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Kurukshetra News: धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में महिला आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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कुरुक्षेत्र। सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल की अदालत ने धोखाधड़ी और जालसाजी के एक मामले में महिला अभियुक्त की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। महिला और उनके सह अभियुक्तों पर 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने और जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है।
जिला करनाल के लाठरो गांव के रहने वाले शिकायतकर्ता रमन कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्होंने प्रॉपर्टी डीलर दलजीत सिंह के माध्यम से सुंदरपुर काॅलोनी की रहने वाली एक महिला से 200 वर्ग गज के एक आवासीय मकान को 58 लाख पांच हजार रुपये में खरीदने का समझौता किया था। इसके लिए 11 जुलाई 2023 को एक बिक्री समझौता बनाया गया जिसमें आरोपी को 20 लाख रुपये टोकन मनी के रूप में दिए गए। बिक्री समझौते में मकान की रजिस्ट्री करवाना 11 सितंबर 2023 निर्धारित किया गया था लेकिन अभियुक्तों ने समझौते के अनुसार रजिस्ट्री नहीं करवाई और तारीख को कई बार बढ़ाया। आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने उनके जाली हस्ताक्षर करके 10 जनवरी 2024 का एक हलफनामा और 7 जून 2024 का एक सौदा रद्द करने का दस्तावेज तैयार किया।
इसके बाद मकान 14 नवंबर 2024 को किसी दूसरी महिला को बेच दिया गया। शिकायतकर्ता को महिला की ओर से दिया गया 20 लाख रुपये का चेक भी बाउंस हो गया।
महिला ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर कर कहा कि बिक्री समझौता दोनों की सहमति से रद्द किया गया था। साथ ही कहा कि शिकायतकर्ता ने स्वयं 10 जनवरी 2024 को एक हलफनामा बनवाया था और बयाना राशि प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से लौटा दी गई थी। पुलिस ने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही कब्जे में ले लिए हैं।
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हालांकि लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि महिला ने अपने पति संदीप शर्मा और सह-अभियुक्त दलजीत सिंह के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की। उन्होंने यह भी कहा कि जाली हलफनामा, रद्द करने का दस्तावेज और बकाया राशि की बरामदगी के लिए महिला की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि महिला ने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी की है। अदालत ने यह भी माना कि जाली दस्तावेजों और बकाया राशि की बरामदगी के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
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जिला करनाल के लाठरो गांव के रहने वाले शिकायतकर्ता रमन कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्होंने प्रॉपर्टी डीलर दलजीत सिंह के माध्यम से सुंदरपुर काॅलोनी की रहने वाली एक महिला से 200 वर्ग गज के एक आवासीय मकान को 58 लाख पांच हजार रुपये में खरीदने का समझौता किया था। इसके लिए 11 जुलाई 2023 को एक बिक्री समझौता बनाया गया जिसमें आरोपी को 20 लाख रुपये टोकन मनी के रूप में दिए गए। बिक्री समझौते में मकान की रजिस्ट्री करवाना 11 सितंबर 2023 निर्धारित किया गया था लेकिन अभियुक्तों ने समझौते के अनुसार रजिस्ट्री नहीं करवाई और तारीख को कई बार बढ़ाया। आरोप लगाया कि अभियुक्तों ने उनके जाली हस्ताक्षर करके 10 जनवरी 2024 का एक हलफनामा और 7 जून 2024 का एक सौदा रद्द करने का दस्तावेज तैयार किया।
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इसके बाद मकान 14 नवंबर 2024 को किसी दूसरी महिला को बेच दिया गया। शिकायतकर्ता को महिला की ओर से दिया गया 20 लाख रुपये का चेक भी बाउंस हो गया।
महिला ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर कर कहा कि बिक्री समझौता दोनों की सहमति से रद्द किया गया था। साथ ही कहा कि शिकायतकर्ता ने स्वयं 10 जनवरी 2024 को एक हलफनामा बनवाया था और बयाना राशि प्रॉपर्टी डीलर के माध्यम से लौटा दी गई थी। पुलिस ने सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही कब्जे में ले लिए हैं।
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हालांकि लोक अभियोजक ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि महिला ने अपने पति संदीप शर्मा और सह-अभियुक्त दलजीत सिंह के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की। उन्होंने यह भी कहा कि जाली हलफनामा, रद्द करने का दस्तावेज और बकाया राशि की बरामदगी के लिए महिला की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
न्यायाधीश दिनेश कुमार मित्तल ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि महिला ने सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी की है। अदालत ने यह भी माना कि जाली दस्तावेजों और बकाया राशि की बरामदगी के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।