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‘सुलेख तो बहुत अच्छा था, लेकिन भाग्य का लेख इतना बुरा होगा सोचा था’

Wed, 17 Jan 2018 12:25 AM IST
Updated Wed, 17 Jan 2018 12:25 AM IST
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‘सुलेख तो बहुत अच्छा था, लेकिन भाग्य का लेख इतना बुरा होगा सोचा था’
‘सुलेख तो बहुत अच्छा था, लेकिन भाग्य का लेख इतना बुरा होगा सोचा था’
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसा (कुरुक्षेत्र)।
दरिंदों ने झांसा निवासी जिस लाडली को दरिंदों ने भयानक मौत दी है, वह देश की साक्षर महिलाओं के आंकड़ों में सुधार करते हुए डॉक्टर बनना चाहती थी। यह जानकारी उसकी मां ने अमर उजाला के रिपोर्टर को दी। इस दौरान दरिंदगी का शिकार हुई मासूम की मां रो-रोकर बोली कि साहब हमें पैसा नहीं, न्याय चाहिए। जिन दरिंदों ने मेरी बेटी का ये हश्र किया, उन पर ऐसी कार्रवाई करो कि वो एक सबक बने। मेरी बेटी डाक्टर बनना चाहती थी। दुपहर तक स्कूल में पढ़ती थी और शाम को ट्यूशन जाती थी। आठवीं में उसके 95 प्रतिशत अंक थे। अब कुछ नहीं रहा। उसकी ये कॉपियां रह गई हैं। देख लो इन्हें, कितना सुंदर लिखती थी मेरी बेटी। लेकिन, भाग्य का लेखा इतना बुरा होगा, कभी सोचा भी नहीं था।
पीड़िता की मां ने भर्राए गल से बताया कि उसने अपनी सामाजिक विज्ञान की कॉपी में अंतिम पाठ चार लिखा था। इसमें जाति, धर्म और लैंगिक मसलों पर सवाल जवाब लिखे हैं। अमर उजाला की टीम मंगलवार को गांव झांसा की गलियों में पहुंची तो उस गल में सन्नाटा मिला जहां पीड़िता का घर है। उसके आपसपास गांव के दो प्राइवेट स्कूल हैं। इनमें से एक में पीड़िता पढ़ती थी। उस स्कूल पर अभी ताला जड़ा है, जहां पीड़ित छात्रा शाम को कोचिंग लेने जाती थी। स्कूल के चंद कदम की दूरी छात्रा का घर है। इसी स्कूल से चंद कदम की दूरी पर ग्राम सचिवालय है। यहां राजनेताओं सहित धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की गाड़ियां दिन भर दौड़ती रहीं। सभी मृतक छात्रा के परिजनों को न्याय दिलाने के साथ उनकी हर तरह से मदद करने का आश्वासन देते रहे। पीड़िता के घर में मंगलवार को परिवार के सिर्फ एक-दो पुरुषों और अधिकांश महिलाएं ही मौजूद थीं। क्योंकि, परिवार के अन्य सदस्य और कुछ रिश्तेदार छात्रा के अस्थि कलश को लेकर हरिद्वार गए हुए थे। इस दौरान मृतका की मां से बात की तो वह लाडली की यादों जुबां पर लाते समय फूट-फूट कर रो पड़ी।
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पीड़िता की मां इस दौरान लोगों को बेटी की कॉपी दिखाती रहीं। उस कापी पर जब नजर डाली तो आखिरी पाठ चार लिखा हुआ था। यह पाठ ही इस निर्भया का आखिरी पाठ बन गया। इस पाठ में छात्रा ने सुंदर लेखनशैली के साथ लिखा है कि ‘शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के साथ भेदभाव का प्रमाण है, उनकी साक्षरता दर। यह सिर्फ 54 प्रतिशत है। आज भी अधिक पैसे वाली और प्रतिष्ठित नौकरियों में महिलाओं का अनुपात बहुत कम है। अर्थात रोजगार के क्षेत्र में भी महिलाओं के साथ भेदभाव किए जाते हैं, राजनीतिक जीवन में जनसंख्या के अनुपात में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है।’
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हिमाचल के बद्दी से गिरफ्तार किया एक युवक
पुलिस अब तक नौ लोगों को इस दरिंदगी भरी वारदात में राउंडअप कर चुकी है। इनमें से एक को हिमाचल के बद्दी से काबू किया गया है। पुलिस इन सभी से पूछताछ कर रही है। अभी तक हत्या प्रकरण से संबंधित ऐसा कोई भी ठोस सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है, जिसके दम पर पुलिस खुलासे का दावा कर सके। जिला पुलिस की कई टीमें इस घटनाक्रम से जुड़े हर प्रकार के तथ्य जुटा रही हैं। इसके लिए झांसा सहित आसपास क्षेत्र में भी पुलिस सक्रिय हो चुकी है।
नौ जनवरी से लापता इस युवक की रिपोर्ट नहीं है दर्ज
नौ जनवरी से गांव झांसा से जो युवक लापता है, उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट आज तक दर्ज नहीं हो सकी है। पुलिस ने इसकी पुष्टि की है। पुलिस की मानें तो लापता हुआ यह छात्र कहां हैं, उसकी तलाश में अब तक अनेक जगह दबिश दी जा चुकी ही, लेकिन नौ जनवरी के बाद उससे जुड़ी कोई भी जानकारी पुलिस तक नहीं पहुंची है। पुलिस का टारगेट हर हाल में लापता हुए इस युवक का सुराग लगाना है। उसकी तलाश में पुलिस अब तक पंजाब के पटियाला, हिमाचल और उसके रिश्तेदारों के घर दस्तक दे चुकी है।
शाम को साढ़े चार बजे जाते समय देखा
लापता युवक को आखिरी बार नौ जनवरी को शाम करीब साढ़े चार बजे गांव के एक युवक ने मारकंडा पुल की ओर जाते देखा था। इससे कुछ देर पहले ग्राम सचिवालय के निकट से छात्रा को भी देखे जाने की बात एक ग्रामीण ने पुलिस के सामने ने कही है। जांच के लिए बनाई गई एसआईटी के सदस्य ने अमर उजाला को बताया कि इसके बाद अलग-अलग समय में देखे गए गांव झांसा के छात्र और छात्रा को दुबारा देखे जाने की जानकारी कहीं से नहीं मिली।
लापता छात्र के मोबाइल की लोकेशन रात 10 बजे तक गांव में ही थी
लापता छात्र को नौ जनवरी की शाम साढ़े चार बजे के बाद फिर देखे जाने की जानकारी अभी तक पुलिस को नहीं मिली है। जांच में पता चला है कि साइबर सेल की टीम को इस लापता छात्र के मोबाइल की लोकेशन नौ जनवरी रात 10 बजे तक गांव झांसा में ही मिली है। इसके बाद से लापता छात्र का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है। लापता छात्र की कॉल डिटेल में रात 10 बजे उसके मोबाइल से किसे संपर्क साधा गया था, इसकी भी जानकारी मिली है।

