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Kurukshetra News: नमी की आड़ में 400 रुपये तक का कट, 15 दिन पहले खरीदे धान का नहीं हुआ उठान
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कुरुक्षेत्र/पिहोवा। अनाजमंडियों में नमी की आड़ में धान पर 100 रुपये से 300 रुपये तक की कटौती हो रही है। पिछले 15 दिन पहले खरीदे गए धान का भी उठान नहीं हुआ है। इन समस्याओं से नाराज किसानों ने शनिवार को प्रदेश सरकार का पुतला फूंका और कड़ा रोष जताया।
किसान रेस्ट हाउस में इकट्ठा हुए। उन्होंने वहां से रोष मार्च निकाला और मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि राइस मिलर 17 फीसदी नमी वाले धान पर भी 300 रुपये तक कटौती कर रहे हैं। खरीद एजेंसियां किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही हैं। भारतीय किसान यूनियन पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने राइस मिलरों पर पूल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकारी दर पर दर्ज धान को मिलों में उतारने से इन्कार किया जा रहा है। इससे सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसान अपनी फसल मंडियों में पड़े रहने के डर से निजी खरीदारों को कम दर पर धान बेच रहे हैं। प्रिंस वड़ैच ने बताया कि एक अक्तूबर को खरीदे गए धान का भी उठान नहीं हुआ। इससे किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि किसान आंदोलन के लिए आगे की रणनीति बनाने लगे हैं।
खरीद और उठान की स्थिति
जिले में अब तक 6.11 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इसमें से 5.55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी हो चुकी है, जो कुल आवक का 90.80 फीसदी है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के अनुसार, जिले में लगभग 3.70 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है। यह जिला की कुल खरीद का 68.6 फीसदी है, जो प्रदेश में अन्य जिलों से ज्यादा है। किसानों को अब तक 833.09 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पूरे प्रदेश में 11.01 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है। किसानों ने राइस मिलरों और खरीद एजेंसियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
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किसान रेस्ट हाउस में इकट्ठा हुए। उन्होंने वहां से रोष मार्च निकाला और मार्केट कमेटी कार्यालय पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि राइस मिलर 17 फीसदी नमी वाले धान पर भी 300 रुपये तक कटौती कर रहे हैं। खरीद एजेंसियां किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही हैं। भारतीय किसान यूनियन पिहोवा के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने राइस मिलरों पर पूल बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकारी दर पर दर्ज धान को मिलों में उतारने से इन्कार किया जा रहा है। इससे सरकारी खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसान अपनी फसल मंडियों में पड़े रहने के डर से निजी खरीदारों को कम दर पर धान बेच रहे हैं। प्रिंस वड़ैच ने बताया कि एक अक्तूबर को खरीदे गए धान का भी उठान नहीं हुआ। इससे किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि किसान आंदोलन के लिए आगे की रणनीति बनाने लगे हैं।
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खरीद और उठान की स्थिति
जिले में अब तक 6.11 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। इसमें से 5.55 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पूरी हो चुकी है, जो कुल आवक का 90.80 फीसदी है। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के अनुसार, जिले में लगभग 3.70 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है। यह जिला की कुल खरीद का 68.6 फीसदी है, जो प्रदेश में अन्य जिलों से ज्यादा है। किसानों को अब तक 833.09 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पूरे प्रदेश में 11.01 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हुआ है। किसानों ने राइस मिलरों और खरीद एजेंसियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।
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