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Kurukshetra News: उपभोक्ता ने फर्जी दस्तावेज पर बैंक से लिया 15 लाख का ऋण
Tue, 18 Jun 2024 05:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 18 Jun 2024 05:31 AM IST
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कुरुक्षेत्र। खुद को शिक्षक बताकर एक उपभोक्ता ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से 15 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर लिया। हालांकि दस्तावेजों की जांच के बाद उसने बैंक की राशि लौटा दी। बैंक की ओर से पुलिस को अक्तूबर 2023 में शिकायत दी गई थी, मगर कार्रवाई न होने पर बैंक ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने याचिका पर पुलिस को आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने के आदेश दिए।
थाना शहर में दर्ज शिकायत में सेक्टर-13 स्थित एक सरकारी बैंक के क्षेत्रीय व्यापार कार्यालय की मुख्य प्रबंधक ने अदालत में याचिका दायर की थी कि कुलदीप ने वर्ष 2022 में बैंक में 15 लाख रुपये के व्यक्तिगत ऋण के लिए आवेदन किया था। ऋण आवेदन के समय, आरोपी ने कहा कि वह जेबीटी शिक्षक के रूप में कार्यरत है। उसने जीएसएसएस का पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एक्सिस बैंक के खाते का विवरण और एसबीआई के खाते का विवरण जैसे दस्तावेज भी जमा किए। इसमें दो माह का वेतन क्रेडिट दिखाया गया। दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने व्यक्तिगत ऋण स्वीकृत 22 नवंबर 2022 को खाते के माध्यम से आरोपी को 15 लाख रुपये दिए गए। बैंक ने पूर्व-निरीक्षण व सत्यापन को माफ कर दिया गया था, क्योंकि उसका पहले से ही बैंक की दूसरी शाखा में खाता था। वह नियमित रूप से ऋण की किश्त का भुगतान कर रहा था, जिसे स्थायी निर्देशों के आधार पर उसके बचत खाते से काटा जाना था। बाद में पता चला कि विभाग की ओर से आरोपी ने वेतन खाते में जमा नहीं किया गया था, जिससे शिकायतकर्ता बैंक के अधिकारियों को संदेह हुआ। बैंक ने आरोपी से संपर्क किया, मगर उसने कभी फोन नहीं उठाया। बैंक के अधिकारियों ने गांव में जाकर पता किया तो कुलदीप नाम का व्यक्ति गांव में नहीं था। बार-बार फोन करने पर एक दिन आरोपी से संपर्क किया गया और उसके खाते में वेतन जमा नहीं करने का कारण पूछा गया लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। बैंक के अधिकारी ने दस्तावेजों का सत्यापन कराने की बात कही तो उसने सभी दस्तावेज फर्जी बताए और बैंक की बकाया राशि का पूरा भुगतान करके अपना ऋण खाता बंद कर दिया। आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण लिया और बैंक के साथ धोखाधड़ी की। आरोपी किसी अन्य बैंक या व्यक्ति के साथ भी धोखाधड़ी कर सकता है, जिसके लिए 19 अक्तूबर 2023 को पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत दी। पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने पर अदालत में याचिका दायर की।
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थाना शहर में दर्ज शिकायत में सेक्टर-13 स्थित एक सरकारी बैंक के क्षेत्रीय व्यापार कार्यालय की मुख्य प्रबंधक ने अदालत में याचिका दायर की थी कि कुलदीप ने वर्ष 2022 में बैंक में 15 लाख रुपये के व्यक्तिगत ऋण के लिए आवेदन किया था। ऋण आवेदन के समय, आरोपी ने कहा कि वह जेबीटी शिक्षक के रूप में कार्यरत है। उसने जीएसएसएस का पहचान पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एक्सिस बैंक के खाते का विवरण और एसबीआई के खाते का विवरण जैसे दस्तावेज भी जमा किए। इसमें दो माह का वेतन क्रेडिट दिखाया गया। दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने व्यक्तिगत ऋण स्वीकृत 22 नवंबर 2022 को खाते के माध्यम से आरोपी को 15 लाख रुपये दिए गए। बैंक ने पूर्व-निरीक्षण व सत्यापन को माफ कर दिया गया था, क्योंकि उसका पहले से ही बैंक की दूसरी शाखा में खाता था। वह नियमित रूप से ऋण की किश्त का भुगतान कर रहा था, जिसे स्थायी निर्देशों के आधार पर उसके बचत खाते से काटा जाना था। बाद में पता चला कि विभाग की ओर से आरोपी ने वेतन खाते में जमा नहीं किया गया था, जिससे शिकायतकर्ता बैंक के अधिकारियों को संदेह हुआ। बैंक ने आरोपी से संपर्क किया, मगर उसने कभी फोन नहीं उठाया। बैंक के अधिकारियों ने गांव में जाकर पता किया तो कुलदीप नाम का व्यक्ति गांव में नहीं था। बार-बार फोन करने पर एक दिन आरोपी से संपर्क किया गया और उसके खाते में वेतन जमा नहीं करने का कारण पूछा गया लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। बैंक के अधिकारी ने दस्तावेजों का सत्यापन कराने की बात कही तो उसने सभी दस्तावेज फर्जी बताए और बैंक की बकाया राशि का पूरा भुगतान करके अपना ऋण खाता बंद कर दिया। आरोपी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण लिया और बैंक के साथ धोखाधड़ी की। आरोपी किसी अन्य बैंक या व्यक्ति के साथ भी धोखाधड़ी कर सकता है, जिसके लिए 19 अक्तूबर 2023 को पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत दी। पुलिस की ओर से आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने पर अदालत में याचिका दायर की।
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