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Kurukshetra News: कान्हा के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
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कुरुक्षेत्र। श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति की ओर से होली के उपलक्ष्य में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के नॉन टीचिंग क्लब में भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा के छठे दिन कथावाचक अनिल शास्त्री ने कहा कि हमारे धर्म शास्त्रों में आठ प्रकार के विवाह का वर्णन किया गया है। विदर्भ राज नरेश की पुत्री महारानी रुक्मिणी का विवाह भाई रुक्मी ने मगध नरेश शिशुपाल के साथ में निश्चित किया था। भाई रुक्मी को यह पता नहीं था कि मेरी बहन रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी की अवतार है। रुक्मिणी को वह सामान्य कन्या समझता था, इसलिए सामान्य जीव के साथ में विवाह करना निश्चित किया, लेकिन रुक्मिणी अपने भाई के मानसिक विचारों से पूर्णतया परिचित थी। इस दौरान गायक बालकृष्ण शर्मा के सुनाए भजन ‘आओ मेरी सखियों मुझे मेंहदी लगा दो’, ‘मुझे श्याम सुंदर की दुल्हन बना दो, छलकत तोहरि गगरिया ए कान्हा’ पर श्रद्धालु झूम उठे।
रुक्मिणी ने अपने विवाह के लिए द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण को अपने कुल पुरोहित व ब्राह्मण की ओर से एक पत्र भेजा था। उस पत्र में उन्होंने बतलाया था, कि मैं साक्षात लक्ष्मी की अवतार हूं। इसलिए मेरा पाणिग्रहण विवाह आदि संस्कार आपके साथ में होगा तो उचित होगा। आपसे प्रार्थना करती हूं, कि समय पर पधार कर मंदिर के गर्भगृह में ही भगवती महामाया गौरी को निवेदन अर्चन वंदन पूजन करके आपके साथ ही द्वारिका चलूंगी।
कथावाचक अनिल ने बताया कि भगवान ने ब्राह्मण के द्वारा पत्र प्राप्त किया तथा पत्र पढ़ा और द्वारिका से ब्राह्मणों को यथोचित सेवा सम्मान करते हुए भगवान श्री द्वारिकाधीश ने आश्वस्त करके ब्राह्मण को भेजा कि मैं उक्त समय पर आकर रुक्मिणी का पाणिग्रहण संस्कार अवश्य करूंगा। भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मिणी को मंदिर के गर्भगृह से लेकर ही द्वारिका प्रस्थान किए और अपने गुरु पुरोहित बंधु बांधव को बुलाकर अग्नि को साक्षी मानकर रुक्मणि के साथ मांगलिक विवाह संपन्न किया। उन आठ प्रकार के विवाह में सर्वश्रेष्ठ विवाह ब्रह्म विवाह है। ब्रह्म विवाह विशेषता के बारे में कहा कि गुरु पुरोहित बंधु बांधव माता-पिता के द्वारा जो निश्चित किया गया विवाह है। भागवत कथा में रुक्मिणी मंगल विवाह का आयोजन किया गया । ।इस मौके पर डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. प्रो बिंदु शर्मा, डॉ. आशुतोष, डॉ. आनंद दुबे, डॉ. शालिनी गुप्ता, डॉ. हरि सिंह, रविंदर तोमर मौजूद रहे।
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रुक्मिणी ने अपने विवाह के लिए द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण को अपने कुल पुरोहित व ब्राह्मण की ओर से एक पत्र भेजा था। उस पत्र में उन्होंने बतलाया था, कि मैं साक्षात लक्ष्मी की अवतार हूं। इसलिए मेरा पाणिग्रहण विवाह आदि संस्कार आपके साथ में होगा तो उचित होगा। आपसे प्रार्थना करती हूं, कि समय पर पधार कर मंदिर के गर्भगृह में ही भगवती महामाया गौरी को निवेदन अर्चन वंदन पूजन करके आपके साथ ही द्वारिका चलूंगी।
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कथावाचक अनिल ने बताया कि भगवान ने ब्राह्मण के द्वारा पत्र प्राप्त किया तथा पत्र पढ़ा और द्वारिका से ब्राह्मणों को यथोचित सेवा सम्मान करते हुए भगवान श्री द्वारिकाधीश ने आश्वस्त करके ब्राह्मण को भेजा कि मैं उक्त समय पर आकर रुक्मिणी का पाणिग्रहण संस्कार अवश्य करूंगा। भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मिणी को मंदिर के गर्भगृह से लेकर ही द्वारिका प्रस्थान किए और अपने गुरु पुरोहित बंधु बांधव को बुलाकर अग्नि को साक्षी मानकर रुक्मणि के साथ मांगलिक विवाह संपन्न किया। उन आठ प्रकार के विवाह में सर्वश्रेष्ठ विवाह ब्रह्म विवाह है। ब्रह्म विवाह विशेषता के बारे में कहा कि गुरु पुरोहित बंधु बांधव माता-पिता के द्वारा जो निश्चित किया गया विवाह है। भागवत कथा में रुक्मिणी मंगल विवाह का आयोजन किया गया । ।इस मौके पर डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. हुकम सिंह, डॉ. प्रो बिंदु शर्मा, डॉ. आशुतोष, डॉ. आनंद दुबे, डॉ. शालिनी गुप्ता, डॉ. हरि सिंह, रविंदर तोमर मौजूद रहे।
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