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Kurukshetra News: रत्नावली उत्सव के लिए 14 को तीन स्थानों पर होंगे ऑडिशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Oct 2025 02:34 AM IST
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Auditions for Ratnavali festival will be held on 14th at three places.
कुरुक्षेत्र। कुवि का श्रीकृष्ण द्वार।
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में इस माह सांस्कृतिक माहौल का रंग बिखरने वाला है। रत्नावली उत्सव का आयोजन 28 से 31 अक्तूबर तक किया जाएगा। चार दिवसीय महोत्सव में छात्र-छात्राएं अपनी कला, संस्कृति, नृत्य, संगीत, नाटक और चित्रकला जैसी विविध प्रतिभाओं का प्रदर्शन करेंगे।
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महोत्सव के लिए यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी), यूआईईटी, आईटीटीआर और आईआईएचएस के विद्यार्थियों के लिए टीम चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक विद्यार्थी जिनकी आयु 25 वर्ष से कम है, वे अपने-अपने क्षेत्र की प्रस्तुतियों के लिए ऑडिशन में भाग ले सकते हैं। नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के लिए ऑडिशन कम्युनिटी सेंटर में 14 अक्तूबर को सुबह 10 बजे से होंगे। इन कार्यक्रमों के संयोजक डॉ. हरविंदर सिंह (संगीत एवं नृत्य विभाग) और डॉ. मीनाक्षी सुहाग (पर्यावरण अध्ययन संस्थान) रहेंगे।
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संगीत से संबंधित प्रस्तुतियों के लिए ऑडिशन संगीत एवं नृत्य विभाग में 14 को सुबह 10 बजे से होंगे जिसकी देखरेख डॉ. अशोक कुमार करेंगे। वहीं ललित कला (फाइन आर्ट्स) से जुड़े विद्यार्थी अपने ऑडिशन फाइन आर्ट्स विभाग में उसी दिन दे सकते हैं। इनका संयोजन डॉ. गुरचरण सिंह करेंगे। महोत्सव के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग, हॉस्टल और सांस्कृतिक समितियां सक्रिय रूप से तैयारी में जुटी हैं।
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आई-कार्ड अनिवार्य, बिना पहचान पत्र प्रवेश नहीं

सांस्कृतिक गतिविधियों की इंचार्ज डॉ. मीनाक्षी सुहाग ने बताया कि ऑडिशन व चयन प्रक्रिया में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को अपना विश्वविद्यालय आई-कार्ड साथ लाना अनिवार्य होगा। बिना पहचान पत्र के किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। रत्नावली उत्सव कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का सबसे लोकप्रिय सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। इस आयोजन के माध्यम से हर वर्ष विद्यार्थी हरियाणा की लोक संस्कृति, नृत्य, गीत-संगीत और नाट्य परंपराओं को जीवंत करते हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देना और उनमें टीम भावना व नेतृत्व क्षमता का विकास करना है।

कुरुक्षेत्र। कुवि का श्रीकृष्ण द्वार।

कुरुक्षेत्र। कुवि का श्रीकृष्ण द्वार।

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