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Kurukshetra News: सरस्वती नदी के पांच किमी दायरे में होगा ड्रोन सर्वे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jan 2024 03:56 AM IST
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Drone survey will be done within five km radius of Saraswati river.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। अब पवित्र सरस्वती नदी का सर्वे ड्रोन के जरिए किया जाएगा। इसके तहत 120 मीटर ऊंचाई तक उड़ाया जाने वाला ड्रोन सरस्वती नदी के एक से लेकर पांच किलोमीटर तक के दायरे में उड़ान भरेगा। इस क्षेत्र में जितने भी पुरातात्विक मंदिर, गुरुद्वारे, पर्यटक स्थल व अन्य गतिविधियां सरस्वती के किनारे पर हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। इस सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसको लेकर हरियाणा सरस्वती हैरिटेज बोर्ड अगला कदम उठाएगा।

बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच के मुताबिक, अभी तक सरस्वती पर जितने भी कार्य चल रहे हैं, उन पर एक ड्रोन सर्वे भी तैयार किया जाएगा, ताकि समय-समय पर सरस्वती में क्या-क्या बदलाव हुआ है, कितना क्षेत्र बदलेगा और कितना बदला है, यह सारी जानकारी जुटाई जा सके। साथ ही जंगल में पौधरोपण तथा बाढ़ से किस तरह से सरस्वती क्षेत्र को बचाएं, यह जानकारियां इस ड्रोन सर्वे के माध्यम से जुटाई जाएगी ताकि आने वाले समय में सरस्वती चैनल इस क्षेत्र के लिए एक रामबाण साबित हो सके। इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं। जल्द ही यह ड्रोन सर्वे शुरू किया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि यह सर्वे पहले फेज में आदिबद्री से लेकर कैथल तक 200 किलोमीटर के सरस्वती के दायरे में होगा। दूसरे फेज में यह कैथल जिले के अंतिम छोर और पंजाब के सागरा गांव जहां घग्गर नदी सरस्वती मिलती है से लेकर सिरसा ऑटू हेड तक जहां तक सरस्वती अन्य नदियों के साथ जाकर राजस्थान के बॉर्डर पर मिलती है। फिर तीसरे फेज में इस सर्वे को राजस्थान के हनुमानगढ़, गंगानगर, अनूपगढ़ से होते हुए लूनी नदी जयपुर के पास से होते हुए भी करवाया जाएगा, ताकि सरस्वती के ट्रैक को इसरो के मुताबिक, पूरी तरह से गुजरात के रण ऑफ कच्छ तक ट्रेस करके बताया जा सके। उन्होंने कहा कि जितने भी पुरातात्विक स्थल देश में हैं, उसमें 70 प्रतिशत सरस्वती के किनारे हैं। इसलिए सर्वे का महत्व बढ़ जाता है। देश की एजेंसी जिसमें इसरो, जीएसई, सीजीडब्ल्यू, सेंटर वाटर कमीशन, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया व अन्य एजेंसियों को भी इस सर्वे का फायदा होगा।
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