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Kurukshetra News: गूंजे जयकारे, उमड़ी भक्तों की भीड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। नवरात्र उत्सव जिले भर में मनाया जा रहा है। बुधवार को भी सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही, जहां स्कंदमाता की पूजा की गई। सबसे मुख्य आयोजन प्रदेश के एकमात्र देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में रहा, जहां श्रद्धालु ढोल नगाड़ों के साथ मां के दरबार में पहुंचे। चारों ओर मां के जयकारे गूंजते रहे।
पीठाध्यक्ष पंड़ित सतपाल शर्मा ने बताया कि मां स्कंदमाता को मां दुर्गा का मातृत्व परिभाषित करने वाला स्वरूप माना जाता है। मां भद्रकाली जी को गंगाजल स्नान पश्चात हरे वस्त्र पहना शृंगार किया गया। बुधवार को मंगल आरती सुबह छह बजे मंदिर की मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने की जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में सूरज सतपाल रहे। आरती में विशेष रूप से गुलाबी और पीले रंग के फूल चढ़ाए गए। मां भद्रकाली जी के सुबह 10 बजे नवरात्र व्रत भंडारा प्रवीण कुमार व अन्नपूर्णा भंडारे का आयोजन लवेश द्वारा किया गया।
दोपहर 12 बजे नवरात्र व्रत भंडारा उपेंद्र कुमार व अन्नपूर्णा भंडारा संजय बंसल स्काइट द्वारा आयोजित किया गया। शाम की भजन संध्या में अशोक कौशिक हरियाणवी द्वारा मां के भजनों का गुणगान किया गया और भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। भक्तों की विशेष मांग पर कन्याओं के ऊपर और देशभक्ति के गीत भी सुनाए गए। मुख्य अतिथि के रूप में अरुण आश्री, नारायण-श्रीराम गौतम उपस्थित थे।
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यहां नारी शक्ति द्वारा महाआरती की परंपरा : मां भद्रकाली शक्तिपीठ देश में एकमात्र शक्तिपीठ है जहां महाआरती की परंपरा नारी शक्ति द्वारा निभाई जाती है। पहले यह परंपरा गुरु मां सरबती देवी जी द्वारा निभाई जाती थी। आरती में विधि पूर्वक सबसे पहले शंख, मोर पंख, गुलाब इत्र, चवर, झंडा इत्यादि का प्रयोग होता है। उसके बाद मां भद्रकाली जी के विभिन्न पवित्र ग्रंथों में वर्णित मंत्रों का जाप किया जाता है। दुर्गा चालीसा का जाप करके माता को प्रसन्न किया जाता है।
जहां शिमला देवी गर्भ गृह में आरती करती हैं, वहीं पीठाध्यक्ष पंड़ित सतपाल शर्मा शक्ति स्थल श्री देवीकूप पर आरती करते हैं। मां भद्रकाली के जयकारे के साथ रात्रि शयन आरती का समापन किया गया। इसी के साथ साथ महासप्तमी पर होने वाले मनोकामना पूर्ण यज्ञ की तैयारी भी जारी है।
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कुरुक्षेत्र। नवरात्र उत्सव जिले भर में मनाया जा रहा है। बुधवार को भी सुबह से मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही, जहां स्कंदमाता की पूजा की गई। सबसे मुख्य आयोजन प्रदेश के एकमात्र देवीकूप मां भद्रकाली मंदिर में रहा, जहां श्रद्धालु ढोल नगाड़ों के साथ मां के दरबार में पहुंचे। चारों ओर मां के जयकारे गूंजते रहे।
पीठाध्यक्ष पंड़ित सतपाल शर्मा ने बताया कि मां स्कंदमाता को मां दुर्गा का मातृत्व परिभाषित करने वाला स्वरूप माना जाता है। मां भद्रकाली जी को गंगाजल स्नान पश्चात हरे वस्त्र पहना शृंगार किया गया। बुधवार को मंगल आरती सुबह छह बजे मंदिर की मुख्य पुजारिन शिमला देवी ने की जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में सूरज सतपाल रहे। आरती में विशेष रूप से गुलाबी और पीले रंग के फूल चढ़ाए गए। मां भद्रकाली जी के सुबह 10 बजे नवरात्र व्रत भंडारा प्रवीण कुमार व अन्नपूर्णा भंडारे का आयोजन लवेश द्वारा किया गया।
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दोपहर 12 बजे नवरात्र व्रत भंडारा उपेंद्र कुमार व अन्नपूर्णा भंडारा संजय बंसल स्काइट द्वारा आयोजित किया गया। शाम की भजन संध्या में अशोक कौशिक हरियाणवी द्वारा मां के भजनों का गुणगान किया गया और भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। भक्तों की विशेष मांग पर कन्याओं के ऊपर और देशभक्ति के गीत भी सुनाए गए। मुख्य अतिथि के रूप में अरुण आश्री, नारायण-श्रीराम गौतम उपस्थित थे।
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यहां नारी शक्ति द्वारा महाआरती की परंपरा : मां भद्रकाली शक्तिपीठ देश में एकमात्र शक्तिपीठ है जहां महाआरती की परंपरा नारी शक्ति द्वारा निभाई जाती है। पहले यह परंपरा गुरु मां सरबती देवी जी द्वारा निभाई जाती थी। आरती में विधि पूर्वक सबसे पहले शंख, मोर पंख, गुलाब इत्र, चवर, झंडा इत्यादि का प्रयोग होता है। उसके बाद मां भद्रकाली जी के विभिन्न पवित्र ग्रंथों में वर्णित मंत्रों का जाप किया जाता है। दुर्गा चालीसा का जाप करके माता को प्रसन्न किया जाता है।
जहां शिमला देवी गर्भ गृह में आरती करती हैं, वहीं पीठाध्यक्ष पंड़ित सतपाल शर्मा शक्ति स्थल श्री देवीकूप पर आरती करते हैं। मां भद्रकाली के जयकारे के साथ रात्रि शयन आरती का समापन किया गया। इसी के साथ साथ महासप्तमी पर होने वाले मनोकामना पूर्ण यज्ञ की तैयारी भी जारी है।