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हिंदू-सिख एकता का प्रतीक है चैत्र चौदस मेला : एसडीएम
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पिहोवा। मेले के दौरान बीतचीत करते एसडीएम, डीएसपी एवं अन्य अधिकारी। पीआरओ
पिहोवा। समाज में हिंदू-सिख एकता और भाईचारे का प्रतीक चैत्र चौदस मेला सोमवार को श्रद्धा व उत्साह के साथ शुरू हो गया। मेले का शुभारंभ प्रशासक व उपमंडल अधिकारी नागरिक एसडीएम अनिल दून ने किया। इस दौरान पुलिस व प्रशासनिक अमले ने उनके साथ लगातार सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
एसडीएम दून ने कहा कि विख्यात चैत्र चौदस मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। हर साल मेले में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह मेला हिंदू-सिख एकता का प्रतीक भी माना जाता है। पंजाब से सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। परंपरागत तरीके से अमावस के समय स्नान करते हैं। सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। भारी पुलिस बल तैनात किया है। सरस्वती तीर्थ पर प्रशासन की ओर से बाल भवन में बनाए सूचना केंद्र का उद्घाटन भी किया। एसडीएम के साथ डीएसपी निर्मल सिंह, नपा सचिव अशोक कुमार की मौजूदगी में चार दिवसीय मेले का आगाज हुआ। इस अवसर पर उमाकांत शास्त्री, अधीक्षक हाकम सिंह और विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
परीधि के तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ का
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कुरुक्षेत्र की परीधि के तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ का है। वामन पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथु के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथुदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गया था, जिस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। फिर उसके शरीर का मंथन किया गया जिससे भगवान विष्णु के नौवें अंश पृथु पैदा हुए। राजा पृथु ने जिस स्थान पर अपने पितरों को उदक यानी जल दिया, वह स्थान पृथु-उदक यानी पृथुदक नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान का अति महत्व माना गया है। यहां स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ की फल की प्राप्ति के साथ स्वर्गलोक भी प्राप्त होता है।
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युधिष्ठिर ने सगे संबंधियों का यहीं कराया पिंड दान
पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे संबंधियों का यहीं पर पिंडदान कराया था। भगवान श्रीकृष्ण और शिव ने भी यहां सरस्वती तीर्थ में स्नान किया। श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां पधारे थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी पावन तीर्थ पर अपनी माता का पिंडदान कराने आए थे। इस पावन तीर्थ पर पूरा वर्ष श्रद्धालु पिंडदान और स्नान करने के लिए आते रहते हैं लेकिन चैत्र चौदस को यहां स्नान करने का विशेष महत्व है।
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एसडीएम दून ने कहा कि विख्यात चैत्र चौदस मेले का धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्व है। हर साल मेले में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह मेला हिंदू-सिख एकता का प्रतीक भी माना जाता है। पंजाब से सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं। परंपरागत तरीके से अमावस के समय स्नान करते हैं। सीसीटीवी कैमरों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। भारी पुलिस बल तैनात किया है। सरस्वती तीर्थ पर प्रशासन की ओर से बाल भवन में बनाए सूचना केंद्र का उद्घाटन भी किया। एसडीएम के साथ डीएसपी निर्मल सिंह, नपा सचिव अशोक कुमार की मौजूदगी में चार दिवसीय मेले का आगाज हुआ। इस अवसर पर उमाकांत शास्त्री, अधीक्षक हाकम सिंह और विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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परीधि के तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ का
पौराणिक मान्यता के अनुसार, कुरुक्षेत्र की परीधि के तीर्थों में सर्वाधिक महत्व पृथुदक तीर्थ का है। वामन पुराण के अनुसार वेन के पुत्र पृथु के नाम से इस तीर्थ का नाम पृथुदक हुआ। राजा वेन धर्म से विमुख हो गया था, जिस कारण ऋषियों ने उसे श्राप देकर मार दिया था। फिर उसके शरीर का मंथन किया गया जिससे भगवान विष्णु के नौवें अंश पृथु पैदा हुए। राजा पृथु ने जिस स्थान पर अपने पितरों को उदक यानी जल दिया, वह स्थान पृथु-उदक यानी पृथुदक नाम से प्रसिद्ध हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तीर्थ में स्नान का अति महत्व माना गया है। यहां स्नान करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ की फल की प्राप्ति के साथ स्वर्गलोक भी प्राप्त होता है।
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युधिष्ठिर ने सगे संबंधियों का यहीं कराया पिंड दान
पुराणों के अनुसार पांडवों के बड़े भाई युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में मारे गए अपने सगे संबंधियों का यहीं पर पिंडदान कराया था। भगवान श्रीकृष्ण और शिव ने भी यहां सरस्वती तीर्थ में स्नान किया। श्री गुरु नानक देव जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी भी यहां पधारे थे। महाराजा रणजीत सिंह इसी पावन तीर्थ पर अपनी माता का पिंडदान कराने आए थे। इस पावन तीर्थ पर पूरा वर्ष श्रद्धालु पिंडदान और स्नान करने के लिए आते रहते हैं लेकिन चैत्र चौदस को यहां स्नान करने का विशेष महत्व है।

पिहोवा। मेले के दौरान बीतचीत करते एसडीएम, डीएसपी एवं अन्य अधिकारी। पीआरओ

पिहोवा। मेले के दौरान बीतचीत करते एसडीएम, डीएसपी एवं अन्य अधिकारी। पीआरओ