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बंदी सिखों की रिहाई के लिए गरजी संगत
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एसजीपीसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क के नेतृत्व में रोष मार्च निकालते सिख । संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सजा पूरी होने के बावजूद देश की अलग-अलग जेलों में कैद सिखों की रिहाई को लेकर एसजीपीसी के नेतृत्व में रोष मार्च निकाला गया। संगत ने काले कपड़े पहन और हाथों में काले झंडे लेकर रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सिखों ने एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क के नेतृत्व में नारेबाजी की।
एसजीपीसी के आह्वान पर सोमवार को सुबह ही पहले गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में सिख संगत एकत्रित हुई। यहां से एकत्रित होकर सिख संगत का काफिला काले कपड़े पहन लघु सचिवालय पहुंचा। यहां सिखों ने सजा भुगत चुके बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना रोष व्यक्त किया।
एसजीपीसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले सिखों के साथ दूसरे दर्जे वाला व्यवहार किया जा रहा है। इसका एक उदाहरण तीन दशकों से भारत की विभिन्न जेलों में नजरबंद सिख हैं, जिन्हें अपनी सजा पूरी करने के बाद भी रिहा नहीं किया जा रहा है। इन सिख बंदियों को रिहा न करके सरकार लगातार सिखों के साथ भेदभाव कर रही हैं, जो मानवाधिकारों का एक बड़ा उल्लंघन है।
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एसजीपीसी मेंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना ने कहा कि सिखों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। जत्थेदार बलदेव सिंह कैमपुर ने कहा कि देश के संविधान ने हर नागरिक को एक समान अधिकार दिए हैं, लेकिन जब सिखों के साथ लगातार भेदभाव रहा है। इस दौरान एसजीपीसी सदस्य अमरीक सिंह जनैतपुर, बीबी अमरजीत कौर बाडा, बलदेव सिंह खालसा, शिरोमणि अकाली दल (बादल) हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष शरणजीत सिंह सोथा, गुरमीत सिंह पूनिया, धर्म प्रचार मेंबर तजिंदरपाल सिंह लाडवा, सब आफिस उपसचिव सिमरजीत सिंह कंग आदि मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। सजा पूरी होने के बावजूद देश की अलग-अलग जेलों में कैद सिखों की रिहाई को लेकर एसजीपीसी के नेतृत्व में रोष मार्च निकाला गया। संगत ने काले कपड़े पहन और हाथों में काले झंडे लेकर रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सिखों ने एसजीपीसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क के नेतृत्व में नारेबाजी की।
एसजीपीसी के आह्वान पर सोमवार को सुबह ही पहले गुरुद्वारा साहिब पातशाही छठी में सिख संगत एकत्रित हुई। यहां से एकत्रित होकर सिख संगत का काफिला काले कपड़े पहन लघु सचिवालय पहुंचा। यहां सिखों ने सजा भुगत चुके बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना रोष व्यक्त किया।
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एसजीपीसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुजीत सिंह विर्क ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वाले सिखों के साथ दूसरे दर्जे वाला व्यवहार किया जा रहा है। इसका एक उदाहरण तीन दशकों से भारत की विभिन्न जेलों में नजरबंद सिख हैं, जिन्हें अपनी सजा पूरी करने के बाद भी रिहा नहीं किया जा रहा है। इन सिख बंदियों को रिहा न करके सरकार लगातार सिखों के साथ भेदभाव कर रही हैं, जो मानवाधिकारों का एक बड़ा उल्लंघन है।
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एसजीपीसी मेंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना ने कहा कि सिखों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। जत्थेदार बलदेव सिंह कैमपुर ने कहा कि देश के संविधान ने हर नागरिक को एक समान अधिकार दिए हैं, लेकिन जब सिखों के साथ लगातार भेदभाव रहा है। इस दौरान एसजीपीसी सदस्य अमरीक सिंह जनैतपुर, बीबी अमरजीत कौर बाडा, बलदेव सिंह खालसा, शिरोमणि अकाली दल (बादल) हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष शरणजीत सिंह सोथा, गुरमीत सिंह पूनिया, धर्म प्रचार मेंबर तजिंदरपाल सिंह लाडवा, सब आफिस उपसचिव सिमरजीत सिंह कंग आदि मौजूद रहे।

बंदी सिखों की रिहाई के लिए लघु सचिवालय में धरने पर बैठी संगत। संवाद- फोटो : Kurukshetra