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कर्तव्य पर भारी पड़ी मां की ममता
ब्यूरो,अमर उजाला/कुरुक्षेत्र
Updated Fri, 18 Mar 2016 12:54 AM IST
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बच्च्ाा
- फोटो : अमर उजाला
भाई साहब, बैठक कितनी देर तक चालेगी, एक बै इस बच्चे की मां को बाहर भेज दो नै, इसे संभाल लेगी। बच्चा बहुतै तंग कर रहया सै, या तै बड़ा मुश्किल काम है। यह कोई हरियाणवी डायलॉग नहीं बल्कि मासूम बच्चों के पिता द्वारा लगाई गई गुहार है। मौका था, थानेसर खंड के नवनिर्वाचित सरपंचों की पहली बैठक का, जहां सरपंच बनी महिलाएं बैठक में शामिल थी तो बाहर बच्चों को संभाले उनके पति उनके आने की बाट जोह रहे थे। कहीं महिला आरक्षित तो कहीं पढ़े-लिखे होने की शर्त के चलते इस बार सरपंचों में महिलाओं की संख्या अधिक रही है। उन्हें मिली चौधर के बाद अब विभाग उन्हें सक्रिय करने में जुट गया है। प्रशासन ने पहली बैठक में उन्हें बेटी बचाने-बेटी पढ़ाने का संदेश दिया गया। इसी उद्देश्य के लिए बुलाई गई बैठक में जहां खंड के सभी सरपंचों को शामिल होने के निर्देश दिए गए थे तो वहीं एक पंच भी साथ लाने को कहा गया था। अधिकतर महिला सरपंच अपने परिजनों को लेकर पहुंची। अधिकारियों ने बैठक में केवल सरंपच ही मौजूद रहने के निर्देश दिए तो उनके साथ आए परिजनों को मीटिंग हाल के बाहर कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसी दौरान मासूम व नन्हे बच्चों को लेकर आई महिला सरपंचों ने अपने पति के हवाले बच्चे करने पड़े, जिसके वह बच्चों को थामे रहे तो साथ ही उनकी मां के बाहर आने का इंतजार करते रहे। बच्चे भी अपनी मां के आने की बाट जोहते हुए टकटकी लगाए रहे। कई महिलाएं बैठक के बीच ही बच्चों को बहलाती रही।
सिरसा ट्रेनिंग में नहीं जाएंगे, सरपंची छोड़ देंगे
6 माह के बच्चे गुरांश को थामे हुए चीबा की सरपंच परमजीत कौर के पति कर्मबीर का कहना था कि उन्हें यहीं आकर पता चला कि सरपंचों की सिरसा में 5 दिन के लिए ट्रेनिंग होनी है। आज का दिन ही मुश्किल से काटा है, तो पंाच दिन कैसे कट पाएंगे। वह परमजीत कौर को सिरसा न अकेले भेजेंगे और न ही उनके पास इतना समय है कि पांच दिन बच्चे को लेकर बाहर बैठे रहे। ऐसे परेशान होने से अच्छा तो वह सरपंची ही छोड़ देंगी।
एक वर्षीय बच्चे को गोद में लिए खानपुर रोड़ान की पंच अंजू के पति विजयपाल का कहना था कि बच्चे को इस प्रकार रखना बेहद ही मुश्किल है। हर समय इसकी मां के साथ हम दोनों को भी धक्के खाने पड़ेंगे। उन्हें चुनाव से पहले यह अहसास नहीं था।
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3 वर्षीय बच्चे रिंजल के पिता खानपुर निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी रीटा देवी सरपंच है और आज पहले दिन ही वह कई घंटे से बाहर इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से एक पैसा भी नहीं मिला आज तक, लेकिन परेशानी शुरू हो गई है।
बच्चे रोने लगे तो बैठक से चली सरपंच
जब बाहर बच्चे रोने लगे तो कई महिला सरपंचों के पति उन्हें दरवाजे के अंदर झांककर घूरने लगे, जिसके बाद बच्चों की रोने की आवाज सुनकर अधिकतर महिला सरपंच बैठक छोड़ कर चलती बनीं। कई महिला सरपंच तो एक घंटा भी बैठक में मुश्किल से बैठ पाई।
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सिरसा ट्रेनिंग में नहीं जाएंगे, सरपंची छोड़ देंगे
6 माह के बच्चे गुरांश को थामे हुए चीबा की सरपंच परमजीत कौर के पति कर्मबीर का कहना था कि उन्हें यहीं आकर पता चला कि सरपंचों की सिरसा में 5 दिन के लिए ट्रेनिंग होनी है। आज का दिन ही मुश्किल से काटा है, तो पंाच दिन कैसे कट पाएंगे। वह परमजीत कौर को सिरसा न अकेले भेजेंगे और न ही उनके पास इतना समय है कि पांच दिन बच्चे को लेकर बाहर बैठे रहे। ऐसे परेशान होने से अच्छा तो वह सरपंची ही छोड़ देंगी।
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एक वर्षीय बच्चे को गोद में लिए खानपुर रोड़ान की पंच अंजू के पति विजयपाल का कहना था कि बच्चे को इस प्रकार रखना बेहद ही मुश्किल है। हर समय इसकी मां के साथ हम दोनों को भी धक्के खाने पड़ेंगे। उन्हें चुनाव से पहले यह अहसास नहीं था।
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3 वर्षीय बच्चे रिंजल के पिता खानपुर निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी रीटा देवी सरपंच है और आज पहले दिन ही वह कई घंटे से बाहर इंतजार कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से एक पैसा भी नहीं मिला आज तक, लेकिन परेशानी शुरू हो गई है।
बच्चे रोने लगे तो बैठक से चली सरपंच
जब बाहर बच्चे रोने लगे तो कई महिला सरपंचों के पति उन्हें दरवाजे के अंदर झांककर घूरने लगे, जिसके बाद बच्चों की रोने की आवाज सुनकर अधिकतर महिला सरपंच बैठक छोड़ कर चलती बनीं। कई महिला सरपंच तो एक घंटा भी बैठक में मुश्किल से बैठ पाई।