{"_id":"6372a821b4f94b021b0f9bbc","slug":"despite-the-increase-in-the-ratio-of-girls-education-employment-is-not-available-indrani-majumdar-kurukshetra-news-knl127494263","type":"story","status":"publish","title_hn":"लड़कियों की शिक्षा की रेशो बढ़ने के बावजूद नहीं मिल रहा रोजगार : इंद्राणी मजूमदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लड़कियों की शिक्षा की रेशो बढ़ने के बावजूद नहीं मिल रहा रोजगार : इंद्राणी मजूमदार
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। सैनी समाज धर्मशाला में आयोजित राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन में हिस्सा लेती महिलाएं।
- फोटो : Kurukshetra
कुरुक्षेत्र। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के 16 वें राज्य प्रतिनिधि सम्मेलन के दूसरे दिन महिलाओं के मुद्दों पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसमें लड़कियों मेें शिक्षा दर में वृद्धि के बावजूद अपेक्षित रोजगार न मिलने पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता के तौर पर सेंटर फार वोमेन डेवलपमेंट स्टडीज की राष्ट्रीय नेत्री इंद्राणी मजूमदार और सीआईटीयू की राज्याध्यक्ष कामरेड सुरेखा शामिल रही। मंच संचालन केंद्रीय कमेटी सदस्या शारदा ने किया ।
इंद्राणी मजूमदार ने कहा कि कोरोना काल में महिलाओं के रोजगार बहुत सीमित हो गए। आज सबसे ज्यादा महिलाओं के रोजगार पर संकट है। उन्होंने कहा कि लड़कियों की शिक्षा बढ़ी है। हरियाणा में आज ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियों दसवीं क्लास में लड़कियों की 93 फीसदी और लड़कों का 96 फीसदी है, लेकिन रोजगार के अवसर पैदा नही किए जा रहे हैं और डिजिटलाइजेशन के अंतर्गत रोजगार भी सिकोड़े जा चुके हैं। इसलिए समाज में महिलाओं की स्थिति और भी पिछड़ गई है। हमें यह समझना होगा यदि महिलाओं के रोजगार में कटौती होगी तो पुरुषों के रोजगार भी नहीं बचेंगे। संगठन को इस विषय पर गंभीरता से चिंतन करना चाहिए और महिलाओं के रोजगार सृजित करवाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
सीटू की राज्य अध्यक्ष सुरेखा ने कहा कि हरियाणा में कर्मचारी आंदोलन में महिलाएं दोहरी भूमिका के चलते नहीं आ पाती। पुरुष साथियों को उनके काम का बंटवारा करना चाहिए। रीति-रिवाजों और परंपराओं का तिहरा बोझ भी महिलाओं पर ही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में बलात्कार, छेड़खानी, घरेलू हिंसा जबरदस्त है । देश में हरियाणा दूसरे स्थान पर है। इसलिए हमें सभी जागरूक नागरिकों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। इन समस्याओं के रहते हुए महिलाएं संगठन में नहीं आ सकती। संघ द्वारा कामकाजी महिलाओं के मुद्दों पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने का फैसला लिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
इंद्राणी मजूमदार ने कहा कि कोरोना काल में महिलाओं के रोजगार बहुत सीमित हो गए। आज सबसे ज्यादा महिलाओं के रोजगार पर संकट है। उन्होंने कहा कि लड़कियों की शिक्षा बढ़ी है। हरियाणा में आज ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियों दसवीं क्लास में लड़कियों की 93 फीसदी और लड़कों का 96 फीसदी है, लेकिन रोजगार के अवसर पैदा नही किए जा रहे हैं और डिजिटलाइजेशन के अंतर्गत रोजगार भी सिकोड़े जा चुके हैं। इसलिए समाज में महिलाओं की स्थिति और भी पिछड़ गई है। हमें यह समझना होगा यदि महिलाओं के रोजगार में कटौती होगी तो पुरुषों के रोजगार भी नहीं बचेंगे। संगठन को इस विषय पर गंभीरता से चिंतन करना चाहिए और महिलाओं के रोजगार सृजित करवाने के लिए प्रयास करना चाहिए।
विज्ञापन
सीटू की राज्य अध्यक्ष सुरेखा ने कहा कि हरियाणा में कर्मचारी आंदोलन में महिलाएं दोहरी भूमिका के चलते नहीं आ पाती। पुरुष साथियों को उनके काम का बंटवारा करना चाहिए। रीति-रिवाजों और परंपराओं का तिहरा बोझ भी महिलाओं पर ही है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में बलात्कार, छेड़खानी, घरेलू हिंसा जबरदस्त है । देश में हरियाणा दूसरे स्थान पर है। इसलिए हमें सभी जागरूक नागरिकों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। इन समस्याओं के रहते हुए महिलाएं संगठन में नहीं आ सकती। संघ द्वारा कामकाजी महिलाओं के मुद्दों पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने का फैसला लिया गया।
विज्ञापन