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भारत की सबसे दूरदर्शी महिला शासकों में से थी अहिल्याबाई होल्कर : डॉ. ममता सचदेवा
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कुरुक्षेत्र। संगोष्ठी को संबोधित करती भारत विकास परिषद की अध्यक्ष डॉ. ममता सचदेवा। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। राजकीय महिला महाविद्यालय पलवल में भारत विकास परिषद, मैत्रेयी शाखा कुरुक्षेत्र के सहयोग में पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यातिथि मैत्रेयी शाखा, भारत विकास परिषद की अध्यक्ष डॉ. ममता सचदेवा रही। कॉलेज परिसर में चार पौधे रोपित किए गए।
उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर के शासन में न्याय, मर्यादा एवं लोक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जो आज भी शासन-प्रशासन के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्हें भारत की सबसे दूरदर्शी महिला शासकों में से एक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में, उन्होंने धर्म का संदेश फैलाने में और औद्योगीकरण के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था।
उन्होंने अहिल्याबाई के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उन्हें राजधर्म, सेवा और समाज सुधार की सजीव मूर्ति बताया। डॉ. नीलम ढांडा ने अहिल्याबाई की न्यायप्रियता, धर्मनिष्ठा एवं जनसेवा को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता डॉ. सीमा पांडेय ने पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, शासन प्रणाली, सामाजिक सुधारों एवं महिलाओं के उत्थान हेतु किए गए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. मोनिका ने अहिल्याबाई के कालखंड में पर्यावरणीय सततता एवं भारतीय स्थापत्य धरोहर पर केंद्रित विचार प्रस्तुत किए। डॉ. सतबीर ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर का नेतृत्व एक उदाहरण है कि किस प्रकार संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और नैतिक मूल्यों के साथ सशक्त प्रशासन किया जा सकता है। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्य डॉ. गगनदीप कौर, डाॅ. मीनाक्षी, डॉ. नीलम ढांडा, डॉ. राजबीर सहित विद्यार्थी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर के शासन में न्याय, मर्यादा एवं लोक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जो आज भी शासन-प्रशासन के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्हें भारत की सबसे दूरदर्शी महिला शासकों में से एक माना जाता है। 18वीं शताब्दी में, उन्होंने धर्म का संदेश फैलाने में और औद्योगीकरण के प्रचार-प्रसार में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था।
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उन्होंने अहिल्याबाई के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए उन्हें राजधर्म, सेवा और समाज सुधार की सजीव मूर्ति बताया। डॉ. नीलम ढांडा ने अहिल्याबाई की न्यायप्रियता, धर्मनिष्ठा एवं जनसेवा को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता डॉ. सीमा पांडेय ने पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, शासन प्रणाली, सामाजिक सुधारों एवं महिलाओं के उत्थान हेतु किए गए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. मोनिका ने अहिल्याबाई के कालखंड में पर्यावरणीय सततता एवं भारतीय स्थापत्य धरोहर पर केंद्रित विचार प्रस्तुत किए। डॉ. सतबीर ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर का नेतृत्व एक उदाहरण है कि किस प्रकार संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और नैतिक मूल्यों के साथ सशक्त प्रशासन किया जा सकता है। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्य डॉ. गगनदीप कौर, डाॅ. मीनाक्षी, डॉ. नीलम ढांडा, डॉ. राजबीर सहित विद्यार्थी मौजूद रहे।
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