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होलिका दहन पर भद्रा की छाया
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डॉ. रामराज कौशिक।
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। होलिका के दहन में अपने अहंकार और बुराई को भी भस्म किया जाता है। इस पर होलिका दहन पर भद्रा की छाया है। ज्योतिष में भद्रा को अशुभ माना गया है। भद्रा के कारण होलिका दहन के लिए सिर्फ एक घंटा 10 मिनट का समय का समय मिलेगा। यह कहना है गायत्री ज्योतिष अनुसंधान कुरुक्षेत्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक का।
कौशिक ने बताया इस बार होलिका दहन 17 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और शूल योग में होगा और होली 18 मार्च को खेली जाएगी। होलिका दहन का मुहूर्त इस बार रात 9:03 से रात 10:13 बजे तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि 17 मार्च दोपहर 1:29 बजे शुरू होगी और पूर्णिमा तिथि का समापन 18 मार्च दोपहर 12:46 पर होगा। इस दिन दोपहर 1:20 से रात्रि एक बजे तक भद्रा योग रहेगा।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार रात 9:04 से 10:14 बजे तक भद्रा का पुच्छ काल रहेगा। तब होलिका दहन किया जा सकता है। वहीं 17 मार्च को रात पुच्छ काल में होलिका दहन करना श्रेष्ठ है। कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में चंद्रमा के गोचर पर भद्रा विष्टि करण का योग बनता है। इस अवधि में भद्रा पृथ्वी लोक में रहती है।
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उन्होंने होलिका दहन की पूजा विधि के बारे में बताया स्नान करने के पश्चात होलिका की पूजा वाले स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठे। पूजा करने के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं। पूजा की सामग्री के लिए रोली, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, 5 से 7 तरह के अनाज और एक लोटे में पानी रख लें। इसके बाद इन सभी पूजन सामग्री से होलिका दहन के पहले पूरे विधि-विधान से पूजा करें। मिठाइयां, फल, और मीठे पकवान चढ़ाए, साथ ही भगवान नरसिंह की भी विधि-विधान से पूजा करें और फिर होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें।
होली पर राहु-केतु बदलेंगे राशि
ज्योतिषाचार्य कौशिक के अनुसार होलिका दहन पर राहु और केतु ग्रह राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। हमेशा उल्टी चाल चलने वाले राहु और केतु एक राशि में 18 महीने तक रहते हैं। इसी नियम के अनुसार 17 मार्च को 18 महीने बाद वृष राशि से मेष राशि में और केतु वृश्चिक राशि से तुला राशि में गोचर करने वाले हैं। इन ग्रहों के राशि परिवर्तन का प्रभाव देश-दुनिया और सभी राशि पर पड़ेगा और पूरी दुनिया के लिए बड़े बदलाव को लेकर आएगा। इस बदलाव से भारत भी अछूता नहीं है। राहु के मेष राशि में आने से भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर खराब असर डालेगा।
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कुरुक्षेत्र। होलिका के दहन में अपने अहंकार और बुराई को भी भस्म किया जाता है। इस पर होलिका दहन पर भद्रा की छाया है। ज्योतिष में भद्रा को अशुभ माना गया है। भद्रा के कारण होलिका दहन के लिए सिर्फ एक घंटा 10 मिनट का समय का समय मिलेगा। यह कहना है गायत्री ज्योतिष अनुसंधान कुरुक्षेत्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक का।
कौशिक ने बताया इस बार होलिका दहन 17 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और शूल योग में होगा और होली 18 मार्च को खेली जाएगी। होलिका दहन का मुहूर्त इस बार रात 9:03 से रात 10:13 बजे तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि 17 मार्च दोपहर 1:29 बजे शुरू होगी और पूर्णिमा तिथि का समापन 18 मार्च दोपहर 12:46 पर होगा। इस दिन दोपहर 1:20 से रात्रि एक बजे तक भद्रा योग रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार रात 9:04 से 10:14 बजे तक भद्रा का पुच्छ काल रहेगा। तब होलिका दहन किया जा सकता है। वहीं 17 मार्च को रात पुच्छ काल में होलिका दहन करना श्रेष्ठ है। कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि में चंद्रमा के गोचर पर भद्रा विष्टि करण का योग बनता है। इस अवधि में भद्रा पृथ्वी लोक में रहती है।
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उन्होंने होलिका दहन की पूजा विधि के बारे में बताया स्नान करने के पश्चात होलिका की पूजा वाले स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठे। पूजा करने के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं। पूजा की सामग्री के लिए रोली, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, 5 से 7 तरह के अनाज और एक लोटे में पानी रख लें। इसके बाद इन सभी पूजन सामग्री से होलिका दहन के पहले पूरे विधि-विधान से पूजा करें। मिठाइयां, फल, और मीठे पकवान चढ़ाए, साथ ही भगवान नरसिंह की भी विधि-विधान से पूजा करें और फिर होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करें।
होली पर राहु-केतु बदलेंगे राशि
ज्योतिषाचार्य कौशिक के अनुसार होलिका दहन पर राहु और केतु ग्रह राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। हमेशा उल्टी चाल चलने वाले राहु और केतु एक राशि में 18 महीने तक रहते हैं। इसी नियम के अनुसार 17 मार्च को 18 महीने बाद वृष राशि से मेष राशि में और केतु वृश्चिक राशि से तुला राशि में गोचर करने वाले हैं। इन ग्रहों के राशि परिवर्तन का प्रभाव देश-दुनिया और सभी राशि पर पड़ेगा और पूरी दुनिया के लिए बड़े बदलाव को लेकर आएगा। इस बदलाव से भारत भी अछूता नहीं है। राहु के मेष राशि में आने से भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर खराब असर डालेगा।