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Kurukshetra News: सात वर्षों से स्वच्छता में पिछड़ रही धर्मनगरी, अब फिर परीक्षा के लिए फूली सांसें
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कुरुक्षेत्रभूमिगत डस्टबिन व्यवस्था के तहत स्थापित की गई यूरोपियन तकनीक से निर्मित मशीन खुद बनी
कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी भले ही अपनी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ पर्यटन की ओर बड़े कदम बढ़ा रही है लेकिन यह पूरी तरह से स्वच्छ कब होगी, यह बड़ा प्रश्न बना हुआ है। बड़े-बड़े दावों व भरसक प्रयास के बावजूद पिछले सात वर्षों से पिछड़ती जा रही है तो अब फिर अगले माह स्वच्छता परीक्षा होनी है, जिसमें पार पाने के लिए नगर प्रशासन के अधिकारियों की सांसें फूली हुई है। कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक फील्ड में उतर चुके हैं लेकिन धर्मनगरी को स्वच्छ होने का तमगा मिल पाएगा या नहीं यह समय आने पर पता चल सकेगा।
वर्तमान में नगर परिषद से लेकर आमजन के समक्ष शहर से हर रोज निकल रहा करीब 90 टन कचरा बड़ी समस्या बना हुआ है। घर-घर से कचरा उठान के लिए टिप्पर लगाए जाने के साथ-साथ इसके लिए पिछले वर्ष निजी एजेंसी को ठेका दिए जाने के बावजूद भी उम्मीद अनुसार स्वच्छता की ओर नहीं बढ़ पाए हैं। यहां तक कि आज भी धर्मनगरी के पास कचरा निस्तारण प्लांट नहीं है और सारा कचरा करनाल स्थित प्लांट पर ले जाया जा रहा है। यही नहीं शहर के कचरे के लिए स्थायी डंपिंग साइट तक नहीं बन पाई है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह साइट अनेक जगह बदलनी पड़ी तो वर्तमान में ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी ओर बौद्ध स्तूप के साथ बनाई साइट पर भी सवाल उठने लगे हैं।
कहीं नालियां कचरे से अटीं तो कहीं लगे ढेर
शहर की नालियों में कचरा भरा हुआ है तो वहीं अनेक जगह कचरे के ढेर भी लगे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से शहर में आमजन के लिए भी 25 प्वाइंट बनाए हैं तो वहीं दावा है कि यहां से सुबह व शाम दोनों समय कचरे का उठान किया जाता है।
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पोर्टल पर ही आ रही हर रोज आधा दर्जन शिकायतें
आमजन के सहयोग को लेकर स्वच्छ सिटी पोर्टल भी बनाया गया है, जहां पर हर रोज आधा दर्जन से अधिक शिकायतें कचरे व पानी निकासी न होने से संबंधित पहुंच रही है। पिछले दो माह में ही पोर्टल पर 200 शिकायतें मिल चुकी हैं तो वहीं स्वच्छ भारत मिशन की ओर से कार्यभार संभाल रही सीमा रानी के मुताबिक ये सभी शिकायतें निपटाईं भी जा चुकी हैं। हर रोज आने वाली शिकायतों का उसी दिन निदान करवा दिया जाता है।
9500 अंकों की होगी परीक्षा
शहर कितना स्वच्छ हुआ, यह जांचने के लिए 9500 अंकों की परीक्षा होगी, जिसके लिए केंद्रीय टीम अगले माह पहुंचने की उम्मीद है। इस परीक्षा में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के 60 फीसदी अंक, सर्टिफिकेशन के 26 फीसदी तो जन आंदोलन के 14 फीसदी अंक होंगे। टीम कचरा उठान में लगी गाड़ी के स्पीकर तक की जांच करती है तो आमजन से फीडबैक भी लेती है। 9500 में से 600 अंक आमजन की फीडबैक से ही मिलने हैं। इसके लिए नप ने बकायदा सभी शौचालयों पर क्यूआर कोड तक लगाया है।
खुले में कचरा फेंकने पर किए जाने लगे चालान
नप ने अब खुले में कचरा फेंकने वाले लोगों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। दो दिन में ही 11 लोगों के चालान किए जा चुके हैं। इनमें दुकानदार ही अधिक है। नप ईओ अभय यादव का कहना है कि इस तरह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। लोगों को जागरूक होना चाहिए।
दम तोड़ गई प्रदेश की पहली भूमिगत डस्टबिन व्यवस्था
मार्च 2017 में कुरुक्षेत्र के पिपली-थर्ड गेट रोड पर पशु अस्पताल के समीप शुरू की गई यूरोपियन तकनीक पर आधारित भूमिगत डस्टबिन व्यवस्था वर्षों पहले ही दम तोड़ चुकी है। प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार शुरू की गई थी। अब इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई मशीन खुद ही डंपिंग प्वाइंट बन चुकी है।
अब बौद्ध स्तूप के पास बना दी डंपिंग साइट
शहर का कचरा एकत्रित करने के लिए अब पवित्र ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी ओर बौद्ध स्तूप के साथ डंपिग साइट बना दी गई, जहां सामने ब्रह्मसरोवर तो समीप ही ऐतिहासिक गुरुद्वारा व जगद्गुरु ब्रह्मानंद आश्रम के साथ-साथ नागरिक अस्पताल व विश्वविद्यालय भी है। बौद्ध स्तूप प्रबंधन की ओर से इस पर आपत्ति भी जताई जा चुकी है।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भरसक प्रयास : डीएमसी
