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Kurukshetra News: हौसले के पांवों पर खड़ा हुआ पैरों से 75 फीसदी दिव्यांग अवनीश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Sep 2023 02:48 AM IST
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Avneesh, 75 percent handicapped, stood on his feet with courage.
कुरुक्षेत्र। 75 फीसदी दिव्यांगता लेकिन हौसला पहाड़ जैसा। इसके चलते अपनी पढ़ाई में इस शारीरिक अक्षमता को आड़े नहीं आने दिया। जब नौकरी मिली तो सफलता पर चेहरा खिल उठा। साबित कर दिया कि शारीरिक क्षमता भले ही कितनी भी क्यों न हो, हौसले मजबूत हो तो सफलता कदम चूमती है। ऐसा ही एहसास कराया यमुनानगर निवासी अवनीश ने।
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मौका था राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान में आयोजित रोजगार मेले का। यहां अवनीश दिव्यांगता के साथ उनके हौसले से हर कोई हैरान था। उन्हें मेले में पोस्ट ऑफिस में बीपीएम पद पर नौकरी मिली, जिसका नियुक्ति पत्र मंच से नीचे आकर मुख्यातिथि केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान व थानेसर विधायक सुभाष सुधा ने दिया। यह देख न कोई हैरान था बल्कि उसके हौसले को भी सलाम करता दिखाई दिया।
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केंद्रीय राज्यमंत्री ने भी उनके इस जज्बे की जमकर सराहना की तो वही अवनीश ने भी साबित कर दिया कि वह भले ही 75 फीसदी दिव्यांग है, लेकिन अपने परिवार पर बोझ नहीं है। अवनीश कुमार की फिलहाल योग्यता 12वीं है और अभी बीए प्रथम वर्ष में यमुनानगर के कॉलेज से पढ़ाई कर रहा हैं।
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उसे नियुक्ति मिली तो परिजनों की भी आंखें भर आईं और कहा कि उन्हें अपने बेटे के हौंसले, कड़ी मेहनत पर पहले से ही गर्व है। पढ़ाई में उनकी रूचि के चलते वे हमेशा उसका हर कदम पर साथ देते रहे तो उसने भी साबित कर दिया कि वह इतनी दिव्यांगता के बावजूद भी परिवार पर बोझ नहीं हो सकता। हालांकि इनकी नियुक्ति अंबाला हुई है जो कि बिलासपुर से 30 मिनट का रास्ता है।

माता-पिता और शिक्षकों को समर्पित की कामयाबी : अवनीश
अवनीश कुमार का कहना है कि कामयाबी का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को देता हूं जिनकी मेहनत से सफलता हासिल हुई है। इनका कहना है कि नौकरी के साथ-साथ अपनी शिक्षा भी जारी रखूंगा और शिक्षित होकर परिवार का नाम रोशन करूंगा।


बच्चों की सफलता ही मेरी कामयाबी है : कृष्ण
अवनीश के पिता कृष्ण कुमार वैल्डिंग का काम करते है और इसका एक भाई व बहन है, वो भी पढ रहे हैं। कृष्ण कुमार संधाेय गांव के रहने वाले थे जो कि बच्चों कि शिक्षा के लिए बिलासपुर शहर में आए कि बच्चों काे हर प्रकार की सुविधा मिल सके और शिक्षा में किसी तरह की कोई बाधा ना आए।अवनीश के पिता के सिर पूरे घर और बच्चों की पढाई का जिम्मा है, जिसमें वह सफल हुए। उनका कहना है कि बच्चों की सफलता ही मेरी कामयाबी है।
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