हिमाचल से हिरासत में लिए गए चचेरे भाई को किया था आखिरी कॉल
पता चला है कि हिमाचल के बद्दी क्षेत्र से जिस युवक को पुलिस ने हिरासत में लिया है, वह लापता छात्र का चचेरा भाई है। वह अंबाला में अपनी बुआ के पास रह रहा था, लेकिन लापता छात्र ने इस युवक के मोबाइल पर नौ जनवरी को आखिरी कॉल क्यों की, यह राज जानने की कोशिश में पुलिस ने पुरी ताकत लगा दी है। क्योंकि, काल करने वाले छात्र का सुराग अब तक नहीं लग सका है। यह लापता छात्र गंभीर रोग से पीड़ित भी बताया गया है। पता चला है कि उसका पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज चल रहा था।

फोटो दिखाकर पूछा, क्या ये वारदात को दे सकता है अंजाम
मृतका की मां और ताऊ के बेटे ने बताया कि पुलिस जिस लापता छात्र की तलाश कर रही है, वह टीबी और पीलिया से ग्रस्त था। उन्हें उस पर कोई शक नहीं है। इन्होंने उसकी फोटो दिखाते हुए कहा कि आपको लगता कि यह बालक इतनी भयानक वारदात को अंजाम दे सकता है। इनका यह भी कहना था कि कम से कम उन्हें यह नहीं लगता कि उनके गांव का यह बालक इतना घृणित कार्य कर सकता है।

हत्या से कुछ देर पहले खाये थे चावल
झांसा की महिला सरपंच के पति पुनीत मल ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि हत्या से कुछ देर पहले ही छात्रा ने चावल खाये थे। नौ जनवरी शाम चार बजे ट्यूशन के लिए घर से निकली छात्रा का उसके बाद सुराग नहीं लगा था। इसके बाद शुक्रवार (12 जनवरी) को शाम साढ़े चार बजे इस छात्रा की लाश जींद के बुढाखेड़ा में मिली थी। इसके बाद 13 जनवरी को छात्रा का पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम हुआ था। वहां के डाक्टरों ने इसकी पुष्टि की थी कि उसके पेट में चावल थे। यह चावल उसने हत्या से कुछ ही देर पहले खाए होंगे।


चेहरे पर दहशत के साथ मृतका की बढ़ाई करते हुए सहपाठी बोली
मृतका के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के चेहरों पर इस दरिंदगी की दहशत साफ दिखाई दी। इनका कहना है कि मृतका पढ़ने में अच्छी थी। स्कूल में उसकी पहचान उत्तम सुलेख के लिए थी। इसी वजह से मास्टर जी कई बार उसे ही बोर्ड पर लिखने के लिए काम देते थे, ताकि अन्य बच्चे भी उसी की तरह लिख सकें। गांव झांसा की स्वीट शाप के मालिक पवन जिंदल का कहना है कि सिर्फ बच्चे ही नहीं, इस घटना का पता चलने के बाद बड़े भी दहशत में है।
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