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Kurukshetra News: फुहारों के बीच शिवभक्ति में लीन धर्मनगरी
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कुरुक्षेत्र। सावन के दूसरे सोमवार और एकादशी के पावन संयोग पर धर्मनगरी शिवभक्ति में डूबी नजर आई। सुबह सात बजे से हो रही रिमझिम फुहारों के बीच शिवभक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी। हल्की बूंदाबांदी के बावजूद कांवड़ यात्रा में शामिल सैकड़ों शिवभक्त बोल बम के जयघोष के साथ नगर की सड़कों से गुजरते रहे। भक्ति, आस्था और सेवा की त्रिवेणी हर दिशा में नजर आई।
बारिश की फुहारें भी कांवड़ियों के उत्साह को कम न कर सकीं। कंधों पर कांवड़ उठाए, भगवा वस्त्रों में लिपटे हुए शिवभक्त जयकारों लगाते हुए चल रहे थे। जगह-जगह लगाए गए शिविरों में कांवड़ियों की सेवा का आयोजकों में उत्साह देखते ही बन रहा था। शिविरों में भजन-कीर्तन की गूंज और शिव भक्ति में झूमते श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखे। सावन के दूसरे सोमवार और एकादशी एक साथ पड़ने पर अल सुबह से ही मंदिरों में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। स्थानेश्वर महादेव, कालेश्वर महादेव, प्राचीन दुखभंजन मंदिर, शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर समेत प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे और विशेष पूजन किया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पूजा सामग्री लेकर मंदिरों की ओर जाती दिखीं। हर हर महादेव के नारों से वातावरण शिवमय हो गया।
कावड़ यात्रा मार्ग पर कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा सेवा शिविर लगाए गए। कहीं शरबत और जल सेवा, तो कहीं भोजन और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई है। कांवड़ियों की श्रद्धा और शिविरों में सेवा भाव ने धर्मनगरी की फिजा को पूरी तरह शिवमय कर दिया।
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बारिश की फुहारें भी कांवड़ियों के उत्साह को कम न कर सकीं। कंधों पर कांवड़ उठाए, भगवा वस्त्रों में लिपटे हुए शिवभक्त जयकारों लगाते हुए चल रहे थे। जगह-जगह लगाए गए शिविरों में कांवड़ियों की सेवा का आयोजकों में उत्साह देखते ही बन रहा था। शिविरों में भजन-कीर्तन की गूंज और शिव भक्ति में झूमते श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखे। सावन के दूसरे सोमवार और एकादशी एक साथ पड़ने पर अल सुबह से ही मंदिरों में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रहीं। स्थानेश्वर महादेव, कालेश्वर महादेव, प्राचीन दुखभंजन मंदिर, शक्तिपीठ मां भद्रकाली मंदिर समेत प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचे और विशेष पूजन किया। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पूजा सामग्री लेकर मंदिरों की ओर जाती दिखीं। हर हर महादेव के नारों से वातावरण शिवमय हो गया।
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कावड़ यात्रा मार्ग पर कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा सेवा शिविर लगाए गए। कहीं शरबत और जल सेवा, तो कहीं भोजन और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की गई है। कांवड़ियों की श्रद्धा और शिविरों में सेवा भाव ने धर्मनगरी की फिजा को पूरी तरह शिवमय कर दिया।
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