{"_id":"5fb439c28ebc3e9bdf462ca3","slug":"bridge-built-on-saraswati-therth-kurukshetra-news-knl511053195","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरस्वती तीर्थ पर बनेगा पुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरस्वती तीर्थ पर बनेगा पुल
विज्ञापन
सरस्वती तीर्थ पर 67 लाख से नए पुल का निर्माण किया जाएगा। ये पुल मजबूत होने के साथ बेहद ही भव्य होगा। पुल को पर्यटन की दृष्टि से दर्शनीय बनाने के लिए रेड स्टॉन लगाकर सजाया जाएगा। ये जानकारी पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन अमित मिनोचा ने दी। उन्होंने बताया कि इस पुल का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। फिलहाल पुल के पहले चरण का काम चल रहा है। इसके बाद पुल को भव्य बनाने के लिए लाल पत्थर (रेड स्टॉन) से काम किया जाएगा। पुल का यह कार्य दूसरे चरण में शुरू होगा। संबंधित विभाग चैत्र चौदस मेले से पहले पुल के निर्माण का दावा कर रहा है।
बता दें इससे पहले सरस्वती तीर्थ पर प्राचीन पुल था। तीर्थ पुरोहित पुल की ऐतिहासिक होने का दावा करते है। इतिहासकार विनोद पंचौली ने दावा करते हुए बताया कि यह पुल 500 वर्ष से भी अधिक पुराना था, जो चुना व पुरानी छोटी ईंटों से बनाया गया था। इसमें मजबूत डाट लगाकर खड़ा किया गया था। इस पुल से मुगलों की सेनाएं गुजरती थी। मुगलों की सेनाओं की छावनी गांव सैयाणा सैदां में थी। वहां जाने के लिए एक मात्र रास्ता यही पुल था। इसके अलावा पंजाब की ओर जाने के लिए यही रास्ता था तथा इसी पुल से आवागमन होता था। पिहोवा में सरस्वती तीर्थ पर आएं सिख धर्म गुरु भी इसी पुल से होकर आए। इस पुल पर सुरक्षा के लिए बुर्जियां बनाई गई थी। पुल को तोड़ने के लिए काफी जद्दोजहद करनी थी। पुल के नए डिजाइन के अनुसार पुल के दोनों ओर बुर्जियां बनाई जाएगी ताकि पुल देखने आकर्षक व प्राचीन लगे।
80 फीट लंबा व 30 फीट चौड़ा होगा पुल
निर्माणाधीन पुल की लंबाई करीब 80 फीट तथा चौड़ाई करीब 30 फीट होगी। पुल के ओर रैलिंग बनाई जाएगी, जो कि दूसरे चरण का काम होगा। दूसरे चरण में पुल को भव्य व इसके सुंदरीकरण पर काम किया जाएगा। पुल के सुंदरीकरण के लिए पुल को रेड स्टॉन से सजाया जाएगा। रैलिंग पर तरह-तरह की नक्काशी की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं व पर्यटकों को तीर्थ से संबंधित जानकारी मिल सकें।
विज्ञापन
पुरातत्व विभाग करेगा जांच
पुराने पुल से बरामद ईंटों को जांच के लिए पुरातत्व विभाग को सौंपा गया है ताकि पुल की प्राचीन होने का अंदाजा लगाया जा सकेें। तीर्थ पुरोहितों का दावा है कि पुराना पुल 500 साल से भी अधिक पुराना था। इसकी मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है इस पुल को तोड़ने में करीब ढाई महीने का समय लगा तथा काफी जद्दोजहद करनी पड़ थी। अब पुरातत्व विभाग पुल से बरामद ईंटों की जांच करके इसके निर्माण का अंदाजा लगाएगा।
विज्ञापन
बता दें इससे पहले सरस्वती तीर्थ पर प्राचीन पुल था। तीर्थ पुरोहित पुल की ऐतिहासिक होने का दावा करते है। इतिहासकार विनोद पंचौली ने दावा करते हुए बताया कि यह पुल 500 वर्ष से भी अधिक पुराना था, जो चुना व पुरानी छोटी ईंटों से बनाया गया था। इसमें मजबूत डाट लगाकर खड़ा किया गया था। इस पुल से मुगलों की सेनाएं गुजरती थी। मुगलों की सेनाओं की छावनी गांव सैयाणा सैदां में थी। वहां जाने के लिए एक मात्र रास्ता यही पुल था। इसके अलावा पंजाब की ओर जाने के लिए यही रास्ता था तथा इसी पुल से आवागमन होता था। पिहोवा में सरस्वती तीर्थ पर आएं सिख धर्म गुरु भी इसी पुल से होकर आए। इस पुल पर सुरक्षा के लिए बुर्जियां बनाई गई थी। पुल को तोड़ने के लिए काफी जद्दोजहद करनी थी। पुल के नए डिजाइन के अनुसार पुल के दोनों ओर बुर्जियां बनाई जाएगी ताकि पुल देखने आकर्षक व प्राचीन लगे।
विज्ञापन
80 फीट लंबा व 30 फीट चौड़ा होगा पुल
निर्माणाधीन पुल की लंबाई करीब 80 फीट तथा चौड़ाई करीब 30 फीट होगी। पुल के ओर रैलिंग बनाई जाएगी, जो कि दूसरे चरण का काम होगा। दूसरे चरण में पुल को भव्य व इसके सुंदरीकरण पर काम किया जाएगा। पुल के सुंदरीकरण के लिए पुल को रेड स्टॉन से सजाया जाएगा। रैलिंग पर तरह-तरह की नक्काशी की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं व पर्यटकों को तीर्थ से संबंधित जानकारी मिल सकें।
विज्ञापन
पुरातत्व विभाग करेगा जांच
पुराने पुल से बरामद ईंटों को जांच के लिए पुरातत्व विभाग को सौंपा गया है ताकि पुल की प्राचीन होने का अंदाजा लगाया जा सकेें। तीर्थ पुरोहितों का दावा है कि पुराना पुल 500 साल से भी अधिक पुराना था। इसकी मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है इस पुल को तोड़ने में करीब ढाई महीने का समय लगा तथा काफी जद्दोजहद करनी पड़ थी। अब पुरातत्व विभाग पुल से बरामद ईंटों की जांच करके इसके निर्माण का अंदाजा लगाएगा।