फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Artists brought alive the story of Birsa Munda's struggle, courage and the Ulgulan revolution at the Aajeevika Saras Mela.

Kurukshetra News: आजीविका सरस मेले में कलाकारों ने बिरसा मुंडा के संघर्ष, साहस और उलगुलान क्रांति की कथा को किया जीवंत

Mon, 17 Nov 2025 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र Updated Mon, 17 Nov 2025 12:40 AM IST
विज्ञापन
Artists brought alive the story of Birsa Munda's struggle, courage and the Ulgulan revolution at the Aajeevika Saras Mela.
कुरुक्षेत्र। नाटक का मंचन करते कलाकार। स्वयं
कुरुक्षेत्र। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को देशभर में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धरोहर और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया जा सके। इसी कड़ी में पंचकूला के सेक्टर-पांच में चल रहे आजीविका सरस मेले में भगवान बिरसा की जयंती के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा नाटक का मंचन किया गया।
विज्ञापन




यह प्रस्तुति कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सौजन्य से विकास शर्मा के निर्देशन में कुरुक्षेत्र के न्यू उत्थान थिएटर ग्रुप की ओर से की गई। नाटक में झारखंड के मुंडा समुदाय में भगवान की तरह पूजे जाने वाले बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष, त्याग और क्रांति की यात्रा को दर्शाया गया। शुरुआत में दिखाया गया कि जन्म के बाद बिरसा अपने मामा के गांव चले जाते हैं, जहां वे ईसाई धर्म प्रचारकों के संपर्क में आते हैं लेकिन मुंडा समुदाय को जबरन धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशों को देखकर बिरसा विरोध जताते हैं और ईसाई धर्म त्याग देते हैं।
विज्ञापन




इसी बीच परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर बिरसा नौकरी के लिए कंदेर गांव चले जाते हैं। वहां उनकी मुलाकात आनंद पंडा से होती है, जो उन्हें हिंदू धर्म और संस्कृति के बारे में बताते हैं। इसके बाद बिरसा अपने गांव लौटकर मुंडा समुदाय को जागरूक करते हैं और अंग्रेजों व जबरन धर्मांतरण के खिलाफ उलगुलान क्रांति की नींव रखते हैं। बिरसा के बढ़ते प्रभाव से ब्रिटिश सरकार घबरा जाती है और उन्हें साथियों सहित जेल में डाल देती है, हालांकि कुछ समय बाद रिहा कर दिया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन




रिहाई के बाद बिरसा डोंबारी पर्वत पर डेरा डालकर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन जारी रखते हैं लेकिन समुदाय के ही कुछ लोगों की मुखबरी के कारण अंग्रेज उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लेते हैं। रांची जेल में ही बिरसा की मृत्यु हो जाती है लेकिन उनका संघर्ष आज भी आदिवासी अस्मिता और आजादी की प्रेरणा बना हुआ है। नाटक में बिरसा का मुख्य किरदार राजीव कुमार ने निभाया और अन्य भूमिकाओं में गौरव दीपक जांगड़ा सहित अन्य कलाकार रहे। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावुक और प्रेरित किया।

कुरुक्षेत्र। नाटक का मंचन करते कलाकार। स्वयं

कुरुक्षेत्र। नाटक का मंचन करते कलाकार। स्वयं

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed