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Kurukshetra News: किसानों को कम अवधि की पांच धान की किस्मों को अपनाने की कृषि विभाग ने दी सलाह
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कुरुक्षेत्र। किसानों को धान की लंबी अवधि की किस्मों के बजाय कम अवधि की धान की किस्मों को अपनाना चाहिए। जो किसान कम अवधि की धान की किस्मों को अपनाएगा उन किसानों की फसल जल्द पकेगी और खेत जल्द खाली हो जाएंगे। अहम पहलू यह है कि कृषि विभाग ने किसानों को धान की किस्म एचकेआर 48 इआर 126,पीबी 1509, पीबी 1692 व पीबी 1847 अपनाने की सलाह दी है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डाॅ. कर्मचंद ने कहा कि किसानों को लंबी अवधि की धान की किस्मों जैसे पूसा 44 तथा अन्य हाइब्रिड किस्मों को छोड़कर कम अवधि की धान की किस्में जैसे कि एचकेआर.-48, पीआर-126, पीबी -1509, पीबी-1692 तथा पीबी-1847 लगा सकते हैं, जिनको पकने में लगभग 108-120 दिन लगते हैं। इन किस्मों की कटाई जल्दी हो जाती है और खेत जल्दी खाली हो जाते है तथा अगली फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए पर्याप्त समय होता है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धान की कटाई उपरांत प्राय: किसान बचे हुए फसल अवशेषों में आग लगा देते हैं। यह चलन प्राय: हरियाणा, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा देखने को मिलता है। हरियाणा में लगभग 90 प्रतिशत धान के क्षेत्र में अधिक अवधि वाली धान की किस्म लगाई जाती है, जिससे अगली फसल की खेत की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं रहता और अगली फसल की बिजाई के लिए खेत तैयार करने की जल्दबाजी में किसान अपने खेतों को खाली करने हेतु उनमें आग लगा देते हैं।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डाॅ. कर्मचंद ने कहा कि किसानों को लंबी अवधि की धान की किस्मों जैसे पूसा 44 तथा अन्य हाइब्रिड किस्मों को छोड़कर कम अवधि की धान की किस्में जैसे कि एचकेआर.-48, पीआर-126, पीबी -1509, पीबी-1692 तथा पीबी-1847 लगा सकते हैं, जिनको पकने में लगभग 108-120 दिन लगते हैं। इन किस्मों की कटाई जल्दी हो जाती है और खेत जल्दी खाली हो जाते है तथा अगली फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए पर्याप्त समय होता है।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में धान की कटाई उपरांत प्राय: किसान बचे हुए फसल अवशेषों में आग लगा देते हैं। यह चलन प्राय: हरियाणा, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा देखने को मिलता है। हरियाणा में लगभग 90 प्रतिशत धान के क्षेत्र में अधिक अवधि वाली धान की किस्म लगाई जाती है, जिससे अगली फसल की खेत की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं रहता और अगली फसल की बिजाई के लिए खेत तैयार करने की जल्दबाजी में किसान अपने खेतों को खाली करने हेतु उनमें आग लगा देते हैं।
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