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Kurukshetra News: रैली में गईं बसें, लोगों ने झेली परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर रोहतक के पहरावर में आयोजित राज्य स्तरीय आयोजन में लोगों को ले जाने व लाने के लिए जिले से 35 रोडवेज की बसों को रवाना किया गया, जिसके चलते यातायात सेवा प्रभावित रही व यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इन बसों में कुरुक्षेत्र डिपो की 28 बसें तो पिहोवा सब डिपो की सात बसें शामिल थीं। रोहतक के जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा रैली कार्यक्रम में लोगों को लाने व वापस छोड़ने के लिए प्रदेश से एक हजार 401 बसें मांगी गई थी, जिसमें से कुछ बस आरटीओ द्वारा और कुछ रोडवेज के द्वारा भेजी गई।
इन बसों के रैली में जाने से लुधियाना के सारे रूट बंद रहे तो दिल्ली-चड़ीगढ के तीन, शाहाबाद, बाबैन, पिहोवा, कैथल के दो-दो रूट व चार यमुनानगर के तो नौ से ज्यादा लोकल रूट प्रभावित रहें। इनके चलते लुधियाना जाने वाले यात्रियों को अन्य स्थानों की बसें पकड़कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा तो अन्य रूटों के यात्री भी अपने रूट की बसों के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करते रहे। वहीं इन बसों के रैली में जाने से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना बुजुर्गों, महिलाओं के साथ कॉलेज में पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को करना पड़ा।
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ऐसे में जब भी कोई बस बस अपने स्टैंड पर पहुंचती, तो काफी देर तक इंतजार कर चुके यात्रियों के बीच उस बस में चढ़ने की होड़ लग जाती व बस में अपनी सीट सुनिश्चित करने के लिए काफी जद्दोजहद करते नजर आए।
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कुरुक्षेत्र। भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर रोहतक के पहरावर में आयोजित राज्य स्तरीय आयोजन में लोगों को ले जाने व लाने के लिए जिले से 35 रोडवेज की बसों को रवाना किया गया, जिसके चलते यातायात सेवा प्रभावित रही व यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इन बसों में कुरुक्षेत्र डिपो की 28 बसें तो पिहोवा सब डिपो की सात बसें शामिल थीं। रोहतक के जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा रैली कार्यक्रम में लोगों को लाने व वापस छोड़ने के लिए प्रदेश से एक हजार 401 बसें मांगी गई थी, जिसमें से कुछ बस आरटीओ द्वारा और कुछ रोडवेज के द्वारा भेजी गई।
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इन बसों के रैली में जाने से लुधियाना के सारे रूट बंद रहे तो दिल्ली-चड़ीगढ के तीन, शाहाबाद, बाबैन, पिहोवा, कैथल के दो-दो रूट व चार यमुनानगर के तो नौ से ज्यादा लोकल रूट प्रभावित रहें। इनके चलते लुधियाना जाने वाले यात्रियों को अन्य स्थानों की बसें पकड़कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा तो अन्य रूटों के यात्री भी अपने रूट की बसों के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करते रहे। वहीं इन बसों के रैली में जाने से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना बुजुर्गों, महिलाओं के साथ कॉलेज में पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों को करना पड़ा।
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ऐसे में जब भी कोई बस बस अपने स्टैंड पर पहुंचती, तो काफी देर तक इंतजार कर चुके यात्रियों के बीच उस बस में चढ़ने की होड़ लग जाती व बस में अपनी सीट सुनिश्चित करने के लिए काफी जद्दोजहद करते नजर आए।