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अब सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए महिलाओं को नहीं काटने पड़ेंगे पीजीआई व अन्य अस्पतालों के चक्कर
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अब सर्वाइकल कैंसर जांच के लिए महिलाओं को किसी निजी अस्पताल और पीजीआई के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, क्योंकि शीघ्र ही एलएनजेपी अस्पताल के गायनी विभाग में डिजिटल कोलपोस्कोपी मशीन स्थापित होने जा रही है। इस मशीन के स्थापित हो जाने से महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर की पहचान तुरंत हो जाएगी। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उमा ने बताया कि इस मशीन से महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर के डिटेक्शन में काफी सुविधा होगी। बताया गया है कि इस मशीन में अत्याधुनिक कैमरे, वीडियो और टीवी स्क्रीन लगे हैं, जिसके माध्यम से सर्वाइकल कैंसर की तुरंत पहचान की जा सकेगी। इस मशीन के माध्यम से सर्वाइकल में होने वाले पेन, ब्लीडिंग आदि के कारणों का पता चल सकता है। इसके माध्यम से कैंसर के ट्यूमर का ग्रोथ देखा जा सकता है। उसका साफ फोटो भी लिया जा सकता है। इससे बायोप्सी टेस्ट भी ली जा सकती है, जिसके बाद वैसे परेशानी से जूझ रहे महिला का इलाज किया जा सकता है।
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि अन्य देशों की तुलना में भारत में सर्वाइकल कैंसर से महिलाओं की मौत ज्यादा हो रही है। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल 7 हजार से अधिक महिलाओं की मौत हो रही है। सर्वाइकल कैंसर से 18 से 25 उम्र वाली महिलाओं को ही प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि कोलपोस्कोपी मशीन से जांच करके या पैप स्मीयर टेस्ट से प्रारंभिक चरण में सर्वाइकल कैंसर का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आगामी एक सप्ताह तक अस्पताल के गायनी विभाग में कोलपोस्कॉपी मशीन को स्थापित किया जाएगा, जिसके बाद से अस्पताल में इसकी सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
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एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने बताया कि अन्य देशों की तुलना में भारत में सर्वाइकल कैंसर से महिलाओं की मौत ज्यादा हो रही है। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल 7 हजार से अधिक महिलाओं की मौत हो रही है। सर्वाइकल कैंसर से 18 से 25 उम्र वाली महिलाओं को ही प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि कोलपोस्कोपी मशीन से जांच करके या पैप स्मीयर टेस्ट से प्रारंभिक चरण में सर्वाइकल कैंसर का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आगामी एक सप्ताह तक अस्पताल के गायनी विभाग में कोलपोस्कॉपी मशीन को स्थापित किया जाएगा, जिसके बाद से अस्पताल में इसकी सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
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