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विद्यार्थियों के केयू कैंपस से बाहर आने-जाने पर पाबंदी
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में प्रवेश से पहले पूछताछ करते सुरक्षा कर्मचारी। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता देखकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में ठहरे विद्यार्थियों पर कैंपस से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही हॉस्टल में भी मास्क लगाने के साथ कोविड गाइडलाइन का पालन करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को कैंपस में भी बाहर न निकलने की हिदायत दी गई है।
वहीं हॉस्टल में रह रहे विद्यार्थियों को लॉकडाउन लगने के साथ-साथ पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता सता रही है। ज्यादातर विद्यार्थी कैंपस बंद होने के बाद से ही अपने घर लौटने लगे हैं। इसकी वजह से हॉस्टल में मेस चला रहे ठेकेदारों को भी चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि एक साल का टेंडर हुआ था। कोविड के कारण मेस छह माह तक बंद रही। नवंबर में कैंपस खुला था। अब फिर कैंपस बंद कर दिया।
हालांकि कुछ विद्यार्थी 12 जनवरी के बाद से कैंपस खुलने की उम्मीद में हॉस्टल में ठहरे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि वे नहीं चाहते की कैंपस एक दिन के लिए भी बंद हो, क्योंकि विद्यार्थी पहले ही पढ़ाई का नुकसान झेल चुके हैं, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। विद्यार्थियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी सख्ती बरते, लेकिन कैंपस बंद न करें। विश्वविद्यालय चाहे तो ऑड-ईवन क्लास की व्यवस्था करके पढ़ाई करा सकता है।
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एमए समाजशास्त्र के छात्र मनजीत का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस को 12 जनवरी तक बंद कर दिया है। साथ ही हॉस्टल में भी सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। कैंपस से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगाई गई है। वे कैंपस खुलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।
एमएससी कंप्यूटर साइंस के छात्र संजीव का कहना है कि ज्यादातर विद्यार्थियों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। विद्यार्थी कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने को भी तैयार हैं। बस विश्वविद्यालय प्रशासन कैंपस को बंद न करे, क्योंकि पहले ही उनकी पढ़ाई प्रभावित हो चुकी है।
शोधार्थी मनजीत का कहना है कि सरकार और विपक्ष रैली कर रहा है। इनकी नजर में कोविड सिर्फ विद्यार्थियों को हो रहा है। कैंपस बंद होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मजबूरन बैग पैक करके अपने घर लौटना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की हॉस्टल फीस रिफंड करे।
एमएससी कंप्यूटर साइंस के छात्र संग्राम सिंह का कहना है कि विवि प्रशासन ने कैंपस को 12 जनवरी तक बंद कर दिया। पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। प्रशासन ऑड-ईवन क्लास शुरू करें और कोविड गाइडलाइन का पालन कराए, ताकि पढ़ाई भी सुचारु रूप से चलती रहे और कोविड से भी बच्चे सुरक्षित रहे।
पुरुष छात्रावास के चीफ वार्डन डॉ. डीएस राणा का कहना है कि सभी हॉस्टल में कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। सभी हॉस्टल वार्डन को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में विद्यार्थियों को नेटवर्क संबंधित कोई परेशानी न हो, इसके लिए वाईफाई की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं, कोविड के प्रकोप को देखते हुए 24 घंटे एक एंबुलेंस मुहैया कराई गई है।
विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. सीआर जिलोवा का कहना है कि विश्वविद्यालय कैंपस में कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। हॉस्टल में ठहरे विद्यार्थियों को भी कोविड गाइडलाइन का पालन करने की हिदायत दी गई है। कैंपस में प्रवेश करने से पूर्व वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की जांच की जा रही है। बिना मास्क कैंपस में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
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कुरुक्षेत्र। ओमिक्रॉन का खतरा बढ़ता देखकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में ठहरे विद्यार्थियों पर कैंपस से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगा दी है। साथ ही हॉस्टल में भी मास्क लगाने के साथ कोविड गाइडलाइन का पालन करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को कैंपस में भी बाहर न निकलने की हिदायत दी गई है।
वहीं हॉस्टल में रह रहे विद्यार्थियों को लॉकडाउन लगने के साथ-साथ पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता सता रही है। ज्यादातर विद्यार्थी कैंपस बंद होने के बाद से ही अपने घर लौटने लगे हैं। इसकी वजह से हॉस्टल में मेस चला रहे ठेकेदारों को भी चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि एक साल का टेंडर हुआ था। कोविड के कारण मेस छह माह तक बंद रही। नवंबर में कैंपस खुला था। अब फिर कैंपस बंद कर दिया।
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हालांकि कुछ विद्यार्थी 12 जनवरी के बाद से कैंपस खुलने की उम्मीद में हॉस्टल में ठहरे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि वे नहीं चाहते की कैंपस एक दिन के लिए भी बंद हो, क्योंकि विद्यार्थी पहले ही पढ़ाई का नुकसान झेल चुके हैं, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। विद्यार्थियों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी सख्ती बरते, लेकिन कैंपस बंद न करें। विश्वविद्यालय चाहे तो ऑड-ईवन क्लास की व्यवस्था करके पढ़ाई करा सकता है।
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एमए समाजशास्त्र के छात्र मनजीत का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस को 12 जनवरी तक बंद कर दिया है। साथ ही हॉस्टल में भी सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। कैंपस से बाहर आने-जाने पर पाबंदी लगाई गई है। वे कैंपस खुलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।
एमएससी कंप्यूटर साइंस के छात्र संजीव का कहना है कि ज्यादातर विद्यार्थियों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। विद्यार्थी कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने को भी तैयार हैं। बस विश्वविद्यालय प्रशासन कैंपस को बंद न करे, क्योंकि पहले ही उनकी पढ़ाई प्रभावित हो चुकी है।
शोधार्थी मनजीत का कहना है कि सरकार और विपक्ष रैली कर रहा है। इनकी नजर में कोविड सिर्फ विद्यार्थियों को हो रहा है। कैंपस बंद होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मजबूरन बैग पैक करके अपने घर लौटना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों की हॉस्टल फीस रिफंड करे।
एमएससी कंप्यूटर साइंस के छात्र संग्राम सिंह का कहना है कि विवि प्रशासन ने कैंपस को 12 जनवरी तक बंद कर दिया। पढ़ाई का काफी नुकसान हो चुका है। प्रशासन ऑड-ईवन क्लास शुरू करें और कोविड गाइडलाइन का पालन कराए, ताकि पढ़ाई भी सुचारु रूप से चलती रहे और कोविड से भी बच्चे सुरक्षित रहे।
पुरुष छात्रावास के चीफ वार्डन डॉ. डीएस राणा का कहना है कि सभी हॉस्टल में कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। सभी हॉस्टल वार्डन को व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में विद्यार्थियों को नेटवर्क संबंधित कोई परेशानी न हो, इसके लिए वाईफाई की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं, कोविड के प्रकोप को देखते हुए 24 घंटे एक एंबुलेंस मुहैया कराई गई है।
विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी प्रो. सीआर जिलोवा का कहना है कि विश्वविद्यालय कैंपस में कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। हॉस्टल में ठहरे विद्यार्थियों को भी कोविड गाइडलाइन का पालन करने की हिदायत दी गई है। कैंपस में प्रवेश करने से पूर्व वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र की जांच की जा रही है। बिना मास्क कैंपस में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।