मिनट किसानों को संबोधित किया। उनके बाद मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री मनोहर लाल को संबोधित करना था, लेकिन चार बजकर 15 मिनट पर जैसे ही उनका संबोधन खत्म हुए सभागार में बैठे किसान भी उठकर चल दिए। किसानों को रोकने के लिए पुलिस अधीक्षक डॉ. अंशु सिंगला खुद गेट पर जाकर खड़ी हो गई और किसानों को सीट पर बैठने का आग्रह किया। हालांकि तब तक कई किसान सभागार से बाहर जा चुके थे।