डीएमसी पंकज सेतिया का कहना है कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए हर संभव भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार बेहतर परिणाम मिलेगा। शहर की स्वच्छता को लेकर पूरा प्रशासन गंभीर है। गीता महोत्सव में भी स्वच्छता पर पूरा फोकस रखा जाएगा।
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वर्तमान में नगर परिषद से लेकर आमजन के समक्ष शहर से हर रोज निकल रहा करीब 90 टन कचरा बड़ी समस्या बना हुआ है। घर-घर से कचरा उठान के लिए टिप्पर लगाए जाने के साथ-साथ इसके लिए पिछले वर्ष निजी एजेंसी को ठेका दिए जाने के बावजूद भी उम्मीद अनुसार स्वच्छता की ओर नहीं बढ़ पाए हैं। यहां तक कि आज भी धर्मनगरी के पास कचरा निस्तारण प्लांट नहीं है और सारा कचरा करनाल स्थित प्लांट पर ले जाया जा रहा है। यही नहीं शहर के कचरे के लिए स्थायी डंपिंग साइट तक नहीं बन पाई है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह साइट अनेक जगह बदलनी पड़ी तो वर्तमान में ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी ओर बौद्ध स्तूप के साथ बनाई साइट पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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कहीं नालियां कचरे से अटीं तो कहीं लगे ढेर
शहर की नालियों में कचरा भरा हुआ है तो वहीं अनेक जगह कचरे के ढेर भी लगे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से शहर में आमजन के लिए भी 25 प्वाइंट बनाए हैं तो वहीं दावा है कि यहां से सुबह व शाम दोनों समय कचरे का उठान किया जाता है।
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पोर्टल पर ही आ रही हर रोज आधा दर्जन शिकायतें
आमजन के सहयोग को लेकर स्वच्छ सिटी पोर्टल भी बनाया गया है, जहां पर हर रोज आधा दर्जन से अधिक शिकायतें कचरे व पानी निकासी न होने से संबंधित पहुंच रही है। पिछले दो माह में ही पोर्टल पर 200 शिकायतें मिल चुकी हैं तो वहीं स्वच्छ भारत मिशन की ओर से कार्यभार संभाल रही सीमा रानी के मुताबिक ये सभी शिकायतें निपटाईं भी जा चुकी हैं। हर रोज आने वाली शिकायतों का उसी दिन निदान करवा दिया जाता है।
9500 अंकों की होगी परीक्षा
शहर कितना स्वच्छ हुआ, यह जांचने के लिए 9500 अंकों की परीक्षा होगी, जिसके लिए केंद्रीय टीम अगले माह पहुंचने की उम्मीद है। इस परीक्षा में सर्विस लेवल प्रोग्रेस के 60 फीसदी अंक, सर्टिफिकेशन के 26 फीसदी तो जन आंदोलन के 14 फीसदी अंक होंगे। टीम कचरा उठान में लगी गाड़ी के स्पीकर तक की जांच करती है तो आमजन से फीडबैक भी लेती है। 9500 में से 600 अंक आमजन की फीडबैक से ही मिलने हैं। इसके लिए नप ने बकायदा सभी शौचालयों पर क्यूआर कोड तक लगाया है।
खुले में कचरा फेंकने पर किए जाने लगे चालान
नप ने अब खुले में कचरा फेंकने वाले लोगों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। दो दिन में ही 11 लोगों के चालान किए जा चुके हैं। इनमें दुकानदार ही अधिक है। नप ईओ अभय यादव का कहना है कि इस तरह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। लोगों को जागरूक होना चाहिए।
दम तोड़ गई प्रदेश की पहली भूमिगत डस्टबिन व्यवस्था
मार्च 2017 में कुरुक्षेत्र के पिपली-थर्ड गेट रोड पर पशु अस्पताल के समीप शुरू की गई यूरोपियन तकनीक पर आधारित भूमिगत डस्टबिन व्यवस्था वर्षों पहले ही दम तोड़ चुकी है। प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार शुरू की गई थी। अब इसके लिए लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई मशीन खुद ही डंपिंग प्वाइंट बन चुकी है।
अब बौद्ध स्तूप के पास बना दी डंपिंग साइट
शहर का कचरा एकत्रित करने के लिए अब पवित्र ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी ओर बौद्ध स्तूप के साथ डंपिग साइट बना दी गई, जहां सामने ब्रह्मसरोवर तो समीप ही ऐतिहासिक गुरुद्वारा व जगद्गुरु ब्रह्मानंद आश्रम के साथ-साथ नागरिक अस्पताल व विश्वविद्यालय भी है। बौद्ध स्तूप प्रबंधन की ओर से इस पर आपत्ति भी जताई जा चुकी है।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भरसक प्रयास : डीएमसी
डीएमसी पंकज सेतिया का कहना है कि शहर को स्वच्छ बनाने के लिए हर संभव भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार बेहतर परिणाम मिलेगा। शहर की स्वच्छता को लेकर पूरा प्रशासन गंभीर है। गीता महोत्सव में भी स्वच्छता पर पूरा फोकस रखा जाएगा।