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श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनकर झूमे भक्त
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भागवत कथा में आरती करते श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। नवरात्र पर सेक्टर-पांच में चल रही भागवत कथा में बुधवार को गौ गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के संस्था के संस्थापक अध्यक्ष कथावाचक अनिल शास्त्री ने भक्तों को श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग का रसपान कराया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति की गंगा में डुबकी लगाते रहे।
कथावाचक ने बताया कि कंस अपने रथ पर वासुदेव और देवकी के साथ जा रहे थे। तभी आकाश से घोर गर्जना होती है की कंस देवकी के गर्भ से जन्मी आठवीं संतान तेरा काल बनकर तेरा नाश करेगी। कंस ने भय के वशीभूत होकर अपनी बहन देवकी एवं वासुदेव को कारागार में डाल दिया और एक-एक कर छह संतानों का जन्म लेने के साथ ही वध कर दिया। सातवें गर्भ का संकर्षण हो गया।
उधर देवकी ने आठवां गर्भ धारण किया तभी कंस ने सैनिकों को सावधान कर दिया की मेरा काल आ रहा है। भाद्र कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान बालक के रूप में प्रकट हुए और कहा कि मुझे गोकुल नंद बाबा के यहां छोड़ आएं तथा वहां से योगमाया को साथ ले आएं। तभी वासुदेव के हाथों और पांवों की बेड़ियां खुल गईं। टोकरी में बालक को सावधानी पूर्वक रखकर यमुना नदी पार करते समय बारिश आ गई। बारिश से बचाव के लिए नागराज अपना धाम छोड़ आए और छत्ते की तरह भगवान को भीगने से बचाया।
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साथ ही यमुना भी प्रभु के दर्शन करने के लिए ऊपर उठती आ रही थी, जो वासुदेव के सिर तक आ गई। तब भगवान ने यमुना को यह कहकर शांत कर दिया की अपने ससुर के सिर पर चढ़ रही हो और टोकरी से पैर निकालकर यमुना को दर्शन दे दिए। तब वासुदेव द्वारा कृष्ण को छोड़कर और योगमाया को साथ लेकर वापस आ आते हैं। कंस ने जैसे ही योगमाया को मारना चाहा तो वह कन्या आकाश में जाकर कंस को सतर्क करती है की तेरा काल इस धरा पर जन्म ले चुका है। मुख्य यजमान कृष्ण गोपाल शर्मा एवं शिमला देवी शर्मा ने भागवत पुराण की पूजा की।
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कुरुक्षेत्र। नवरात्र पर सेक्टर-पांच में चल रही भागवत कथा में बुधवार को गौ गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के संस्था के संस्थापक अध्यक्ष कथावाचक अनिल शास्त्री ने भक्तों को श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग का रसपान कराया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति की गंगा में डुबकी लगाते रहे।
कथावाचक ने बताया कि कंस अपने रथ पर वासुदेव और देवकी के साथ जा रहे थे। तभी आकाश से घोर गर्जना होती है की कंस देवकी के गर्भ से जन्मी आठवीं संतान तेरा काल बनकर तेरा नाश करेगी। कंस ने भय के वशीभूत होकर अपनी बहन देवकी एवं वासुदेव को कारागार में डाल दिया और एक-एक कर छह संतानों का जन्म लेने के साथ ही वध कर दिया। सातवें गर्भ का संकर्षण हो गया।
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उधर देवकी ने आठवां गर्भ धारण किया तभी कंस ने सैनिकों को सावधान कर दिया की मेरा काल आ रहा है। भाद्र कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान बालक के रूप में प्रकट हुए और कहा कि मुझे गोकुल नंद बाबा के यहां छोड़ आएं तथा वहां से योगमाया को साथ ले आएं। तभी वासुदेव के हाथों और पांवों की बेड़ियां खुल गईं। टोकरी में बालक को सावधानी पूर्वक रखकर यमुना नदी पार करते समय बारिश आ गई। बारिश से बचाव के लिए नागराज अपना धाम छोड़ आए और छत्ते की तरह भगवान को भीगने से बचाया।
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साथ ही यमुना भी प्रभु के दर्शन करने के लिए ऊपर उठती आ रही थी, जो वासुदेव के सिर तक आ गई। तब भगवान ने यमुना को यह कहकर शांत कर दिया की अपने ससुर के सिर पर चढ़ रही हो और टोकरी से पैर निकालकर यमुना को दर्शन दे दिए। तब वासुदेव द्वारा कृष्ण को छोड़कर और योगमाया को साथ लेकर वापस आ आते हैं। कंस ने जैसे ही योगमाया को मारना चाहा तो वह कन्या आकाश में जाकर कंस को सतर्क करती है की तेरा काल इस धरा पर जन्म ले चुका है। मुख्य यजमान कृष्ण गोपाल शर्मा एवं शिमला देवी शर्मा ने भागवत पुराण की पूजा की।