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शराब की खरीद में जीएसटी के नाम पर करोड़ों का घोटाला
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भाजपा सरकार भले ही जीरो टोलरेंस के दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे विपरीत यह है क्योंकि सरकारी विभागों में नित नये घोटाले उजागर हो रहे हैं। ताजा मामला जीएसटी घोटाले का है, जिसमें अलग-अलग नाम की फर्मों से खरीद फरोख्त कर फर्जीवाड़ा कर जीएसटी के नाम पर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया गया है। लॉकडाउन में शराब माफिया पर मेहरबान रहने के आरोपों वाले कराधान विभाग के जुड़वा भाई आबकारी (सेल्सटैक्स) विभाग का अब तक का कुरुक्षेत्र जिले का सबसे बड़ा जीएसटी घोटाला सामने आया है, जिसकी रिपोर्ट भी आला अधिकारियों के पास जमा हो चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को 67 करोड़ से ज्यादा का जीएसटी का चूना लगाया है, जिसकी अगर गहन पड़ताल की जाए तो ये राशि इससे भी कई गुना अधिक हो जाएगी। हालांकि इस घोटाले की रिपोर्ट जुलाई 2019 में आला अधिकारियों के पास जमा हो चुकी है, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी विभाग के आला अधिकारी रिपोर्ट पर कुंडली मारे बैठे हैं। बता दें कि जीएसटी घोटाले के आरोप एक उद्योगपति कांग्रेसी नेता की फर्म पर है। रिपोर्ट में उल्लेख है की फर्जीवाड़े का खेल एक चार्टेड अकाउंटेंट ने अपने दिमाग से खेला है, जिसका इस रिपोर्ट में हवाला है इस मास्टरमाइंड चार्टेड अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल उठाये गए हैं।
जुलाई 2019 में जांच रिपोर्ट जमा करवाई
जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी ने 19 जुलाई को 2019 को अपनी जांच रिपोर्ट जमा करवा दी थी, जिसके बाद आरोपी की फर्म में चेकिंग भी की गयी थी रिकार्ड और स्टॉक भी सील कर दिया लेकिन विभाग ज्यादा कुछ भी बताने से बच रहा है क्योंकि मामला हाईप्रोफाइल है। चेकिंग के दौरान विभाग ने गाड़ी चेकिंग के लिए रोकी थी जब उसका ई वे बिल चेक किया तो जांच अधिकारी को शक हुआ उसने जब ऑनलाइन चेक किया तो बिल फर्जी निकला यही बताया जाता है की विभाग ने जब बिल काटने वाली फर्म का ऑफिस चेक किया तो वहा कोई फर्म नहीं थी जहां से कड़ी जुड़ती गई।
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चारों फर्में फर्जी
रिपोट के मुताबिक कैथल की चार फर्मों की भी जन्मपत्री भी इस इमानदार अधिकारी द्वारा खंगाली गई, जिसमें पाया की यह चारों फर्में फर्जी हैं। बताया जाता है की हार न मानते हुए इनके द्वारा दिए गए पते देखे तो वहां कोई इस नाम से फर्में नहीं थीं। यही नहीं रिपोर्ट में उल्लेख है की जिन लोगों के नाम से फर्म बनी हुई थी उनके जीएसटी पासवर्ड बैंक के खाते चार्टेड अकाउंटेंट इस्तेमाल कर रहा था जिसका शपथ पत्र इन लोगों द्वारा विभाग को दिया गया है यही नहीं रिपोर्ट में उल्लेख है की चार्टेड अकाउंटेंट के पास ब्लैंक चेक भी है। रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने जिन फर्मों की चेकिंग की गयी है उनमें 450 करोड़ के बिलों की चेकिंग की गयी है, जिसमें से 82 प्रतिशत बिल फर्जी पाए गए हैं। अगर सभी बिल चेक हो जाए तो यह बिल एक हजार करोड़ से ज्यादा के होंगे
जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस केस के बारे में जब जिला उप आबकारी कराधान अधिकारी पवन चौधरी से विभाग का पक्ष जानना चाहा तो वो कहते हैं की विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा जांच जारी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक सरकार को 67 करोड़ से ज्यादा का जीएसटी का चूना लगाया है, जिसकी अगर गहन पड़ताल की जाए तो ये राशि इससे भी कई गुना अधिक हो जाएगी। हालांकि इस घोटाले की रिपोर्ट जुलाई 2019 में आला अधिकारियों के पास जमा हो चुकी है, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी विभाग के आला अधिकारी रिपोर्ट पर कुंडली मारे बैठे हैं। बता दें कि जीएसटी घोटाले के आरोप एक उद्योगपति कांग्रेसी नेता की फर्म पर है। रिपोर्ट में उल्लेख है की फर्जीवाड़े का खेल एक चार्टेड अकाउंटेंट ने अपने दिमाग से खेला है, जिसका इस रिपोर्ट में हवाला है इस मास्टरमाइंड चार्टेड अकाउंटेंट की भूमिका पर भी सवाल उठाये गए हैं।
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जुलाई 2019 में जांच रिपोर्ट जमा करवाई
जानकारी के अनुसार जांच अधिकारी ने 19 जुलाई को 2019 को अपनी जांच रिपोर्ट जमा करवा दी थी, जिसके बाद आरोपी की फर्म में चेकिंग भी की गयी थी रिकार्ड और स्टॉक भी सील कर दिया लेकिन विभाग ज्यादा कुछ भी बताने से बच रहा है क्योंकि मामला हाईप्रोफाइल है। चेकिंग के दौरान विभाग ने गाड़ी चेकिंग के लिए रोकी थी जब उसका ई वे बिल चेक किया तो जांच अधिकारी को शक हुआ उसने जब ऑनलाइन चेक किया तो बिल फर्जी निकला यही बताया जाता है की विभाग ने जब बिल काटने वाली फर्म का ऑफिस चेक किया तो वहा कोई फर्म नहीं थी जहां से कड़ी जुड़ती गई।
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चारों फर्में फर्जी
रिपोट के मुताबिक कैथल की चार फर्मों की भी जन्मपत्री भी इस इमानदार अधिकारी द्वारा खंगाली गई, जिसमें पाया की यह चारों फर्में फर्जी हैं। बताया जाता है की हार न मानते हुए इनके द्वारा दिए गए पते देखे तो वहां कोई इस नाम से फर्में नहीं थीं। यही नहीं रिपोर्ट में उल्लेख है की जिन लोगों के नाम से फर्म बनी हुई थी उनके जीएसटी पासवर्ड बैंक के खाते चार्टेड अकाउंटेंट इस्तेमाल कर रहा था जिसका शपथ पत्र इन लोगों द्वारा विभाग को दिया गया है यही नहीं रिपोर्ट में उल्लेख है की चार्टेड अकाउंटेंट के पास ब्लैंक चेक भी है। रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने जिन फर्मों की चेकिंग की गयी है उनमें 450 करोड़ के बिलों की चेकिंग की गयी है, जिसमें से 82 प्रतिशत बिल फर्जी पाए गए हैं। अगर सभी बिल चेक हो जाए तो यह बिल एक हजार करोड़ से ज्यादा के होंगे
जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस केस के बारे में जब जिला उप आबकारी कराधान अधिकारी पवन चौधरी से विभाग का पक्ष जानना चाहा तो वो कहते हैं की विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा जांच जारी है।