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केंद्र पर ताला जड़ 19 दिन से हड़ताल पर डटी आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर, सरकार ने 29 को खोला वार्ता का दरवाजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 12:42 AM IST
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1075 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला जड़कर आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर सरकारी कर्मचारी की दर्जा देने व जीवन सुरक्षा सहित अन्य लंबित पड़ी मांगों के समर्थन में आठ दिसंबर से लगातार हड़ताल पर डटी हुई हैं।
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हड़ताल के 19 दिन बीतने के बाद अब 29 दिसंबर को एसोसिएशन के पदाधिकारियों को मुख्यमंत्री से मुलाकात का आश्वासन मिला है, लेकिन वार्ता सफल न होने तक आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने आर-पार की लड़ाई लड़ने की घोषणा की है। इससे पहले दो बार मुख्यमंत्री से मुलाकात की तिथि निर्धारित हो चुकी है, लेकिन वार्ता सफल नहीं हो सकी। बता दें कि आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स वर्ष 2018 में सरकार के साथ हुए समझौते को लागू करने सहित अन्य मांगों के समर्थन में 8 दिसंबर से हड़ताल पर हैं। इनकी हड़ताल के चलते जिलेभर के 1075 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला लटका हुआ है। हड़ताल के कारण इन केंद्रों से सीधे जुड़े करीब 88 हजार बच्चे और 600 से अधिक गर्भवती महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हैं।
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आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन की जिला प्रधान कलावती सैन का कहना है कि वे किसी नई मांग को लेकर हड़ताल पर नहीं हैं, बल्कि मुख्यमंत्री की पुरानी घोषणाओं को लागू कराने और आर्थिक एवं पारिवारिक सुरक्षा के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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यूनियन की प्रदेश महासचिव शकुंतला शर्मा का कहना है कि वे तालमेल कमेटी के बैनर तले 8 दिसंबर से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। कहा कि वर्ष 2018 में 22 दिन हड़ताल करने के बाद मुख्यमंत्री ने उनके लिए कुछ घोषणाएं की थी, जिन्हें आज तक लागू नहीं किया गया। कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
यूनियन की लाडवा अध्यक्ष रीटा शर्मा का कहना है कि पिछले कई माह से केंद्रों का बढ़ा हुआ किराया नहीं मिला रहा। कई बार तो आंगनबाड़ी वर्कर को खुद केंद्रों का किराया भरना पड़ता है। इसकी वजह से वर्कर को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार को उनकी मांगों पर संज्ञान लेना चाहिए।

जिलेभर की 1049 वर्कर और 900 से अधिक हेल्पर के हड़ताल पर जाने के बाद जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं। इसकी वजह से 88 हजार बच्चों और 600-700 गर्भवती महिलाओं को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा। सरकार और यूनियन के पदाधिकारियों के बीच वार्ता चल रही है। जल्द ही मांगों पर सहमति बनने पर वर्कर और हेल्पर के वापस काम पर लौटने की उम्मीद है।
-नीतू रानी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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