{"_id":"6754b57745be3c457f0b158a","slug":"dr-jimmy-sharma-received-the-award-for-best-research-paper-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-128044-2024-12-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: डॉ. जिम्मी शर्मा को मिला श्रेष्ठ शोध पत्र का अवार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: डॉ. जिम्मी शर्मा को मिला श्रेष्ठ शोध पत्र का अवार्ड
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में करीब 700 शोध पत्रों को 12 तकनीकी सत्रों में प्रस्तुत किया गया। संगोष्ठी के सभी सत्रों के विशेषज्ञों की कमेटियों द्वारा हर सत्र में एक श्रेष्ठ शोध पत्र का चयन किया गया।
इसी के तहत इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड और ऑनर स्टडीज ने काम माइंड एंड प्लेजेंट एनवायरनमेंट इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ श्रीमद्भगवद्गीता विषय पर नौवें टेक्निकल सेशन का आयोजन किया। इसमें प्रदेशभर के 63 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें कुवि की इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज के अंग्रेजी विभाग की एसोसिएट प्रो. डॉ. जिम्मी शर्मा के शोध पत्र को श्रेष्ठ शोध पत्र घोषित किया गया।
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, 48 कोस तीर्थ माॅनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, कुलसचिव प्रो. संजीव कुमार व सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा द्वारा समापन समारोह में डॉ. जिम्मी शर्मा को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
डॉ. जिम्मी शर्मा ने सस्टेनेबल एनवायरमेंट एंड इनर ट्रेंकुलिटी इन द कॉन्टेस्ट ऑफ श्रीमद्भगवद्गीता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसके माध्यम से पर्यावरण के दोहन न करने तथा आत्मशांति का संदेश दिया और सभी समस्याओं के निवारण के लिए श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में श्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार मिल चुका है। वे पिछले 16 वर्षों से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अध्यापन से जुड़कर कार्य कर रही हैं। अब तक उनकी पांच पुस्तकें व 20 के करीब शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
विज्ञापन
इसी के तहत इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड और ऑनर स्टडीज ने काम माइंड एंड प्लेजेंट एनवायरनमेंट इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ श्रीमद्भगवद्गीता विषय पर नौवें टेक्निकल सेशन का आयोजन किया। इसमें प्रदेशभर के 63 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें कुवि की इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड एंड ऑनर्स स्टडीज के अंग्रेजी विभाग की एसोसिएट प्रो. डॉ. जिम्मी शर्मा के शोध पत्र को श्रेष्ठ शोध पत्र घोषित किया गया।
विज्ञापन
कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा, 48 कोस तीर्थ माॅनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, कुलसचिव प्रो. संजीव कुमार व सम्मेलन निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा द्वारा समापन समारोह में डॉ. जिम्मी शर्मा को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
डॉ. जिम्मी शर्मा ने सस्टेनेबल एनवायरमेंट एंड इनर ट्रेंकुलिटी इन द कॉन्टेस्ट ऑफ श्रीमद्भगवद्गीता पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया जिसके माध्यम से पर्यावरण के दोहन न करने तथा आत्मशांति का संदेश दिया और सभी समस्याओं के निवारण के लिए श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय गीता संगोष्ठी में श्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार मिल चुका है। वे पिछले 16 वर्षों से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अध्यापन से जुड़कर कार्य कर रही हैं। अब तक उनकी पांच पुस्तकें व 20 के करीब शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।