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Kurukshetra News: बजट में आयुर्वेदिक एम्स की घोषणा, आयुष शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती
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करुक्षेत्र। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान।
- फोटो : अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के कूरेभार चौराहे से साइकिल पर दूध लेकर जाता दूधिया। संवाद
कुरुक्षेत्र। केंद्र सरकार ने बजट प्रस्तुत करते हुए देशभर में तीन आयुर्वेदिक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने की घोषणा की है। इस घोषणा को आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस फैसले से न केवल आयुर्वेद को देश की मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था में और मजबूती मिलेगी बल्कि इसे वैश्विक पहचान भी प्राप्त होगी।
सरकार के इस निर्णय पर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान सहित विश्वविद्यालय से जुड़े आयुर्वेदाचार्यों और विशेषज्ञों ने प्रसन्नता व्यक्त की और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। आयुर्वेदिक एम्स की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही उच्चस्तरीय आयुर्वेदिक शिक्षा, शोध आधारित अध्ययन और क्लीनिकल प्रशिक्षण को नई दिशा मिलेगी। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और चिकित्सकों को बेहतर संसाधन, आधुनिक सुविधाएं और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
आयुर्वेद मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था में मजबूती से होगा स्थापित
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय आयुर्वेद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। आयुर्वेदिक एम्स की स्थापना से आयुर्वेद मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था में मजबूती से स्थापित होगा और उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा व शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। आयुर्वेद की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक आधार के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा। आमजन को भी उन्नत आयुर्वेदिक उपचार एक ही परिसर में सुलभ होंगे जिससे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
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आयुष प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बजट में आयुर्वेदिक एम्स की घोषणा यह दर्शाती है कि सरकार आयुष प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इससे संस्थानों को सहयोग, संसाधन और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
शिक्षा और शोध को नई दिशा
आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य आशीष मेहता ने इसे आयुर्वेदिक शिक्षा के लिए मील का पत्थर बताया। उनके अनुसार एम्स के माध्यम से शोध आधारित शिक्षा, क्लीनिकल प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी।
आमजन को मिलेगा लाभ
आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं पंचकर्म विभाग के प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि आयुर्वेदिक एम्स खुलने से आम लोगों को एक ही छत के नीचे उन्नत आयुर्वेदिक उपचार उपलब्ध होंगे और आयुर्वेद की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा।
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सरकार के इस निर्णय पर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान सहित विश्वविद्यालय से जुड़े आयुर्वेदाचार्यों और विशेषज्ञों ने प्रसन्नता व्यक्त की और केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह पहल आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। आयुर्वेदिक एम्स की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा। साथ ही उच्चस्तरीय आयुर्वेदिक शिक्षा, शोध आधारित अध्ययन और क्लीनिकल प्रशिक्षण को नई दिशा मिलेगी। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और चिकित्सकों को बेहतर संसाधन, आधुनिक सुविधाएं और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
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आयुर्वेद मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था में मजबूती से होगा स्थापित
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय आयुर्वेद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। आयुर्वेदिक एम्स की स्थापना से आयुर्वेद मुख्यधारा की स्वास्थ्य व्यवस्था में मजबूती से स्थापित होगा और उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा व शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। आयुर्वेद की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक आधार के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा। आमजन को भी उन्नत आयुर्वेदिक उपचार एक ही परिसर में सुलभ होंगे जिससे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।
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आयुष प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध
कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि बजट में आयुर्वेदिक एम्स की घोषणा यह दर्शाती है कि सरकार आयुष प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इससे संस्थानों को सहयोग, संसाधन और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
शिक्षा और शोध को नई दिशा
आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य आशीष मेहता ने इसे आयुर्वेदिक शिक्षा के लिए मील का पत्थर बताया। उनके अनुसार एम्स के माध्यम से शोध आधारित शिक्षा, क्लीनिकल प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी।
आमजन को मिलेगा लाभ
आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं पंचकर्म विभाग के प्रो. राजा सिंगला ने कहा कि आयुर्वेदिक एम्स खुलने से आम लोगों को एक ही छत के नीचे उन्नत आयुर्वेदिक उपचार उपलब्ध होंगे और आयुर्वेद की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया जा सकेगा।

करुक्षेत्र। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान।- फोटो : अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के कूरेभार चौराहे से साइकिल पर दूध लेकर जाता दूधिया। संवाद

करुक्षेत्र। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान।- फोटो : अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के कूरेभार चौराहे से साइकिल पर दूध लेकर जाता दूधिया। संवाद

करुक्षेत्र। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान।- फोटो : अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के कूरेभार चौराहे से साइकिल पर दूध लेकर जाता दूधिया। संवाद

करुक्षेत्र। कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान।- फोटो : अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के कूरेभार चौराहे से साइकिल पर दूध लेकर जाता दूधिया। संवाद