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मानवाधिकार आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को किया तलब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jan 2021 02:38 AM IST
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civic, human right commission, health department
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना पॉजिटिव मरीजों का उपचार कर रहे निजी अस्पताल का भुगतान न होने पर मामला गरमा गया है। मरीज के एक परिजन की ओर से शिकायत करने पर मामले की गहनता से जांच करने के लिए मानवाधिकार आयोग की गठित कमेटी कुरुक्षेत्र पहुंच गई है। कमेटी ने स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डा. सूरजभान कंबोज, एनएचएम केे प्रबंधक निदेशक डा. प्रभजोत सिंह और जिला सिविल सर्जन डा. सुखबीर सिंह सहित कई अधिकारियों से इस संदर्भ में जवाब तलब किया है।
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दरअसल मामला ये था कि कोरोना केे गंभीर मरीजों को एलएनजेपी अस्पताल से शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर किया जाता रहा है। उक्त अस्पताल संचालक का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना पॉजिटिव मरीजों को बेहतर उपचार देने पर नीति आयोग की सिफारिश के तहत भुगतान करने की बात कही गई थी, लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग आयुष्मान भारत योजना के तहत भुगतान करने की बात कह रहा है। दरअसल मामला ये था कि गंभीर कोरोना मरीजों को उपचार केे लिए सरकार केे पैनल पर निजी अस्पतालों में मरीजों को रैफर किया जाता था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर के एक निजी अस्पताल केे बकाया करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया, तो निजी अस्पताल संचालक ने कोरोना पॉजिटिव मरीजों का उपचार करने में असमर्थता जताई थी। इस संदर्भ में उपायुक्त सहित अन्य अधिकारियों को शिकायत भी सौंपी थी। एक मरीज परिजन द्वारा मानवाधिकार आयोग को शिकायत की गई, जिसपर संज्ञान लेते हुए आयोग की तीन सदस्यीय कमेटी कुरुक्षेत्र पहुंची और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की। शिकायतकर्ता ने शिकायत में बताया है कि सरकारी अस्पताल में कम व्यवस्था के चलते शहर के एक निजी अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज हो रहा है। इसी अस्पताल में उसके परिवार के सदस्य का भी इलाज हुआ, लेकिन निजी अस्पताल संचालक को मरीजों के इलाज का पैसा ही नहीं मिला। बता दें कि शहर के प्रसिद्ध निजी अस्पताल ने कोरोना काल में कोरोना मरीजों का उपचार करने की बात स्वास्थ्य विभाग के सामने रखी थी। यही नहीं, अस्पताल के एक ब्लॉक को कोरोना वार्ड में तब्दील किया गया था। कुछ दिन पहले अस्पताल संचालक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के समक्ष बकाया बिल की अदायगी को लेकर मुलाकात कर पत्र भी सौंपाथा, लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ। इसके पश्चात मरीज के तीमारदार ने मानवाधिकार आयोग को शिकायत कर दी थी। शिकायकर्ता ने कहा था कि जो अस्पताल अपने यहां कोरोना मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दे रहा है, उसका जितना भी खर्च हुआ उसका भुगतान ही नहीं किया जा रहा। जिसपर संज्ञान लेते हुए मानवाधिकार आयोग ने कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी है।
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भुगतान करने की चल रही है प्रक्रिया: डा. रमेश
एनएचएम डिप्टी सिविल सर्जन डा. रमेश सभ्रवाल का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से बिल बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजे जा चुके है। बिल केे भुगतान करने की प्रक्रिया चल रही है। वीरवार तक कुछ बिलों का भुगतान भी किया जाएगा। इस मामले में जांच करने के लिए मानवाधिकार आयोग की टीम आई है।
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