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भूस्खलन के कारणों पर की चर्चा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 03 Aug 2022 01:57 AM IST
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Discussion on the causes of landslides, Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के मानव संसाधन विकास केन्द्र व जियोलॉजी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे रिफ्रेशर कोर्स के पांचवे दिन मंगलवार को पहले सत्र के रिसोर्स पर्सन डॉ. अजय कुमार आर्य, भूविज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने हिमालय भूस्खलन के कारणों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भूस्खलन पहाड़ी क्षेत्र में विनाशकारी खतरों में से एक है जो हर साल जीवन और संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने विभिन्न प्राकृतिक कारणों और मानव निर्मित कारणों के बारे में बताया जो भूस्खलन को गति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि भूस्खलन होने के कारणों में जलवायु सबसे महत्वपूर्ण कारक है। जिन क्षेत्रों की जलवायु अधिक वर्षा वाली होती है उन क्षेत्रों में अधिक वर्षा होने से भूमिगत संतृप्ति हो जाती है जिससे भूमि में अतिरिक्त जल की मात्रा पाई जाने के कारण वह कमजोर पड़ जाती है। अत: अत्यधिक व भारी वर्षा भी भू-स्खलन का कारण होती है। उन्होंने बताया कि भू-स्खलन का कारण मानव की क्रियाओं जैसे खनन, उत्खनन एवं तकनीकों का उपयोग आदि के द्वारा होता हे मानवीय हस्तक्षेप में वनों की कटाई, समाशोधन, सड़कों का निर्माण, भूमि परिवर्तन, जलाशयों पा बांधों का निर्माण आदि भूस्खलन के कारण है।
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दूसरे सत्र के रिसोर्स पर्सन प्रो. एसके पंडिता, भूविज्ञान विभाग, जम्मू विश्वविद्यालय ने आपदा जोखिम में कमी लाने के लिए आपदा जोखिमों की पहचान, आकलन और जोखिमों के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। तीसरे सत्र के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह, एनडीएमए, नई दिल्ली ने कहा कि सैटेलाइट एवं रिमोट सेंसिंग तकनीक आपदा प्रबंधन के सभी चरणों जैसे पूर्व-तैयारी, पूर्वचेतावनी, अनुक्रिया, राहत, पुनर्वास, पुन: प्राप्ति और न्यूनीकरण तथा प्राकृतिक जोखिम संबंधी आकलनों के अध्ययन से आपदा जोखिमों को कम किया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि इसके साथ ही भौगोलिक सूचना प्रणाली, वैज्ञानिक प्रबंधन सूचना, वायरलेस कम्युनिकेशन द्वारा वास्तविक समय में सूचनाओं के तीव्र हस्तांतरण से आपदा जोखिम का पता लगाया जा सकता है। कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. नरेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. ओम प्रकाश ने सभी संसाधन व्यक्तियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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