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Haryana: रिटायर्ड सूबेदार से 79 लाख की ठगी, देहरादून से पकड़ा शातिर, विदेश से जुड़े तार, आरोपी से क्या मिला?

Mon, 15 Sep 2025 09:11 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Mon, 15 Sep 2025 09:11 PM IST
सार

थाना साइबर पुलिस टीम ने देहरादून में कंबोडिया से संचालित एक साइबर ठगी के ठिकाने पर दबिश देकर एक आरोपी को काबू करते हुए गिरोह का भंडाफोड़ किया है। 

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Cheating with retired Subedar rs 79 lakh Kurukshetra police arrested accused for Dehradun
पुलिस हिरासत में आरोपी। - फोटो : संवाद

विस्तार

कुरुक्षेत्र की थाना साइबर पुलिस टीम ने उत्तराखंड के देहरादून में रेड कर साइबर ठगी गिरोह के शातिर को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी का यह खेल कंबोडिया से चल रहा था। टीम ने आरोपी के पास से 30 लाख रुपये से ज्यादा की कीमत के साइबर ठगी में प्रयोग होने वाले विदेशी उपकरण बरामद किए हैं।

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गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तराखंड के जिला देहरादून के दीपनगर निवासी अनिकांत भट के तौर पर हुई है, जो कंबोडिया में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर देहरादून से ठगी का जाल बुनता था। आरोपी ने कंबोडिया से साइबर ठगी की ट्रेनिंग ली थी और देहरादून में सिम बॉक्स (सिम बैंक सवेट) का उपयोग कर लोगों को ठगी का शिकार बनाता था। सिम बॉक्स मिनी कॉल एक्सचेंज की तरह काम करता है, जिसमें 256 सिम कार्ड एक साथ लगाए जा सकते हैं। यह उपकरण भी कंबोडिया से मंगवाया गया था, जिसके जरिए आरोपी बिना मोबाइल फोन के सैकंड़ों लोगों को एक साथ कॉल करता था।
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पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में इस गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपी के मुताबिक इस तकनीक से विदेश से की गई कॉल को स्थानीय कॉल जैसा दिखाया जाता था, जिससे पीड़ित आसानी से झांसे में आ जाते थे। कंबोडिया में बैठे गैंग के सदस्य कैमरे के जरिए आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखते थे। जांच के दौरान आरोपी से छह मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 278 सिम कार्ड, छह सिम बैंक सवेट, एक कैमरा, दो वाई-फाई बॉक्स, एक पासपोर्ट और एक पर्स बरामद किया।
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मामले की शुरुआत तब हुई जब शहर के सेक्टर-दो निवासी सेवानिवृत सूबेदार बाल कृष्ण ने शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि 24 अगस्त को एक अज्ञात नंबर से कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि की बात कही। जब बाल कृष्ण ने क्रेडिट कार्ड न होने की बात बताई, तो कॉलर ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी दी। डर के चलते पीड़ित ने 28 अगस्त को 29.85 लाख रुपये और एक सितंबर को 49 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में जमा कर दिए। बाद में धोखाधड़ी का अहसास होने पर उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज की। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि ऐसी धमकियों से सतर्क रहें और तुरंत अपने परिवार, दोस्तों या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

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