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नाटक से सामाजिक भेदभाव पर किया कटाक्ष
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कलाकृर्ति भवन में नाटक राज सजीवन की प्रेम कथा का मंचन करते कलाकार। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की पहल पर विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में नाट्य मेला शुरू हो गया है। मेले का उद्घाटन प्रसिद्ध लेखक डॉ. संजीव चौधरी की धर्मपत्नी भावना चौधरी ने किया। 14 मई तक चलने वाले इस नाट्य मेले के पहले दिन राज सजीवन की प्रेम कथा नाटक का मंचन किया गया। कलाकारों ने इस नाटक के जरिए सामाजिक भेदभाव पर कटाक्ष किया।
भिवानी की मीरा कल्चरल सोसायटी के सोनू रोंझिया द्वारा निर्देशित और उदय शंकर द्वारा लिखित इस नाटक में दिखाया कि गांव का एक लड़का राम सजीवन शहर में पढ़ाई करने आता है। यहां वह देखता है कि शहर के लोग अपनी चीजों के लिए कितना खर्चा करते हैं। उसका विचार है कि यह पैसा गरीबों की भूख मिटाने में काम आ सकता है। वह कविताएं लिखने लगता है और यहां उसकी मुलाकात होती है कैंब्रिज से पढ़कर लौटी लड़की अनीता चांदीवाला से। वह सोचता है कि अनीता उसको प्यार करती है लेकिन ऐसा होता नहीं है। एक दिन वह अनीता को प्रेम पत्र देता है।
अनीता इसकी शिकायत कॉलेज में कर देती है और कॉलेज राम सजीवन को बाहर का रास्ता दिखा देता है। एक साल बाद वह कॉलेज में फिर से लौटता है तो जन आंदोलन से जुड़ जाता है। नाटक के अंत में दिखाया गया है कि राम सजीवन टूट जाता है। नाटक के अंत में सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने मुख्य अतिथि भावना चौधरी तथा नाटक निर्देशक सोनू रोंझिया को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की पहल पर विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में नाट्य मेला शुरू हो गया है। मेले का उद्घाटन प्रसिद्ध लेखक डॉ. संजीव चौधरी की धर्मपत्नी भावना चौधरी ने किया। 14 मई तक चलने वाले इस नाट्य मेले के पहले दिन राज सजीवन की प्रेम कथा नाटक का मंचन किया गया। कलाकारों ने इस नाटक के जरिए सामाजिक भेदभाव पर कटाक्ष किया।
भिवानी की मीरा कल्चरल सोसायटी के सोनू रोंझिया द्वारा निर्देशित और उदय शंकर द्वारा लिखित इस नाटक में दिखाया कि गांव का एक लड़का राम सजीवन शहर में पढ़ाई करने आता है। यहां वह देखता है कि शहर के लोग अपनी चीजों के लिए कितना खर्चा करते हैं। उसका विचार है कि यह पैसा गरीबों की भूख मिटाने में काम आ सकता है। वह कविताएं लिखने लगता है और यहां उसकी मुलाकात होती है कैंब्रिज से पढ़कर लौटी लड़की अनीता चांदीवाला से। वह सोचता है कि अनीता उसको प्यार करती है लेकिन ऐसा होता नहीं है। एक दिन वह अनीता को प्रेम पत्र देता है।
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अनीता इसकी शिकायत कॉलेज में कर देती है और कॉलेज राम सजीवन को बाहर का रास्ता दिखा देता है। एक साल बाद वह कॉलेज में फिर से लौटता है तो जन आंदोलन से जुड़ जाता है। नाटक के अंत में दिखाया गया है कि राम सजीवन टूट जाता है। नाटक के अंत में सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन ने मुख्य अतिथि भावना चौधरी तथा नाटक निर्देशक सोनू रोंझिया को स्मृति चिन्ह भेंट किया।
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