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Kurukshetra News: अनाजमंडियों में सूरजमुखी की आवक जोरों पर
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कुरुक्षेत्र/बाबैन/इस्माईलाबाद। अनाजमंडियों में सूरजमुखी की आवक जोरों पर है, लेकिन खरीद न होने से किसानों में मायूसी छाई हुई है। अधिकतर किसान भावांतर योजना के तहत फसल बेचने को तैयार नहीं है। हालांकि पहले दो दिन कुछ किसानों ने फसल बेची, लेकिन शाहाबाद में हुए लाठीचार्ज के बाद अधिकतर किसानों ने इस योजना के तहत फसल बेचने से इंकार कर दिया है। जिला में पांच मंडियों में सूरजमुखी की खरीद शुरू की गई थी और हर जगह ही ऐसे ही हालात बने हैं। वीरवार को बाबैन व इस्माईलाबाद में खरीद शून्य रही जबकि शाहाबाद में भी महज दो एमटी खरीद हुई। वहीं थानेसर में भी दस एमटी से ही कम खरीद हुई।
इस्माईलाबाद में हालांकि बुधवार को करीब 25 क्विंटल सूरजमुखी की खरीद भावांतर योजना के तहत की गई थी, लेकिन वीरवार को आवक जोरों पर होने के बावजूद एक भी किसान ने भावांतर योजना के तहत अपनी सूरजमुखी की फसल हो नहीं बेचा और खरीद का कार्य पूरी तरह से बंद रहा। किसान सूरजमुखी को सरकारी समर्थन मूल्य पर एजेंसियों द्वारा खरीदने की मांग पर अड़े हैं।
किसान संजीव कुमार, विष्णुदत्त, रमेश, अनिल आदि ने बताया कि सरकार खुद समर्थन मूल्य तय करती है और बाद में फसल मंडियों में आने पर खरीद से पीछे हट रही है, जिससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। किसानों को अगली फसल की रोपाई के लिए तैयारियां भी करनी है। किसानों ने कहा कि किसानों को अपनी प्रत्येक फसल को मंडी में बेचने के लिए सड़कों पर आना पड़ता है। किसानों पर मुकदमें दर्ज करना भी गलत है। मंडी में मक्के की आवक भी जाेरों पर है। मक्का भी पिछले वर्ष की अपेक्षा कम दाम पर बिक रहा है। इस वर्ष मक्के की निकासी भी कम है। किसानों पर चारों तरफ से मार पड़ रही है।
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किसान फसल बेचने को तैयार नहीं : मैनेजर
हैफड के मैनेजर गुरदेव सिंह का कहना है कि भावांतर योजना के तहत सूरजमुखी की खरीद को लेकर एजेंसियों ने सभी तैयारियां की हुई है, लेकिन कोई भी किसान निजी तौर पर सूरजमुखी की फसल को बेचने को तैयार नहीं है। सभी किसान समर्थन मूल्य पर बिक्री का इंतजार कर रहे हैं।
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लिफ्टिंग एक एमटी की भी नहीं हो पाई
अभी तक पांचों मंडियों में 38 एमटी से ज्यादा सूरजमुखी की खरीद की जा चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा थानेसर अनाजमंडी में 18.80 एमटी खरीद की गई तो वहीं सबसे कम बाबैन में दो एमटी रही है। लेकिन एजेंसी आज तक खरीद की गई सूरजमुखी का उठान भी शुरू नहीं कर पाई है।
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इस्माईलाबाद में हालांकि बुधवार को करीब 25 क्विंटल सूरजमुखी की खरीद भावांतर योजना के तहत की गई थी, लेकिन वीरवार को आवक जोरों पर होने के बावजूद एक भी किसान ने भावांतर योजना के तहत अपनी सूरजमुखी की फसल हो नहीं बेचा और खरीद का कार्य पूरी तरह से बंद रहा। किसान सूरजमुखी को सरकारी समर्थन मूल्य पर एजेंसियों द्वारा खरीदने की मांग पर अड़े हैं।
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किसान संजीव कुमार, विष्णुदत्त, रमेश, अनिल आदि ने बताया कि सरकार खुद समर्थन मूल्य तय करती है और बाद में फसल मंडियों में आने पर खरीद से पीछे हट रही है, जिससे किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। किसानों को अगली फसल की रोपाई के लिए तैयारियां भी करनी है। किसानों ने कहा कि किसानों को अपनी प्रत्येक फसल को मंडी में बेचने के लिए सड़कों पर आना पड़ता है। किसानों पर मुकदमें दर्ज करना भी गलत है। मंडी में मक्के की आवक भी जाेरों पर है। मक्का भी पिछले वर्ष की अपेक्षा कम दाम पर बिक रहा है। इस वर्ष मक्के की निकासी भी कम है। किसानों पर चारों तरफ से मार पड़ रही है।
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किसान फसल बेचने को तैयार नहीं : मैनेजर
हैफड के मैनेजर गुरदेव सिंह का कहना है कि भावांतर योजना के तहत सूरजमुखी की खरीद को लेकर एजेंसियों ने सभी तैयारियां की हुई है, लेकिन कोई भी किसान निजी तौर पर सूरजमुखी की फसल को बेचने को तैयार नहीं है। सभी किसान समर्थन मूल्य पर बिक्री का इंतजार कर रहे हैं।
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लिफ्टिंग एक एमटी की भी नहीं हो पाई
अभी तक पांचों मंडियों में 38 एमटी से ज्यादा सूरजमुखी की खरीद की जा चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा थानेसर अनाजमंडी में 18.80 एमटी खरीद की गई तो वहीं सबसे कम बाबैन में दो एमटी रही है। लेकिन एजेंसी आज तक खरीद की गई सूरजमुखी का उठान भी शुरू नहीं कर पाई है।