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Kurukshetra News: डॉ. महासिंह को हरियाणा गौरव अवॉर्ड से नवाजा
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक डॉ. महासिंह पूनिया को हरियाणा गौरव अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया । हरियाणवी संस्कृति में योगदान देने के लिए निफ्फा द्वारा करनाल में आयोजित कार्यक्रम में यह सम्मान दिया गया।
उल्लेखनीय हैं कि डॉ. महासिंह पूनिया ने हरियाणा धरोहर संग्रहालय के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान दी है तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने हरियाणा की अनेक विधाओं को मंच से जोड़कर उसके सरंक्षण का कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा के लूर नृत्य की डॉक्यूमेंटेशन कर उसे युवा उत्सवों एवं रत्नावली पर मंच देने का कार्य किया है। यह हरियाणा का वो नृत्य है जो 50 साल पहले लुप्त हो चुका था।
इसी के साथ ही हरियाणा के लोक परिधानों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हरियाणवी फैशन शो के माध्यम से उन्होंने रत्नावली में नई विधा को जोड़कर युवाओं को अपनी लोक पारंपरिक परिधानों के प्रति जागरूक करने का काम किया है। हरियाणवी बैंड भी अगले वर्ष से मंच पर देखने को मिलेगा। इससे पहले उन्होंने युवा उत्सवों एवं रत्नावली में हरियाणवी रिचुअल को शामिल किया है। इसके साथ ही हरियाणवी पगड़ी को प्रतियोगिता विधा के रूप में रत्नावली में उन्होंने ही शामिल कर युवाओं को हरियाणवी पगड़ी से जोड़ने का काम किया है।
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महासिंह पूनिया ने अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेला और अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में भी हरियाणवी पवेलियन की परिकल्पना को युवा पीढ़ी से जोड़कर हरियाणवी संस्कृति को बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस मौके पर डीजीपी केके मिश्रा, पूर्व एडीजीपी राजबीर देशवाल , अनूप लाठर, जगबीर राठी, प्रितपाल पन्नू सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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उल्लेखनीय हैं कि डॉ. महासिंह पूनिया ने हरियाणा धरोहर संग्रहालय के माध्यम से हरियाणवी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय फलक पर अलग पहचान दी है तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने हरियाणा की अनेक विधाओं को मंच से जोड़कर उसके सरंक्षण का कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा के लूर नृत्य की डॉक्यूमेंटेशन कर उसे युवा उत्सवों एवं रत्नावली पर मंच देने का कार्य किया है। यह हरियाणा का वो नृत्य है जो 50 साल पहले लुप्त हो चुका था।
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इसी के साथ ही हरियाणा के लोक परिधानों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और हरियाणवी फैशन शो के माध्यम से उन्होंने रत्नावली में नई विधा को जोड़कर युवाओं को अपनी लोक पारंपरिक परिधानों के प्रति जागरूक करने का काम किया है। हरियाणवी बैंड भी अगले वर्ष से मंच पर देखने को मिलेगा। इससे पहले उन्होंने युवा उत्सवों एवं रत्नावली में हरियाणवी रिचुअल को शामिल किया है। इसके साथ ही हरियाणवी पगड़ी को प्रतियोगिता विधा के रूप में रत्नावली में उन्होंने ही शामिल कर युवाओं को हरियाणवी पगड़ी से जोड़ने का काम किया है।
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महासिंह पूनिया ने अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेला और अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में भी हरियाणवी पवेलियन की परिकल्पना को युवा पीढ़ी से जोड़कर हरियाणवी संस्कृति को बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस मौके पर डीजीपी केके मिश्रा, पूर्व एडीजीपी राजबीर देशवाल , अनूप लाठर, जगबीर राठी, प्रितपाल पन्नू सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।