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Kurukshetra News: टीपीटी कार्यक्रम में नौवें स्थान पर पहुंचा जिला कुरुक्षेत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Oct 2024 05:17 AM IST
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District Kurukshetra reached ninth place in TPT program
कुरुक्षेत्र। पल्मोनरी (फेफड़ों की टीबी) टीबी रोगी के संपर्क में सबसे पहले आए लोगों को टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) देने में प्रदेश में कुरुक्षेत्र नौवें स्थान पर है। जीटी बेल्ट में सिर्फ अंबाला ही हमसे आगे है। जिला क्षय रोग विभाग पल्मोनरी टीबी रोगी के संपर्क में आने वाले 47 फीसदी लोगों और पांच साल तक के 93 फीसदी बच्चों का टीपीटी के तहत उपचार चल रहा है। इस जिले में विभाग के मुताबिक 1302 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। विभाग ने इन रोगियों के संपर्क में सबसे पहले आने वाले 3580 लोगों की पहचान की। इन रोगियों को 12 सप्ताह तक थ्री-एचपी की दवा दी जा रही है। इस दवा को सप्ताह में एक बार ही खाने की जरूरत है। इस दवा को आशा कर्मियों के जरिए उन तक पहुंचाया जा रहा है।
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दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत सरकार ने साल 2024 की शुरुआत में टीपीटी कार्यक्रम आरंभ किया। इस कार्यक्रम के तहत पल्मोनरी टीबी रोगी के सबसे पहले संपर्क में आने लोगों को टीपीटी के तहत उपचार देना शुरू कर दिया। हालांकि इस साल से पहले इगरा (आईजीआरए) जांच के बाद संपर्क में आए लोगों को उपचार दिया जाता था, मगर जांच में काफी ज्यादा खर्च के बाद सरकार ने संपर्क में सभी लोगों को उपचार देना की योजना बना दी।
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पांच साल तक के बच्चों को टीपीटी अनिवार्य
सरकार की ओर से टीबी रोगी के संपर्क में आने वाले पांच साल तक के प्रत्येक बच्चे को टीपीटी के तहत उपचार दिया जाना अनिवार्य है। विभाग ने कुल 253 बच्चों को रोगी के संपर्क में आना दर्ज किया था, जिसमें विभाग 236 बच्चों को दवा उपलब्ध करा रहा है।
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12 सप्ताह तक दी जा रही प्रतिरोधी दवाएं : डॉ. अग्रवाल
जिला क्षय रोग नोडल अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि पल्मोनरी टीबी रोगी कम से कम 15 लोगों में टीबी की बीमारी फैला सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रोगी के संपर्क में सबसे पहले आने वाले व्यक्ति को टीपीटी के तहत 12 सप्ताह तक प्रतिरोधी दवाएं दी जा रही है। हालांकि पांच साल तक बच्चे को दवा देना अनिवार्य है।
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