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Kurukshetra News: आढ़ती की 4.45 लाख की वसूली का मुकदमा खारिज, अदालत ने दावे में पाया विरोधाभास
Sat, 20 Dec 2025 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 20 Dec 2025 01:48 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) दविंदर की अदालत ने न्यू ग्रेन मार्केट के कमीशन एजेंट एमएस इशाम सिंह एंड संस की ओर से दायर 4,45,148 रुपये की वसूली के मुकदमे को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि मुद्दई आढ़ती ने बही खाते का पूरा रिकॉर्ड पेश नहीं किया है व बही खाते में दर्ज प्रविष्टियों में गंभीर विरोधाभास हैं और दावा साबित करने में असफल रहा।
मुकदमा 11 दिसंबर 2017 को दायर किया गया था। मुद्दई इशाम सिंह ने आरोप लगाया कि गांव उनिसपुर निवासी महिंदर सिंह, बलवान सिंह और उनके पिता देश राज उनकी आढ़त फर्म के ग्राहक थे। उन्होंने कृषि व घरेलू जरूरतों के लिए एडवांस राशि ली और 12 दिसंबर 2014 को 2,77,700 रुपये बकाया स्वीकार किया। बाद में कुछ और राशि और लेने के बाद कुल 4.45 लाख रुपये ब्याज सहित बकाया बताया गया।
आरोपियों ने बचाव में कहा कि केवल महिंदर सिंह ग्राहक था, अन्य दो अलग रहते हैं और उनका कोई लेन-देन नहीं। बही खाते फर्जी हैं और हस्ताक्षर खाली कागजों पर लिए गए हैं। अदालत ने पाया कि मुद्दई ने रोशनामचा (प्राथमिक खाता) पेश नहीं किया, जबकि रोकड़ बही और लेजर में एंट्रीज आपस में विरोधाभासी हैं। 12 दिसंबर 2014 को एक में 2.77 लाख तो दूसरे में 6.56 लाख बकाया दिखाया गया। पुराने रिकॉर्ड के गायब होने का दावा भी संदिग्ध पाया गया। गवाह मुनीम की नियुक्ति भी साबित नहीं हुई। इसलिए मुख्य मुद्दा मुद्दई के खिलाफ गया। अदालत ने कहा कि मुद्दई ने सामग्री तथ्य छिपाए और मुकदमा अपने आचरण से वंचित करने योग्य है। मुकदमा लागत सहित खारिज कर दिया गया।
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कुरुक्षेत्र। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) दविंदर की अदालत ने न्यू ग्रेन मार्केट के कमीशन एजेंट एमएस इशाम सिंह एंड संस की ओर से दायर 4,45,148 रुपये की वसूली के मुकदमे को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि मुद्दई आढ़ती ने बही खाते का पूरा रिकॉर्ड पेश नहीं किया है व बही खाते में दर्ज प्रविष्टियों में गंभीर विरोधाभास हैं और दावा साबित करने में असफल रहा।
मुकदमा 11 दिसंबर 2017 को दायर किया गया था। मुद्दई इशाम सिंह ने आरोप लगाया कि गांव उनिसपुर निवासी महिंदर सिंह, बलवान सिंह और उनके पिता देश राज उनकी आढ़त फर्म के ग्राहक थे। उन्होंने कृषि व घरेलू जरूरतों के लिए एडवांस राशि ली और 12 दिसंबर 2014 को 2,77,700 रुपये बकाया स्वीकार किया। बाद में कुछ और राशि और लेने के बाद कुल 4.45 लाख रुपये ब्याज सहित बकाया बताया गया।
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आरोपियों ने बचाव में कहा कि केवल महिंदर सिंह ग्राहक था, अन्य दो अलग रहते हैं और उनका कोई लेन-देन नहीं। बही खाते फर्जी हैं और हस्ताक्षर खाली कागजों पर लिए गए हैं। अदालत ने पाया कि मुद्दई ने रोशनामचा (प्राथमिक खाता) पेश नहीं किया, जबकि रोकड़ बही और लेजर में एंट्रीज आपस में विरोधाभासी हैं। 12 दिसंबर 2014 को एक में 2.77 लाख तो दूसरे में 6.56 लाख बकाया दिखाया गया। पुराने रिकॉर्ड के गायब होने का दावा भी संदिग्ध पाया गया। गवाह मुनीम की नियुक्ति भी साबित नहीं हुई। इसलिए मुख्य मुद्दा मुद्दई के खिलाफ गया। अदालत ने कहा कि मुद्दई ने सामग्री तथ्य छिपाए और मुकदमा अपने आचरण से वंचित करने योग्य है। मुकदमा लागत सहित खारिज कर दिया गया।
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